जून 2025 में पूरे महीने दिखेगी 'प्लैनेट परेड': शुक्र, बृहस्पति, बुध एक कतार में, जानें 'एक्लिप्टिक' का रहस्य
सारांश
मुख्य बातें
जून 2025 का महीना खगोल प्रेमियों के लिए असाधारण अवसर लेकर आया है — अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार, शुक्र, बृहस्पति और बुध ग्रहों की 'प्लैनेट परेड' केवल 11 से 15 जून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दृश्य पूरे जून माह में विभिन्न रूपों में आकाश में देखा जा सकता है। नई दिल्ली सहित देशभर में खगोल प्रेमी और फोटोग्राफर इस दुर्लभ खगोलीय संयोजन का इंतज़ार कर रहे हैं।
प्लैनेट परेड: क्या और कब
नासा के अनुसार, 11 से 15 जून के बीच सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी क्षितिज के निकट बुध, शुक्र और बृहस्पति एक आकर्षक कतार में दिखाई देंगे। इस दौरान शुक्र सबसे चमकीला पिंड होगा, जिसे नंगी आँखों से आसानी से पहचाना जा सकता है। बुध क्षितिज के बेहद करीब रहेगा, इसलिए उसे देखने के लिए साफ पश्चिमी आकाश और सूर्यास्त के ठीक बाद का सही समय आवश्यक होगा।
गौरतलब है कि 9 जून के आसपास शुक्र और बृहस्पति का बेहद नज़दीकी मिलन — जिसे खगोल विज्ञान में 'कंजंक्शन' कहते हैं — पहले ही देखा जा चुका है, जब दोनों ग्रह आकाश में एक-दूसरे के अत्यंत समीप नज़र आए।
एक्लिप्टिक: ग्रहों की कतार का वैज्ञानिक कारण
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दृश्य के पीछे एक सुस्थापित वैज्ञानिक सिद्धांत है। हमारे सौरमंडल के सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर लगभग एक ही काल्पनिक समतल पर परिक्रमा करते हैं, जिसे 'एक्लिप्टिक' कहा जाता है। पृथ्वी से देखने पर यही कारण है कि ग्रह कभी-कभी आकाश के एक ही पट्टी में एक साथ दिखाई देते हैं — मानो वे एक कतार में खड़े हों। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सौरमंडल की संरचना का स्वाभाविक परिणाम है।
जून की अन्य प्रमुख खगोलीय घटनाएँ
17 जून को एक दुर्लभ घटना देखने को मिल सकती है, जब चंद्रमा, शुक्र के सामने से गुज़रेगा। इसे 'लूनर ऑकल्टेशन' कहते हैं — कुछ स्थानों से ऐसा प्रतीत होगा जैसे शुक्र कुछ क्षणों के लिए चंद्रमा के पीछे छिप गया हो।
इसके बाद 21 जून को 'समर सोल्स्टिस' यानी खगोलीय ग्रीष्म ऋतु का आरंभ होगा। उत्तरी गोलार्ध में यह वर्ष का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। इसी तिथि से खगोलीय रूप से गर्मियों का मौसम आधिकारिक रूप से शुरू माना जाता है।
जून में 'समर ट्रायंगल' भी स्पष्ट रूप से दिखने लगता है, जो वेगा, अल्टेयर और डेनेब जैसे चमकीले तारों से निर्मित होता है। टेलीस्कोप से इसके आसपास कई 'डीप-स्काई ऑब्जेक्ट्स' भी देखे जा सकते हैं।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण
ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को ज्ञान, सौभाग्य और उन्नति का प्रतीक माना जाता है, जबकि शुक्र को प्रेम, भौतिक सुख और ऐश्वर्य से जोड़ा जाता है। बुध को बुद्धिमत्ता, संवाद कौशल, शिक्षा और व्यापार का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन तीनों शुभ ग्रहों का एक साथ आकाश में दिखना सभी 12 राशियों पर किसी न किसी रूप में प्रभाव डाल सकता है। हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति की जन्म कुंडली और ग्रह स्थिति के अनुसार भिन्न हो सकता है।
खगोल प्रेमियों के लिए सुझाव
वैज्ञानिकों का कहना है कि पूरे जून माह में ग्रहों, चंद्रमा और तारों का यह संयोजन खगोल प्रेमियों और फोटोग्राफर्स के लिए एक सुनहरा अवसर है। बुध को देखने के लिए सूर्यास्त के ठीक बाद साफ पश्चिमी क्षितिज और सटीक दिशा का ध्यान रखना आवश्यक होगा, क्योंकि यह ग्रह सूर्य के निकट होने के कारण क्षितिज के बेहद नीचे रहता है। आने वाले हफ्तों में लूनर ऑकल्टेशन और समर सोल्स्टिस जैसी घटनाएँ इस महीने को और भी यादगार बनाएंगी।