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22 अगस्त 2026 पंचांग: विष्कम्भ योग में भगवान विष्णु और शनिदेव की पूजा शुभ, सुबह 4:55 से 6:43 बजे तक अमृत काल

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22 अगस्त 2026 पंचांग: विष्कम्भ योग में भगवान विष्णु और शनिदेव की पूजा शुभ, सुबह 4:55 से 6:43 बजे तक अमृत काल

सारांश

22 अगस्त 2026 के पंचांग में श्रावण शुक्ल एकादशी, विष्कम्भ योग और सुबह 4:55 से 6:43 बजे तक अमृत काल का संयोग है। शनिवार होने से शनिदेव और भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदाई मानी गई है। राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल में नए कार्य टालने की सलाह है।

मुख्य बातें

22 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल दशमी तड़के 2:00 बजे तक, इसके बाद एकादशी तिथि आरंभ।
अमृत काल सुबह 4:55 से 6:43 बजे तक — पूजा और मंगल कार्यों के लिए श्रेष्ठ समय।
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:55 बजे — दिन का सर्वाधिक शुभ काल।
राहुकाल सुबह 9:19 से दोपहर 12:30 , गुलिक काल सुबह 6:09–7:44 , यमगंड काल दोपहर 2:04–3:39 बजे — इन समयों में नए कार्य वर्जित।
सूर्य मघा नक्षत्र में; चंद्रमा दोपहर 2:50 बजे तक ज्येष्ठा , फिर मूल नक्षत्र में।
पूर्व दिशा में दिशाशूल — पूर्व दिशा की यात्रा से परहेज की सलाह।

हिंदू पंचांग के अनुसार 22 अगस्त 2026 (शनिवार) को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि तड़के 2:00 बजे तक रहेगी, जिसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ होगा। इस दिन भगवान विष्णु और शनिदेव की आराधना विशेष फलदाई मानी गई है, क्योंकि शनिवार का दिन परंपरागत रूप से शनिदेव को समर्पित होता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय

22 अगस्त को सूर्योदय सुबह 6:09 बजे और सूर्यास्त शाम 6:50 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 2:51 बजे और चंद्रास्त रात 1:27 बजे होगा। पंचांग गणना के अनुसार, इस दिन सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा। चंद्रमा दोपहर 2:50 बजे तक ज्येष्ठा नक्षत्र में रहेगा और इसके पश्चात मूल नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

योग और राशि स्थिति

इस शनिवार विष्कम्भ योग रहेगा। सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार, इस दिन पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए पूर्व दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेष ज्योतिषीय उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

शुभ मुहूर्त और अमृत काल

22 अगस्त को अमृत काल सुबह 4:55 से 6:43 बजे तक रहेगा — यह समय पूजा, ध्यान और मंगल कार्यों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:55 बजे तक रहेगा।

अशुभ काल — किन समयों में नए काम न करें

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तीन अशुभ काल रहेंगे जिनमें नए कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। राहुकाल सुबह 9:19 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक, गुलिक काल सुबह 6:09 से 7:44 बजे तक, और यमगंड काल दोपहर 2:04 से 3:39 बजे तक रहेगा। इन अवधियों में विवाह, गृह प्रवेश, निवेश या यात्रा जैसे महत्वपूर्ण कार्य टालने की सलाह ज्योतिष शास्त्र देता है।

श्रावण शनिवार का धार्मिक महत्व

श्रावण मास में पड़ने वाला शनिवार धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन शनिदेव के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से दोहरा पुण्य मिलने की मान्यता है। एकादशी तिथि के आरंभ के साथ विष्णु भक्त व्रत और पूजन की तैयारी भी इसी दिन से शुरू कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यात्रा, निवेश और पारिवारिक निर्णयों को प्रभावित करने वाला व्यावहारिक कैलेंडर है। श्रावण मास में शनिवार का संयोग इस सप्ताह के पंचांग को विशेष रूप से प्रासंगिक बनाता है, क्योंकि शनिदेव और विष्णु — दोनों की एक साथ आराधना का अवसर दुर्लभ माना जाता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर केवल शुभ मुहूर्त तक सीमित रहती है, जबकि अशुभ काल की सटीक जानकारी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी शुभ काल की — विशेषकर व्यापारिक और यात्रा निर्णयों के संदर्भ में।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

22 अगस्त 2026 को कौन-सी तिथि है?
22 अगस्त 2026 को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि तड़के 2:00 बजे तक रहेगी, जिसके बाद एकादशी तिथि आरंभ होगी। यह तिथि भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है।
22 अगस्त को अमृत काल कब से कब तक है?
22 अगस्त 2026 को अमृत काल सुबह 4:55 बजे से 6:43 बजे तक रहेगा। इस समय पूजा, ध्यान और शुभ कार्यों का आरंभ करना अत्यंत फलदाई माना जाता है।
22 अगस्त को राहुकाल कब है और क्या सावधानी बरतें?
22 अगस्त को राहुकाल सुबह 9:19 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में कोई नया कार्य, यात्रा या निवेश आरंभ नहीं करना चाहिए।
22 अगस्त 2026 को कौन-सा योग है?
इस दिन विष्कम्भ योग रहेगा। हर्षण योग इस दिन नहीं है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विष्कम्भ योग में किए गए कार्यों का फल सोच-समझकर प्राप्त होता है।
22 अगस्त को किस दिशा में यात्रा से बचना चाहिए?
22 अगस्त 2026 को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए ज्योतिष और वास्तु परंपरा के अनुसार पूर्व दिशा की यात्रा से परहेज करने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेष ज्योतिषीय उपाय अपनाए जा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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