150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासी कश्मीर से बंगाल पहुँचे, 7 अक्टूबर को डिपोर्टेशन संभव
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर से हिरासत में लिए गए 150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को डिपोर्टेशन की प्रक्रिया के लिए पश्चिम बंगाल लाया गया है। सूत्रों के अनुसार, इन्हें भारतीय वायु सेना (IAF) के विमान के ज़रिए श्रीनगर से बागडोगरा हवाई अड्डे पर उतारा गया और आगे की कार्रवाई के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) के नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर के अधिकारियों को सौंपा गया। यह डिपोर्टेशन 7 अक्टूबर 2026 को होने की संभावना है।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों ने बताया कि सभी 150 प्रवासियों को फ़िलहाल एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। आधिकारिक चैनलों के माध्यम से इन्हें बांग्लादेश वापस भेजने की कोशिश की जाएगी। यदि बांग्लादेशी अधिकारी इन्हें स्वीकार करने से इनकार करते हैं, तो इन्हें सीमा की बाड़ के पार जीरो लाइन तक पहुँचाकर बांग्लादेश में प्रवेश कराया जाएगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रक्रिया सीमा के अलग-अलग हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से संचालित होती है, जिसमें प्रवासियों को जीरो लाइन के करीब छोड़ दिया जाता है और वे स्वयं बांग्लादेश में दाखिल होते हैं।
पश्चिम बंगाल — डिपोर्टेशन का केंद्रीय मार्ग
देश के अलग-अलग राज्यों से पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को अंतरराष्ट्रीय सीमा की निकटता के कारण पश्चिम बंगाल के रास्ते ही डिपोर्ट किया जाता है। गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक से पकड़े गए प्रवासियों को भी इसी मार्ग से भेजा जा चुका है।
रिपोर्टों के अनुसार, अकेले 2026 में पश्चिम बंगाल के रास्ते लगभग 4,800 से 5,000 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश डिपोर्ट किया जा चुका है। BSF ने पहले भी इसी तरह के कई डिपोर्टेशन अभियान सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।
ऐतिहासिक आँकड़े
विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आँकड़ों के अनुसार, 2009 और 2011 के बीच 23,653 लोगों को डिपोर्ट किया गया था। गृह मंत्रालय के अनुसार, 2014 तक यह संख्या 28,131 तक पहुँच गई थी। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि अवैध प्रवासियों का डिपोर्टेशन भारत की दीर्घकालिक सीमा प्रबंधन नीति का हिस्सा रहा है।
आगे की कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर से और अधिक अवैध प्रवासियों को पश्चिम बंगाल भेजा जा सकता है। कई राज्यों में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) का कार्य जारी होने के मद्देनज़र अधिकारियों का मानना है कि आने वाले महीनों में डिपोर्टेशन की प्रक्रिया और तेज़ हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अवैध प्रवासन के खिलाफ अपने अभियान को और सख्ती से लागू कर रही है।