10 अगस्त 2026
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आकाश आनंद ने अखिलेश और राहुल को कहा 'अंकल', हाथरस जनसभा में BSP का चुनावी शंखनाद

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आकाश आनंद ने अखिलेश और राहुल को कहा 'अंकल', हाथरस जनसभा में BSP का चुनावी शंखनाद

सारांश

BSP संयोजक आकाश आनंद ने हाथरस के सादाबाद में जनसभा कर अखिलेश यादव और राहुल गांधी को 'अंकल' कहा — उम्र के अंतर का हवाला देकर। साथ ही महंगाई, PDA नारे की विश्वसनीयता और एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता पर भाजपा व सपा दोनों को घेरा। लंबे अंतराल के बाद यह उनकी पहली बड़ी चुनावी वापसी है।

मुख्य बातें

आकाश आनंद ने 10 अगस्त को हाथरस के सादाबाद में BSP की जनसभा को संबोधित किया।
उन्होंने अखिलेश यादव और राहुल गांधी को 'अंकल' कहा — अपनी 30 वर्ष की आयु और अखिलेश की करीब 50 वर्ष की उम्र का हवाला देते हुए।
राहुल गांधी की 'संविधान बचाओ' मुहिम को 'खाली पन्नों' वाली किताब करार दिया।
गैस सिलिंडर की कीमत 2014 के करीब ₹400 से बढ़कर अब करीब ₹1,200 होने का दावा किया।
2024 में विवाद के बाद मायावती ने उन्हें हटाया था; बाद में फिर राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने 10 अगस्त को हाथरस के सादाबाद में आयोजित जनसभा में समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखे प्रहार करते हुए दोनों को 'अंकल' कहकर संबोधित किया। आनंद ने अपनी 30 वर्ष की आयु और अखिलेश यादव की करीब 50 वर्ष की उम्र का हवाला देते हुए इस संबोधन को स्वाभाविक बताया। यह जनसभा BSP के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।

राहुल गांधी की 'संविधान बचाओ' मुहिम पर कटाक्ष

आकाश आनंद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से चलाए जा रहे 'संविधान बचाओ' अभियान को निशाना बनाते हुए कहा कि राहुल गांधी संविधान की किताब लेकर घूमते हैं और लगातार उसकी दुहाई देते हैं, लेकिन अगर उस किताब के पन्ने पलटकर देखे जाएं तो वे खाली नजर आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासित राज्यों में भी वे कमियाँ मौजूद हैं, जिनके लिए कांग्रेस उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाती रही है। आनंद ने कहा कि संसद में संविधान का नाम लेना पर्याप्त नहीं है — उसकी मूल भावना को ज़मीन पर उतारना भी ज़रूरी है।

अखिलेश के 'PDA' नारे और सपा के कार्यकाल पर सवाल

BSP नेता ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के 'पीडीए' (PDA) नारे पर भी प्रश्नचिह्न लगाए। उनका आरोप था कि सपा राजनीतिक सुविधा के अनुसार PDA की परिभाषा बदलती रही है। उन्होंने सपा सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था और दंगों का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा। साथ ही उन्होंने कांग्रेस और भाजपा की नीतियों में समानता का आरोप लगाते हुए BSP को एक अलग और विश्वसनीय राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया।

महंगाई और बुनियादी ढाँचे पर भाजपा को घेरा

आकाश आनंद ने इथेनॉल नीति और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि इथेनॉल के नाम पर आम उपभोक्ताओं को महंगा पेट्रोल मिल रहा है और किसानों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं पहुँच रहा। रसोई गैस सिलिंडर पर उन्होंने दावा किया कि 2014 के आसपास सिलिंडर की कीमत करीब ₹400 थी, जो अब बढ़कर करीब ₹1,200 तक पहुँच गई है। उन्होंने याद दिलाया कि उस दौर में भाजपा नेता स्वयं महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरते थे।

एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता पर भी आनंद ने सवाल उठाए। उन्होंने पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर गड्ढों की शिकायत का जिक्र किया, जबकि आगरा-नोएडा एक्सप्रेस-वे — जिसे उन्होंने मायावती सरकार की उपलब्धि बताया — की गुणवत्ता को बेहतर करार दिया। उन्होंने भाजपा सरकार पर पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यों का श्रेय लेने का आरोप लगाते हुए कहा, 'काम कोई और करता है, लेकिन फीता ये लोग काटते हैं।'

आकाश आनंद की वापसी का राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि आकाश आनंद लंबे समय बाद चुनावी मंच पर सक्रिय रूप से नजर आए। 2024 में एक विवादित बयान के बाद BSP प्रमुख मायावती ने उन्हें कुछ समय के लिए पार्टी की जिम्मेदारियों से हटा दिया था। बाद में उन्हें पुनः राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह जनसभा ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो रही है और BSP खुद को तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अलग और दोनों मुख्यधारा दलों से बेहतर विकल्प दिखाना चाहती है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह वाकपटुता BSP को वह ज़मीनी समर्थन दिला सकती है जो 2022 के बाद से लगातार सिकुड़ती दिख रही है। आनंद की लंबे अंतराल के बाद वापसी पार्टी के भीतर नेतृत्व की अनिश्चितता को भी उजागर करती है। मुख्यधारा की कवरेज 'अंकल' वाले बयान पर टिकी रह सकती है, लेकिन इथेनॉल नीति और एक्सप्रेस-वे गुणवत्ता पर उठाए गए सवाल अधिक ठोस और जनता से जुड़े मुद्दे हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आकाश आनंद ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी को 'अंकल' क्यों कहा?
आकाश आनंद ने अपनी 30 वर्ष की आयु और अखिलेश यादव की करीब 50 वर्ष की उम्र के अंतर को आधार बनाते हुए उन्हें 'अंकल' कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनादर नहीं, बल्कि उम्र के फर्क को दर्शाने वाला स्वाभाविक संबोधन है।
BSP की हाथरस जनसभा में आकाश आनंद ने कौन-कौन से मुद्दे उठाए?
आनंद ने राहुल गांधी की 'संविधान बचाओ' मुहिम, अखिलेश यादव के PDA नारे, रसोई गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमतें (करीब ₹400 से ₹1,200 तक), इथेनॉल नीति और पूर्वांचल-बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता जैसे मुद्दे उठाए।
आकाश आनंद को पहले BSP की जिम्मेदारियों से क्यों हटाया गया था?
2024 में एक विवादित बयान के कारण BSP प्रमुख मायावती ने आकाश आनंद को कुछ समय के लिए पार्टी की जिम्मेदारियों से अलग किया था। बाद में उन्हें फिर से राष्ट्रीय संयोजक का पद सौंपा गया।
आकाश आनंद ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
आनंद ने भाजपा सरकार पर पूर्ववर्ती सरकारों — विशेषकर मायावती सरकार — के कार्यों का श्रेय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 'काम कोई और करता है, लेकिन फीता ये लोग काटते हैं।' साथ ही 'डबल इंजन' सरकार के दावे पर भी सवाल उठाए।
BSP के 'तीसरे विकल्प' की रणनीति क्या है?
BSP ने कांग्रेस और भाजपा की नीतियों में समानता का आरोप लगाते हुए खुद को एक स्वतंत्र और अलग राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया है। आकाश आनंद ने यह भी कहा कि दोनों बड़े दल ज़मीनी स्तर पर संविधान की मूल भावना को लागू करने में विफल रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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