31 मई को दिखेगा ब्लू मून: जानें फुल मून कैसे बनता है और चंद्रमा की 8 कलाएं क्या हैं
सारांश
मुख्य बातें
31 मई 2025 की रात आसमान में पूर्णिमा (फुल मून) का अद्भुत नज़ारा देखने को मिलेगा — और यह कोई साधारण पूर्णिमा नहीं, बल्कि ब्लू मून होगी, क्योंकि यह मई महीने की दूसरी पूर्णिमा है। खगोल विज्ञान के अनुसार, फुल मून वह स्थिति होती है जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य लगभग एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा का पूरा प्रकाशित भाग पृथ्वी से दिखाई देता है।
फुल मून कैसे बनता है
वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य हमारे सौर मंडल का एकमात्र ऐसा पिंड है जो स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करता है। चंद्रमा अपनी रोशनी खुद नहीं बनाता — वह सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करता है, और इसी परावर्तित प्रकाश को हम चांदनी के रूप में देखते हैं। चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर लगातार परिक्रमा करता रहता है, जिससे पृथ्वी से दिखाई देने वाला उसका प्रकाशित हिस्सा हर रात बदलता रहता है।
फुल मून की स्थिति में चंद्रमा सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में होता है। इस कारण उसका पूरा प्रकाशित भाग पृथ्वी की ओर होता है और वह गोल तथा अत्यंत चमकदार नज़र आता है। पूर्णिमा का चांद आमतौर पर सूर्यास्त के समय उगता है और सूर्योदय के समय अस्त होता है।
चंद्रमा की 8 प्रमुख कलाएं
चंद्रमा का यह बदलाव उसकी आठ प्रमुख कलाओं (मून फेज) के कारण होता है, जो लगभग 29.5 दिनों के चक्र में दोहराती रहती हैं। ये कलाएं इस प्रकार हैं:
1. अमावस्या (न्यू मून) — चंद्रमा पृथ्वी से दिखाई नहीं देता।
2. बढ़ता हुआ अर्धचंद्र (वैक्सिंग क्रिसेंट) — चांद की पतली कोर दिखने लगती है।
3. प्रथम चतुर्थांश (फर्स्ट क्वार्टर) — आधा चांद प्रकाशित दिखता है।
4. बढ़ता हुआ गिबस (वैक्सिंग गिबस) — आधे से अधिक भाग चमकता है।
5. पूर्णिमा (फुल मून) — पूरा चांद प्रकाशित।
6. घटता हुआ गिबस (वेनिंग गिबस) — प्रकाशित हिस्सा घटने लगता है।
7. तृतीय चतुर्थांश (थर्ड क्वार्टर) — फिर आधा चांद।
8. घटता हुआ अर्धचंद्र (वेनिंग क्रिसेंट) — अमावस्या से पहले की पतली कोर।
ब्लू मून, सुपरमून और ब्लड मून क्या होते हैं
खगोल विज्ञान में कुछ विशेष चंद्र घटनाएं भी होती हैं जो आम पूर्णिमा से अलग होती हैं। सुपरमून के दौरान चंद्रमा पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट होता है, जिससे वह सामान्य से बड़ा और अधिक चमकीला दिखाई देता है। ब्लड मून चंद्र ग्रहण के दौरान होता है, जब पृथ्वी की छाया में आने से चांद लाल रंग का नज़र आता है।
ब्लू मून का नाम सुनकर भले ही चांद के नीले रंग का आभास हो, लेकिन वास्तव में इसका रंग नीला नहीं होता। सामान्य परिभाषा के अनुसार, एक ही कैलेंडर माह में आने वाली दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहते हैं। खगोल विज्ञान की एक अन्य परिभाषा के अनुसार, किसी मौसम में चार पूर्णिमाएं होने पर उनमें से तीसरी पूर्णिमा को भी ब्लू मून कहा जाता है।
31 मई की पूर्णिमा का महत्व
31 मई 2025 की पूर्णिमा इसलिए विशेष है क्योंकि यह मई महीने की दूसरी पूर्णिमा है, यानी यह ब्लू मून की श्रेणी में आती है। ऐसी खगोलीय घटनाएं अपेक्षाकृत कम होती हैं और आकाश प्रेमियों के लिए यह एक दुर्लभ अवसर है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह पूर्णिमा किसी भी अन्य पूर्णिमा जैसी ही है, लेकिन इसकी खास पहचान कैलेंडर के संयोग से बनती है। आने वाले दिनों में चंद्रमा धीरे-धीरे घटते हुए अमावस्या की ओर बढ़ेगा, और फिर यही चक्र दोहराएगा।