14 अक्टूबर 2026
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15 अक्टूबर पंचांग: ललिता पंचमी पर अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल और शुभ समय की पूरी जानकारी

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15 अक्टूबर पंचांग: ललिता पंचमी पर अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल और शुभ समय की पूरी जानकारी

सारांश

15 अक्टूबर को ललिता पंचमी पर देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी की पूजा का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 से दोपहर 12:35 बजे तक है। राहुकाल दोपहर 1:38 से 3:05 बजे तक रहेगा। जानिए ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल, नक्षत्र, योग और दिशाशूल का पूरा विवरण।

मुख्य बातें

15 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पंचमी — ललिता पंचमी — मनाई जाएगी।
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:49 से दोपहर 12:35 बजे तक; ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:51 से 5:39 बजे तक।
राहुकाल : दोपहर 1:38 से 3:05 बजे; यमगण्ड : 6:27 से 7:53 बजे; कुलिक काल : 9:20 से 10:46 बजे।
ज्येष्ठा नक्षत्र 15 अक्टूबर सुबह 4:03 बजे से 16 अक्टूबर सुबह 6:47 बजे तक; सौभाग्य योग रात 8:38 बजे तक।
चंद्रमा वृश्चिक राशि में; सूर्य कन्या राशि में; अमृत काल रात 8:58 से 10:45 बजे तक।
गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल — दक्षिण यात्रा से बचने की धार्मिक मान्यता।

15 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है, जिसे ललिता पंचमी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी की आराधना की जाती है और भक्त सुख-समृद्धि तथा पारिवारिक खुशहाली की कामना करते हैं। नवरात्रि के दौरान पड़ने वाली इस पंचमी तिथि का हिंदू परंपरा में विशेष धार्मिक महत्व है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा की स्थिति

पंचांग के अनुसार, 15 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 57 मिनट पर होगा। चंद्रोदय सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर और चंद्रास्त रात 9 बजकर 10 मिनट पर रहेगा। इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में और सूर्य कन्या राशि में संचार करेंगे।

शुभ मुहूर्त और अमृत काल

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा, जो प्रातःकालीन पूजा-ध्यान के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा — यह दिन का सर्वोत्तम शुभ काल माना जाता है। अमृत काल रात 8 बजकर 58 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।

नक्षत्र और योग

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठा नक्षत्र 15 अक्टूबर की सुबह 4 बजकर 3 मिनट से आरंभ होकर 16 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। सौभाग्य योग रात 8 बजकर 38 मिनट तक रहेगा, जिसके पश्चात शोभन योग प्रारंभ होगा। करण की दृष्टि से, बव करण रात 1 बजकर 13 मिनट से दोपहर 2 बजकर 16 मिनट तक, तत्पश्चात बालव करण 16 अक्टूबर की सुबह 3 बजकर 25 मिनट तक और फिर कौलव करण प्रभावी होगा।

राहुकाल और अशुभ समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य से पूर्व राहुकाल और अन्य अशुभ कालों का ध्यान रखना आवश्यक है। 15 अक्टूबर को राहुकाल दोपहर 1 बजकर 38 मिनट से 3 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड काल सुबह 6 बजकर 27 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक और कुलिक काल सुबह 9 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इन कालों में नया कार्य प्रारंभ करने से परंपरागत रूप से बचने की सलाह दी जाती है।

दिशाशूल और यात्रा संबंधी मान्यता

पंचांग के अनुसार, गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा से बचना उचित रहता है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो धार्मिक परंपरा के अनुसार उचित उपाय करके यात्रा की जा सकती है। ललिता पंचमी पर देवी की उपासना करने वाले भक्त विशेष रूप से इन मुहूर्तों का पालन करते हुए पूजन संपन्न कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो शुभ कार्यों के लिए पारंपरिक काल-गणना पर निर्भर रहता है। ललिता पंचमी नवरात्रि के उत्सव-काल में पड़ती है, जब इस जानकारी की माँग स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। पंचांग की यह भूमिका — धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक — भारतीय समाज में अभी भी व्यापक और जीवंत है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

15 अक्टूबर 2026 को कौन-सी तिथि है?
15 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है, जिसे ललिता पंचमी कहा जाता है। यह नवरात्रि के दौरान मनाई जाने वाली विशेष पंचमी है।
ललिता पंचमी पर पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त कब है?
15 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक है, जो पूजा के लिए दिन का सर्वोत्तम समय माना जाता है। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 से 5:39 बजे तक भी उपासना के लिए विशेष माना जाता है।
15 अक्टूबर 2026 को राहुकाल कितने बजे है?
15 अक्टूबर को राहुकाल दोपहर 1 बजकर 38 मिनट से 3 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में कोई नया शुभ कार्य प्रारंभ नहीं करना चाहिए।
15 अक्टूबर को कौन-सा नक्षत्र और योग है?
इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र सुबह 4 बजकर 3 मिनट से 16 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। सौभाग्य योग रात 8 बजकर 38 मिनट तक और उसके बाद शोभन योग प्रभावी होगा।
15 अक्टूबर को दिशाशूल किस दिशा में है और क्या यात्रा करनी चाहिए?
गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है, इसलिए मान्यताओं के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा में यात्रा से बचना उचित रहता है। यदि यात्रा अनिवार्य हो तो धार्मिक परंपरा के अनुसार उचित उपाय करके यात्रा की जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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