22 सितंबर 2026 पंचांग: परिवर्तनी एकादशी पर विष्णु पूजा, अभिजीत मुहूर्त 11:55 से 12:43 बजे तक
सारांश
मुख्य बातें
22 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की परिवर्तनी एकादशी तिथि है, जो रात 9:43 बजे तक रहेगी और उसके पश्चात द्वादशी तिथि आरंभ होगी। हिंदू काल-गणना पद्धति पंचांग के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु — विशेषकर उनके वामन स्वरूप — की आराधना सर्वाधिक फलदायी मानी गई है। सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों सुबह 6:19 बजे और शाम 6:19 बजे क्रमशः निर्धारित हैं।
परिवर्तनी एकादशी का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के दौरान इसी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीर सागर में अपनी करवट बदलते हैं — इसी कारण इसे परिवर्तनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखना और भगवान विष्णु के वामन अवतार की विधिपूर्वक पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।
ग्रह-नक्षत्र स्थिति
पंचांग के अनुसार 22 सितंबर को सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेंगे। यह आकाश मंडल का 12वाँ नक्षत्र है, जो सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से कन्या राशि के 10 डिग्री 00 मिनट तक फैला हुआ है। इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव और देवता अर्यमा हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस नक्षत्र में जन्मे जातक तेजस्वी, महत्वाकांक्षी और नेतृत्व क्षमता से युक्त होते हैं।
सूर्य इस दिन कन्या राशि में विराजमान रहेंगे, जिससे व्यावहारिक एवं योजनाबद्ध कार्यशैली विशेष लाभकारी मानी जाती है। वहीं चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेंगे, जिससे शनि के प्रभाव में व्यक्ति का स्वभाव अनुशासित और व्यवहारिक होता है। चंद्रोदय दोपहर 3:43 बजे और चंद्रास्त रात 2:56 बजे होगा।
शुभ मुहूर्त और काल
इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण शुभ काल अभिजीत मुहूर्त है, जो सुबह 11:55 से दोपहर 12:43 बजे तक रहेगा — लगभग 48 मिनट की यह अवधि दिन का आठवाँ मुहूर्त होती है जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर स्थित होते हैं। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के दोष और अशुभ प्रभाव स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
अमृतकाल इस दिन रात 10:00 से 11:44 बजे तक रहेगा। ज्योतिष के अनुसार यह सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण सर्वश्रेष्ठ समयावधि है, जो नए व्यापार, निवेश, पूजा और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए उत्तम मानी गई है।
अशुभ काल और परहेज
मंगलवार को अतिगंड योग शाम 4:29 बजे तक रहेगा — यह 27 नित्य योगों में छठा योग है, जिसे अशुभ और संघर्षकारी माना जाता है। इस योग में 66 डिग्री 40 मिनट से 80 डिग्री के बीच सूर्य-चंद्र की दूरी रहती है। इस दौरान विवाह, नया व्यापार, गृह प्रवेश और कृषि से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों से परहेज उचित माना गया है।
राहुकाल दोपहर 3:19 से 4:49 बजे तक रहेगा — इस अवधि में कोई नया शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। गुलिक काल दोपहर 12:19 से 1:49 बजे तक और यमगंड काल सुबह 9:19 से 10:49 बजे तक रहेगा। यमगंड काल में नया व्यापार, यात्रा और धन लेनदेन वर्जित माना गया है। दिशाशूल इस दिन उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिशा में रहेगा, अतः इन दिशाओं में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।
दिन का सारांश
कुल मिलाकर 22 सितंबर 2026 का दिन परिवर्तनी एकादशी की दृष्टि से धार्मिक महत्व का है। अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल में पूजा-पाठ, व्रत और महत्वपूर्ण कार्य करना सर्वाधिक लाभकारी रहेगा, जबकि राहुकाल, गुलिक काल, यमगंड और अतिगंड योग की अवधियों में नए कार्य टालना ही श्रेयस्कर है।