साइनस की पुरानी समस्या से निजात पाएँ, आयुष मंत्रालय ने बताए 6 योगासन

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साइनस की पुरानी समस्या से निजात पाएँ, आयुष मंत्रालय ने बताए 6 योगासन

सारांश

साइनस से पीड़ित लाखों भारतीयों के लिए आयुष मंत्रालय का संदेश है कि योग और प्राणायाम दवाइयों से बेहतर, दीर्घस्थायी राहत दे सकते हैं। भ्रामरी प्राणायाम से लेकर कपालभाति तक, ये छह आसन नाक की रुकावट दूर करने, सिर का भारीपन कम करने और सांस के प्रवाह को सामान्य करने में मदद करते हैं।

Key Takeaways

आयुष मंत्रालय साइनस की समस्या से राहत के लिए 6 प्रमुख योगासनों की सिफारिश करता है। भ्रामरी प्राणायाम — सिर और नाक की नसों को शांत करता है, 'ओम' की आवाज़ के साथ किया जाता है। नाड़ी शोधन प्राणायाम — दोनों नाड़ियों को संतुलित करके नाक की रुकावट दूर करता है। कपालभाति — तेजी से सांस छोड़ने वाला प्राणायाम, जो फेफड़ों और साइनस कैविटी को साफ करता है। ताड़ासन, गोमुखासन, जलनेति — मुद्रा सुधार, छाती खोलना और नाक की सफाई में सहायक। नियमित अभ्यास से नाक की रुकावट, सिर का भारीपन और सांस लेने में कठिनाई दूर होती है।

नई दिल्ली, 3 मई 2026। साइनस की समस्या से जूझना आजकल एक आम स्वास्थ्य चुनौती बन गई है। नाक की रुकावट, सिर में भारीपन और निरंतर असुविधा लाखों भारतीयों की दैनिक जीवन को बाधित कर रहे हैं। इस समस्या से स्थायी राहत के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने योगासन को एक प्रभावी और सुलभ समाधान के रूप में अनुशंसित किया है। मंत्रालय का स्पष्ट संदेश है —

Point of View

लेकिन आयुष मंत्रालय का दृष्टिकोण शरीर की आंतरिक शक्ति को जागृत करने पर केंद्रित है। योग केवल लक्षणों को दबाता नहीं है, बल्कि सांस के प्रवाह, नाक की जल निकासी और साइनस कैविटी के स्वाभाविक कार्य को बहाल करता है। भारत में जहाँ प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन साइनस की समस्याओं को बढ़ा रहे हैं, वहाँ योग जैसा निर्भीक, कम खर्चीला समाधान सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है। सवाल यह है कि क्या ये सिफारिशें पर्याप्त नैदानिक साक्ष्य पर आधारित हैं, या ये परंपरागत ज्ञान के विश्वास पर निर्भर हैं।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

साइनस की समस्या के लिए योग कितना प्रभावी है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित योग अभ्यास साइनस की नाक की रुकावट, सिर का भारीपन और सांस लेने की कठिनाई को कम कर सकता है। भ्रामरी प्राणायाम और कपालभाति विशेष रूप से साइनस कैविटी को साफ करने में मदद करते हैं।
भ्रामरी प्राणायाम को सही तरीके से कैसे करें?
आंखें बंद करके भौंहों के बीच ध्यान केंद्रित करें। गहरी सांस लें और फिर 'ओम' की तरह 'ज़्ज़्ज़्' की आवाज़ निकालते हुए धीरे-धीरे सांस छोड़ें। यह प्रक्रिया 5-10 बार दोहराएँ। इससे सिर और नाक की नसों को आराम मिलता है।
नाड़ी शोधन प्राणायाम क्या है और यह साइनस में कैसे मदद करता है?
नाड़ी शोधन में आप एक नथुने से सांस अंदर लेते हैं और दूसरे नथुने से बाहर निकालते हैं। यह दोनों नाड़ियों को संतुलित करता है, नाक की रुकावट दूर करता है और सांस के प्रवाह को सामान्य करता है।
कपालभाति और जलनेति से साइनस को कैसे लाभ होता है?
कपालभाति में तेजी से सांस छोड़ने की प्रक्रिया फेफड़ों और साइनस कैविटी को साफ करती है। जलनेति नाक को नमकीन पानी से धोने की क्रिया है, जो साइनस के संक्रमण और जमाव को सीधे साफ करती है।
क्या ये योगासन सभी के लिए सुरक्षित हैं?
आयुष मंत्रालय की सिफारिश के अनुसार, ये योगासन आमतौर पर सुरक्षित हैं, लेकिन गंभीर साइनस संक्रमण या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों में किसी योग प्रशिक्षक या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित है।
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