13 जुलाई 2026
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भारत के 104 हवाई अड्डे 100% नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित, 2014 में थी शून्य से शुरुआत

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भारत के 104 हवाई अड्डे 100% नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित, 2014 में थी शून्य से शुरुआत

सारांश

2014 में शून्य से शुरू होकर आज 104 तक — भारत के हवाई अड्डों की हरित ऊर्जा यात्रा एक दशक में पूरी हुई। नागर विमानन मंत्री की घोषणा के साथ अब नज़रें 2030 के नेट-जीरो लक्ष्य पर हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने 13 जुलाई 2026 को घोषणा की कि भारत के 104 हवाई अड्डे अब 100% नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित हैं।
2014 में एक भी भारतीय हवाई अड्डा नवीकरणीय ऊर्जा पर नहीं चलता था; अब यह संख्या 104 हो गई है।
ऊर्जा का स्रोत: हवाई अड्डा परिसर में सौर संयंत्र और दीर्घकालिक जलविद्युत खरीद समझौते ।
इस पहल से प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।
कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 2015 में दुनिया का पहला पूर्णतः सौर ऊर्जा-चालित एयरपोर्ट बना था।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक सभी हवाई अड्डों को नेट-जीरो उत्सर्जन वाला बनाना है।

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने 13 जुलाई 2026 को घोषणा की कि भारत के 104 हवाई अड्डे अब अपनी संपूर्ण परिचालन बिजली आवश्यकता 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी कर रहे हैं। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ ऊर्जा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। गौरतलब है कि 2014 में एक भी भारतीय हवाई अड्डा नवीकरणीय ऊर्जा पर नहीं चलता था।

मंत्री का बयान और सरकार की प्रतिबद्धता

मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने अपनी पोस्ट में कहा, 'भारत के 104 हवाई अड्डे अब 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित हो रहे हैं, जबकि 2014 में यह संख्या शून्य थी।' उन्होंने आगे जोड़ा कि 'नया भारत केवल बातें नहीं कर रहा, बल्कि सतत विकास के लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।' यह घोषणा 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक ठोस कदम के रूप में देखी जा रही है।

ऊर्जा का स्रोत: सौर और जलविद्युत का संयोजन

इन 104 हवाई अड्डों की बिजली आवश्यकता दो प्रमुख स्रोतों से पूरी की जाती है — हवाई अड्डा परिसर में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र और दीर्घकालिक समझौतों के तहत खरीदी गई जलविद्युत (हाइड्रोपावर)। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के अनुसार, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की करीब 6 प्रतिशत बिजली उसके अपने सौर संयंत्रों से आती है, जबकि शेष 94 प्रतिशत दीर्घकालिक जलविद्युत खरीद समझौते के तहत प्राप्त होती है। इस पहल से प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।

मील के पत्थर: दिल्ली और कोचीन की अगुआई

जून 2022 में नई दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश का पहला एयरपोर्ट बना था जिसने अपनी संपूर्ण बिजली जरूरत सौर ऊर्जा और जलविद्युत के संयोजन से पूरी करनी शुरू की। इससे भी पहले, कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 2015 में पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला दुनिया का पहला एयरपोर्ट बना था और तब से उसने अपनी सौर क्षमता का लगातार विस्तार किया है। यह ताजा उपलब्धि नागर विमानन मंत्रालय की जून 2026 की उस घोषणा के बाद आई है जिसमें बताया गया था कि 88 से अधिक हवाई अड्डे पहले ही 100 प्रतिशत हरित ऊर्जा पर आ चुके हैं।

आगे का लक्ष्य: 2030 तक नेट-जीरो विमानन

सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश के सभी हवाई अड्डों को नेट-जीरो उत्सर्जन वाला बनाना है। यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य भारत के विमानन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर सबसे हरित क्षेत्रों में से एक बना सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय विमानन उद्योग पर कार्बन उत्सर्जन घटाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विशेषज्ञ यह भी रेखांकित करते हैं कि 'नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित' की परिभाषा में दीर्घकालिक जलविद्युत खरीद समझौते शामिल हैं — जो परिसर में उत्पन्न सौर ऊर्जा से अलग है। दिल्ली हवाई अड्डे का उदाहरण बताता है कि केवल 6% बिजली ऑन-साइट सौर से आती है, शेष 94% खरीदी गई जलविद्युत है — यह अंतर पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। 2030 का नेट-जीरो लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, पर इसकी विश्वसनीयता तभी सुनिश्चित होगी जब सरकार ऑन-साइट उत्पादन, खरीदी गई ऊर्जा और कार्बन ऑफसेट का अलग-अलग सत्यापन-योग्य डेटा सार्वजनिक करे।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के 104 हवाई अड्डे नवीकरणीय ऊर्जा से कैसे संचालित होते हैं?
ये हवाई अड्डे अपनी बिजली जरूरत दो स्रोतों से पूरी करते हैं — परिसर में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र और दीर्घकालिक जलविद्युत खरीद समझौते। उदाहरण के लिए, दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की 6% बिजली सौर संयंत्रों से और 94% जलविद्युत समझौते से आती है।
2014 की तुलना में अब कितने हवाई अड्डे हरित ऊर्जा पर हैं?
2014 में भारत का एक भी हवाई अड्डा नवीकरणीय ऊर्जा से नहीं चलता था। अब यह संख्या 104 हो गई है, जो एक दशक में शून्य से शुरू हुई यात्रा को दर्शाती है।
इस पहल से पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा?
इस पहल से प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है। यह भारत के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य और 2030 तक सभी हवाई अड्डों को नेट-जीरो बनाने के विमानन लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम है।
कोचीन और दिल्ली हवाई अड्डे इस यात्रा में कहाँ खड़े हैं?
कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 2015 में पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला दुनिया का पहला एयरपोर्ट बना था। दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जून 2022 में 100% नवीकरणीय ऊर्जा (सौर + जलविद्युत) पर आने वाला देश का पहला एयरपोर्ट बना।
सरकार का 2030 तक का लक्ष्य क्या है?
सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश के सभी हवाई अड्डों को नेट-जीरो उत्सर्जन वाला बनाना है। जून 2026 में मंत्रालय ने बताया था कि 88 से अधिक हवाई अड्डे पहले ही हरित ऊर्जा पर आ चुके थे, और अब यह संख्या 104 हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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