26 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

27 अगस्त 2026 पंचांग: पूर्णिमा पर विष्णु-चंद्र पूजा शुभ, दोपहर 3:12–4:54 बजे अमृत काल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
27 अगस्त 2026 पंचांग: पूर्णिमा पर विष्णु-चंद्र पूजा शुभ, दोपहर 3:12–4:54 बजे अमृत काल

सारांश

27 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा और हयग्रीव जयंती का दुर्लभ संयोग है। सुबह 9:09 बजे के बाद विष्णु और चंद्र देव की पूजा सर्वाधिक फलदायी रहेगी। अमृत काल दोपहर 3:12 से 4:54 बजे तक; राहुकाल और दक्षिण दिशाशूल से सावधानी ज़रूरी।

मुख्य बातें

27 अगस्त 2026 (गुरुवार) को श्रावण शुक्ल चतुर्दशी सुबह 9:09 बजे तक, उसके बाद पूर्णिमा प्रारंभ।
हयग्रीव जयंती के अवसर पर भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार की पूजा विद्या और बुद्धि के लिए विशेष फलदायी।
अमृत काल दोपहर 3:12 से 4:54 बजे तक; अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:03 से 12:53 बजे तक।
राहुकाल दोपहर 2:02–3:37 बजे , गुलिक काल सुबह 9:19–10:54 बजे , यमगंड काल सुबह 6:11–7:45 बजे — इन समयों में नए कार्य वर्जित।
सूर्य मघा नक्षत्र / सिंह राशि में, चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र / मकर राशि में।
दक्षिण दिशा में दिशाशूल — इस दिशा में यात्रा से बचें।

हिंदू पंचांग के अनुसार 27 अगस्त 2026 (गुरुवार) को श्रावण शुक्ल चतुर्दशी तिथि सुबह 9:09 बजे तक रहेगी, जिसके बाद पूर्णिमा का आरंभ होगा। इस दिन हयग्रीव जयंती भी पड़ रही है, जो विद्या, बुद्धि और ज्ञान के अधिष्ठाता भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार की आराधना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

मुख्य तिथि और नक्षत्र स्थिति

पंचांग के अनुसार 27 अगस्त 2026 को सूर्य मघा नक्षत्र और सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र और मकर राशि में विराजमान रहेगा। सूर्योदय सुबह 6:11 बजे और सूर्यास्त शाम 6:45 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 6:22 बजे तथा चंद्रास्त अगले दिन सुबह 6:02 बजे होगा।

शुभ मुहूर्त और अमृत काल

इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा, जिसे दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय माना जाता है। अमृत काल दोपहर 3:12 बजे से 4:54 बजे तक रहेगा — यह समय नए कार्यों के शुभारंभ, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए अत्यंत अनुकूल है।

योग की दृष्टि से इस दिन शोभन योग सुबह 7:54 बजे तक रहेगा, उसके बाद अतिगंड योग प्रारंभ होगा। पूर्णिमा के अवसर पर सुबह 9:09 बजे के बाद भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करना पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार सर्वाधिक फलदायी बताया गया है।

अशुभ काल — इन समयों में नए कार्य न करें

पंचांग में तीन प्रमुख अशुभ कालों का उल्लेख है, जिनमें नए कार्यों का शुभारंभ वर्जित माना जाता है:

राहुकालदोपहर 2:02 बजे से 3:37 बजे तक। गुलिक कालसुबह 9:19 बजे से 10:54 बजे तक। यमगंड कालसुबह 6:11 बजे से 7:45 बजे तक।

दिशाशूल और यात्रा परामर्श

गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचना उचित माना गया है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेषज्ञ ज्योतिषी से उचित उपाय जानकर प्रस्थान करने की सलाह दी जाती है।

हयग्रीव जयंती का महत्व

हयग्रीव जयंती विद्यार्थियों, शिक्षकों और ज्ञान-साधकों के लिए विशेष महत्व रखती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार ने वेदों की रक्षा की थी। इस दिन उनकी आराधना से बुद्धि, स्मरण शक्ति और विद्या में वृद्धि होती है — ऐसा शास्त्रों में वर्णित है। पूर्णिमा और हयग्रीव जयंती का यह दुर्लभ संयोग इस दिन को धार्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विशेषकर श्रावण माह में जब धार्मिक गतिविधियाँ चरम पर होती हैं। इस वर्ष पूर्णिमा और हयग्रीव जयंती का एक साथ पड़ना उन परिवारों के लिए विशेष प्रासंगिक है जो बच्चों की शिक्षा से जुड़े अनुष्ठान करते हैं। हालाँकि ये मान्यताएँ परंपरा पर आधारित हैं और इनकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं होती, तथापि करोड़ों हिंदू परिवारों की दिनचर्या में पंचांग की केंद्रीय भूमिका इसे सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

27 अगस्त 2026 को कौन-सी तिथि है?
27 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल चतुर्दशी सुबह 9:09 बजे तक रहेगी, उसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी। यह दिन हयग्रीव जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
27 अगस्त 2026 को अमृत काल कितने बजे है?
27 अगस्त 2026 को अमृत काल दोपहर 3:12 बजे से 4:54 बजे तक रहेगा। इस समय को पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।
27 अगस्त को राहुकाल किस समय है?
27 अगस्त 2026 (गुरुवार) को राहुकाल दोपहर 2:02 बजे से 3:37 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस समय में नए कार्यों का शुभारंभ नहीं करना चाहिए।
हयग्रीव जयंती 2026 पर क्या करें?
हयग्रीव जयंती पर भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार की आराधना की जाती है, जो विद्या और ज्ञान के देवता माने जाते हैं। पूर्णिमा आरंभ होने के बाद अर्थात सुबह 9:09 बजे के बाद पूजा करना विशेष फलदायी बताया गया है।
27 अगस्त 2026 को दिशाशूल किस दिशा में है?
27 अगस्त 2026 को दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा में यात्रा से बचना उचित माना गया है; अनिवार्य होने पर विशेषज्ञ से उपाय जानें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 5 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले