केरल तांबा तार चोरी: मेरठ गिरोह के 10 सदस्य त्रिशूर-कन्नूर से गिरफ्तार, हवाई यात्रा से आते थे
सारांश
मुख्य बातें
केरल पुलिस ने 21 सितंबर 2026 को तांबे के तार चोरी के एक संगठित गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी उत्तर प्रदेश के मेरठ के निवासी बताए जा रहे हैं और इन पर त्रिशूर तथा कन्नूर जिलों में बंद घरों, कार्यालयों और टेलीफोन एक्सचेंजों से तांबे के तार एवं कीमती सामान चोरी करने का आरोप है। पुलिस ने इस गिरोह के काम करने के एक असाधारण तरीके का भी खुलासा किया है।
गिरोह का अनोखा तौर-तरीका
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य हवाई जहाज़ से केरल पहुँचते थे, जबकि अपनी मोटरसाइकिलें पहले ही ट्रेन से कोच्चि के रेलवे स्टेशनों पर भेज देते थे। केरल पहुँचने के बाद वे स्टेशन से अपनी गाड़ियाँ उठाते और छोटे-छोटे समूहों में बँटकर अपने निशाने तलाश करते थे।
गिरफ्तार आरोपी रेहान से पूछताछ के बाद पुलिस को इस पूरे तंत्र की जानकारी मिली। रेहान ने बताया कि उड़ान भरने से पहले ही गिरोह लॉजिस्टिक्स की पूरी व्यवस्था कर लेता था, जिससे केरल पहुँचते ही वे सीधे काम पर लग जाते थे।
निशाने पर क्या था
पुलिस के मुताबिक, गिरोह उन स्थानों को प्राथमिकता देता था जहाँ बड़ी मात्रा में तांबे के तार मौजूद हों — जैसे टेलीफोन एक्सचेंज, बंद कार्यालय और खाली पड़े मकान। चोरी के बाद सामान को उसी इलाके में बेचकर गिरोह अगले ठिकाने की ओर रवाना हो जाता था।
यह कार्यशैली इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि गिरोह ने जाँच एजेंसियों की नज़र से बचने के लिए अंतरराज्यीय आवागमन के अलग-अलग साधनों का उपयोग किया — हवाई यात्रा से ट्रैकिंग मुश्किल होती थी, जबकि बाइकें ट्रेन से भेजकर स्थानीय गतिशीलता सुनिश्चित की जाती थी।
गिरफ्तारी का क्रम
रेहान से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने पहले कोच्चि से गिरोह के चार सदस्यों को हिरासत में लिया। इसके बाद कन्नूर में कथित तौर पर सक्रिय रहे पाँच अन्य सदस्यों को मौके पर ही गिरफ्तार किया गया। रेहान सहित कुल गिरफ्तारियों की संख्या 10 हो गई है।
जाँच का दायरा
पुलिस अब इस गिरोह की केरल में गतिविधियों के पूरे दायरे का आकलन कर रही है। जाँच में यह भी सामने आया है कि गिरोह कथित तौर पर अन्य राज्यों में भी इसी पद्धति से चोरी की वारदातें अंजाम देता था। गिरफ्तार सदस्यों से पूछताछ जारी है ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
यह मामला अंतरराज्यीय संगठित अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है, जहाँ गिरोह किसी एक राज्य में ऑपरेट करने के लिए सुनियोजित तरीके से दूर-दराज से आते हैं। आने वाले दिनों में जाँच का विस्तार और अन्य राज्यों की पुलिस से समन्वय संभव है।