31 अक्टूबर 2026 का पंचांग: अमृतकाल तड़के 3:24 से 4:53 बजे तक, पूर्व दिशा में यात्रा से बचें
सारांश
मुख्य बातें
31 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि शाम 4:57 बजे तक रहेगी, जिसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ होगी जो 1 नवंबर दोपहर 2:51 बजे तक चलेगी। इस दिन अमृतकाल तड़के 3:24 बजे से 4:53 बजे तक रहेगा, जिसे नए कार्यों, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण निवेश के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। पंचांग के अनुसार शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में है, इसलिए संभव हो तो इस दिशा में यात्रा टालने की सलाह दी जाती है।
तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय
शनिवार को सूर्योदय सुबह 6:35 बजे और सूर्यास्त शाम 5:45 बजे होगा। चंद्रोदय रात 10:46 बजे और चंद्रास्त अगले दिन दोपहर 12:41 बजे होगा। षष्ठी तिथि शुक्रवार रात 7:25 बजे से आरंभ होकर शनिवार शाम 4:57 बजे तक रहेगी।
नक्षत्र, राशि और योग
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) हैं और स्वामी राहु हैं। इस नक्षत्र में सूर्य की उपस्थिति से पुरानी परिस्थितियों और बंधनों से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की प्रवृत्ति बलवती होती है।
शनिवार शाम 5:29 बजे तक सिद्ध योग रहेगा, जो 27 योगों में से एक विशेष शुभ योग है। ज्योतिष के अनुसार इस योग में आरंभ किए गए कार्य, पूजा-पाठ और मांगलिक कार्य बाधारहित और सफल होते हैं। जब कोई विशेष मुहूर्त उपलब्ध न हो, तब सिद्ध योग में कार्य प्रारंभ करना उत्तम माना जाता है।
सूर्य तुला राशि में रहेंगे — ज्योतिष में इसे सूर्य का नीच स्थान माना जाता है। अग्नि तत्व के कारक सूर्य और वायु तत्व की तुला राशि के इस संयोग से आत्मबल और निर्णय-क्षमता पर कुछ दबाव महसूस हो सकता है। चंद्र देव मिथुन राशि में रहेंगे, जिससे मन तर्क, बातचीत और नवीन जानकारी अर्जित करने की ओर अग्रसर रहेगा — लेखन, मीडिया, परामर्श और विश्लेषण से जुड़े क्षेत्रों में लाभकारी प्रभाव संभव है।
शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृतकाल
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है, जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होते हैं। मान्यता है कि इस मुहूर्त में आरंभ किए गए कार्यों से सभी प्रकार के दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
अमृतकाल तड़के 3:24 बजे से 4:53 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार यह नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ समय है, क्योंकि इस अवधि में सकारात्मक ऊर्जा अपने चरम पर होती है।
अशुभ काल: राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
शनिवार को राहुकाल सुबह 9:22 बजे से 10:46 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को किसी नए या शुभ कार्य के आरंभ के लिए वर्जित माना गया है। यह प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का होता है और स्थान के अनुसार इसका समय बदलता है।
यमगंड काल दोपहर 1:34 बजे से 2:57 बजे तक रहेगा। इस अवधि में नया व्यापार, यात्रा और पैसों के लेन-देन से बचने की सलाह दी जाती है। गुलिक काल सुबह 6:35 बजे से 7:59 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहते हैं; हालाँकि बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या नियमित निवेश इस काल में किया जा सकता है।
दिशाशूल और यात्रा परामर्श
शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार दिशाशूल उस दिशा को इंगित करता है, जिसमें उस दिन यात्रा करना अशुभ माना जाता है। यदि पूर्व दिशा में यात्रा अनिवार्य हो, तो गुड़ खाकर या दही का सेवन कर निकलना शुभ बताया गया है। इस दिन के शुभ मुहूर्तों का उपयोग धार्मिक, व्यावसायिक और व्यक्तिगत कार्यों के लिए करना फलदायी रहेगा।