25 अक्टूबर 2026 का पंचांग: हर्षण योग शाम 5:21 तक, रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा से बचें
सारांश
मुख्य बातें
रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 11:56 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात पूर्णिमा तिथि आरंभ होगी। इस दिन हर्षण योग शाम 5:21 बजे तक विद्यमान रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। पंचांग के अनुसार रविवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा, इसलिए उस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह ज्योतिष शास्त्र में दी जाती है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय
रविवार को सूर्योदय सुबह 6:32 बजे और सूर्यास्त शाम 5:49 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 5:08 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 6:25 बजे होगा। सूर्य देव इस दिन स्वाति नक्षत्र में स्थित रहेंगे, जबकि चंद्र देव मीन राशि में गोचर करेंगे।
नक्षत्र और राशियों का प्रभाव
ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य स्वाति नक्षत्र में होते हैं, तो लोगों में पुरानी परिस्थितियों एवं बंधनों से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की भावना प्रबल होती है। स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) हैं और इसके स्वामी राहु हैं।
रविवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में इसे सूर्य की नीचस्थ स्थिति कहा जाता है, क्योंकि तुला राशि वायु तत्व और शुक्र ग्रह के अधीन है, जो सूर्य के स्वभाव के विपरीत है। इस स्थिति में आत्मबल एवं ऊर्जा कुछ कमज़ोर महसूस हो सकती है और निर्णय लेने में कठिनाई आ सकती है। वहीं, चंद्रमा मीन राशि में होने से व्यक्ति का स्वभाव कोमल, परोपकारी और मिलनसार बनता है तथा ईश्वर एवं पूजा-पाठ में रुचि बढ़ती है।
शुभ मुहूर्त और हर्षण योग
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है — जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होते हैं। मान्यता है कि इस मुहूर्त में आरंभ किए गए कार्यों से समस्त अशुभ प्रभाव स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
हर्षण योग, जो 27 नित्य योगों में 14वें क्रम पर है, शाम 5:21 बजे तक रहेगा। 'हर्षण' का शाब्दिक अर्थ खुशी, आनंद और उत्साह है। इस योग के अधिष्ठाता भग देव (सौभाग्य और धन के देवता) एवं सूर्य माने गए हैं।
शाम 5:03 बजे से 6:34 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिष में अमृतकाल को सर्वाधिक शुभ एवं सकारात्मक ऊर्जा से पूर्ण समयावधि माना गया है। यह नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए उत्तम समय है।
अशुभ काल और दिशाशूल
रविवार को राहुकाल शाम 4:24 बजे से 5:49 बजे तक रहेगा। इस समय किसी नए या शुभ कार्य का आरंभ नहीं करना चाहिए। यमगंड काल दोपहर 12:10 बजे से 1:35 बजे तक रहेगा, जिसे मृत्यु के देवता यमराज से संबद्ध माना जाता है। इस दौरान नया व्यापार, यात्रा और पैसों के लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है।
गुलिक काल दोपहर 3:00 बजे से 4:24 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहते हैं। इस काल में नए कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए, हालाँकि बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या नियमित निवेश करना अनुकूल माना जाता है।
इस दिन दिशाशूल पश्चिम दिशा में है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना या उस दिशा में प्रस्थान करना अशुभ माना जाता है। अतः रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा से यथासंभव बचना चाहिए।
पंचांग का संक्षिप्त सारांश
पंचांग हिंदू काल-गणना की वह पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर शुभ-अशुभ समय, तिथि, नक्षत्र और योग निर्धारित करती है। इसे किसी भी महत्वपूर्ण कार्य — चाहे वह विवाह हो, यात्रा हो, निवेश हो या पूजा-पाठ — से पूर्व देखने की परंपरा सदियों पुरानी है और आज भी करोड़ों हिंदू परिवारों में अनुसरण की जाती है।