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150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासी कश्मीर से बंगाल पहुँचे, 7 अक्टूबर को डिपोर्टेशन संभव

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150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासी कश्मीर से बंगाल पहुँचे, 7 अक्टूबर को डिपोर्टेशन संभव

सारांश

जम्मू-कश्मीर से 150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को IAF विमान से बागडोगरा लाया गया — यह 2026 की उस बड़ी कार्रवाई का हिस्सा है जिसमें अब तक करीब 5,000 लोगों को डिपोर्ट किया जा चुका है। 7 अक्टूबर को BSF के ज़रिए अगला कदम उठेगा।

मुख्य बातें

150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को जम्मू-कश्मीर से IAF विमान द्वारा बागडोगरा हवाई अड्डे लाया गया।
सभी को BSF के नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर को सौंपा गया; 7 अक्टूबर 2026 को डिपोर्टेशन संभावित।
2026 में अब तक पश्चिम बंगाल के रास्ते 4,800 से 5,000 प्रवासियों को बांग्लादेश भेजा जा चुका है।
यदि बांग्लादेश स्वीकार करने से इनकार करे, तो प्रवासियों को जीरो लाइन तक पहुँचाकर बांग्लादेश में प्रवेश कराया जाएगा।
गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 2014 तक भारत ने 28,131 अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट किया था।
वोटर लिस्ट के SIR के चलते आने वाले महीनों में और अधिक डिपोर्टेशन की संभावना।

जम्मू-कश्मीर से हिरासत में लिए गए 150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को डिपोर्टेशन की प्रक्रिया के लिए पश्चिम बंगाल लाया गया है। सूत्रों के अनुसार, इन्हें भारतीय वायु सेना (IAF) के विमान के ज़रिए श्रीनगर से बागडोगरा हवाई अड्डे पर उतारा गया और आगे की कार्रवाई के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) के नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर के अधिकारियों को सौंपा गया। यह डिपोर्टेशन 7 अक्टूबर 2026 को होने की संभावना है।

मुख्य घटनाक्रम

अधिकारियों ने बताया कि सभी 150 प्रवासियों को फ़िलहाल एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। आधिकारिक चैनलों के माध्यम से इन्हें बांग्लादेश वापस भेजने की कोशिश की जाएगी। यदि बांग्लादेशी अधिकारी इन्हें स्वीकार करने से इनकार करते हैं, तो इन्हें सीमा की बाड़ के पार जीरो लाइन तक पहुँचाकर बांग्लादेश में प्रवेश कराया जाएगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रक्रिया सीमा के अलग-अलग हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से संचालित होती है, जिसमें प्रवासियों को जीरो लाइन के करीब छोड़ दिया जाता है और वे स्वयं बांग्लादेश में दाखिल होते हैं।

पश्चिम बंगाल — डिपोर्टेशन का केंद्रीय मार्ग

देश के अलग-अलग राज्यों से पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को अंतरराष्ट्रीय सीमा की निकटता के कारण पश्चिम बंगाल के रास्ते ही डिपोर्ट किया जाता है। गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक से पकड़े गए प्रवासियों को भी इसी मार्ग से भेजा जा चुका है।

रिपोर्टों के अनुसार, अकेले 2026 में पश्चिम बंगाल के रास्ते लगभग 4,800 से 5,000 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश डिपोर्ट किया जा चुका है। BSF ने पहले भी इसी तरह के कई डिपोर्टेशन अभियान सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।

ऐतिहासिक आँकड़े

विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आँकड़ों के अनुसार, 2009 और 2011 के बीच 23,653 लोगों को डिपोर्ट किया गया था। गृह मंत्रालय के अनुसार, 2014 तक यह संख्या 28,131 तक पहुँच गई थी। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि अवैध प्रवासियों का डिपोर्टेशन भारत की दीर्घकालिक सीमा प्रबंधन नीति का हिस्सा रहा है।

आगे की कार्रवाई

अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर से और अधिक अवैध प्रवासियों को पश्चिम बंगाल भेजा जा सकता है। कई राज्यों में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) का कार्य जारी होने के मद्देनज़र अधिकारियों का मानना है कि आने वाले महीनों में डिपोर्टेशन की प्रक्रिया और तेज़ हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अवैध प्रवासन के खिलाफ अपने अभियान को और सख्ती से लागू कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 प्रवासियों को इसी मार्ग से भेजा जा चुका है, जो दर्शाता है कि पश्चिम बंगाल अवैध प्रवासन के विरुद्ध केंद्र की कार्रवाई का एकमात्र निकास द्वार बन गया है। गौरतलब है कि SIR अभियान और डिपोर्टेशन की यह तेज़ रफ्तार एक साथ चल रही हैं, जो राजनीतिक संदर्भ को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल बनाती है। बांग्लादेशी अधिकारियों द्वारा नागरिकों को स्वीकार करने से इनकार की संभावना एक कूटनीतिक शून्य बनाती है — जिसका दीर्घकालिक समाधान द्विपक्षीय तंत्र के बिना संभव नहीं। मुख्यधारा की कवरेज जो नज़रअंदाज़ करती है, वह यह है कि 'पुश-बैक' प्रक्रिया की कानूनी स्थिति और अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी मानदंडों से इसकी संगति पर अभी तक कोई सार्वजनिक जवाबदेही नहीं है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पश्चिम बंगाल क्यों लाया गया?
इन्हें जम्मू-कश्मीर में हिरासत के बाद आधिकारिक चैनलों के माध्यम से बांग्लादेश डिपोर्ट करने के लिए पश्चिम बंगाल लाया गया है, क्योंकि पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से लगती है। IAF विमान से इन्हें श्रीनगर से बागडोगरा हवाई अड्डे पर उतारा गया।
डिपोर्टेशन की प्रक्रिया कब और कैसे होगी?
अधिकारियों के अनुसार, 7 अक्टूबर 2026 को BSF नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर के ज़रिए डिपोर्टेशन होने की संभावना है। प्रवासियों को सीमा की बाड़ के पार जीरो लाइन के निकट पहुँचाया जाएगा, जहाँ से वे स्वयं बांग्लादेश में प्रवेश करेंगे।
अगर बांग्लादेश इन्हें स्वीकार करने से इनकार करे तो क्या होगा?
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि बांग्लादेशी अधिकारी अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार करते हैं, तो प्रवासियों को सीमा पार धकेल दिया जाएगा। कुछ मामलों में बांग्लादेश ज़िम्मेदारी स्वीकार करता है, जबकि अन्य मामलों में इनकार करता है।
2026 में अब तक कितने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को डिपोर्ट किया गया है?
रिपोर्टों के अनुसार, 2026 में अब तक पश्चिम बंगाल के रास्ते लगभग 4,800 से 5,000 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश डिपोर्ट किया जा चुका है। गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 2014 तक कुल 28,131 अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट किया गया था।
क्या आगे और डिपोर्टेशन की संभावना है?
अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से और अधिक अवैध प्रवासियों को पश्चिम बंगाल भेजा जा सकता है। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के चलते आने वाले महीनों में डिपोर्टेशन की प्रक्रिया और तेज़ होने का अनुमान है।
राष्ट्र प्रेस
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