15 जुलाई 2026
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अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर हमला: दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा — यह BJP की प्रतिशोध की राजनीति है

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अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर हमला: दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा — यह BJP की प्रतिशोध की राजनीति है

सारांश

सोनारपुर में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमले ने विपक्ष को एकजुट कर दिया। सीपीआई (एमएल), कांग्रेस और सपा ने BJP पर प्रतिशोध की राजनीति का आरोप लगाया। पुलिस सुरक्षा की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने इसे 'बड़ी साजिश' बताया।

मुख्य बातें

दीपांकर भट्टाचार्य (सीपीआई-एमएल लिबरेशन) ने 30 मई को अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर हमले की निंदा करते हुए इसे BJP की प्रतिशोध की राजनीति बताया।
भट्टाचार्य ने इस हमले की तुलना केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर ED के छापे से की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर हमले की निंदा करते हुए विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पुलिस सुरक्षा की अनुपस्थिति को 'बड़ी साजिश' का इशारा बताया।
अभिषेक बनर्जी चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित परिवार से मिलने जा रहे थे, उसी दौरान यह हमला हुआ।

सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने 30 मई को तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर दौरे के दौरान हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'प्रतिशोध की राजनीति' का हिस्सा बताया। भट्टाचार्य ने इस हमले की तुलना केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हालिया छापे से की, यह तर्क देते हुए कि दोनों घटनाएँ विपक्ष को दबाने की एक सुनियोजित कोशिश का हिस्सा हैं।

भट्टाचार्य का बयान: दो घटनाएँ, एक पैटर्न

भट्टाचार्य ने अपने बयान में कहा, 'कुछ दिन पहले ED ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर छापा मारा, और आज पश्चिम बंगाल में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर उस समय हमला किया गया जब वे चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित एक परिवार से मिलने जा रहे थे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ये घटनाएँ अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि विपक्ष के विरुद्ध BJP की प्रतिशोध की राजनीति की कड़ियाँ हैं।

उन्होंने आगे कहा, 'चाहे केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग हो या राजनीतिक हिंसा का माहौल बनाना, BJP विपक्ष की आवाज़ों को दबाने के लिए हर संभव प्रयास करने पर तुली हुई प्रतीत होती है।' भट्टाचार्य ने सभी लोकतांत्रिक ताकतों से इन 'दुर्भावनापूर्ण हमलों' का विरोध करने का आह्वान भी किया।

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की प्रतिक्रिया

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर पोस्ट करते हुए हमले को 'चौंकाने वाला' बताया और कड़ी निंदा की। उन्होंने लिखा कि अभिषेक बनर्जी चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने गए थे और 'एक प्रमुख विपक्षी नेता को जानबूझकर पर्याप्त पुलिस सुरक्षा न देना BJP की बदले की राजनीति और उत्पीड़न की मानसिकता को साफ तौर पर उजागर करता है।'

खड़गे ने पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार दोनों से सभी विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसे हमलों को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की माँग की। उन्होंने कहा, 'राजनीतिक मतभेद किसी भी प्रकार की हिंसा को कभी भी सही नहीं ठहरा सकते।'

अखिलेश यादव का आरोप: बड़ी साजिश का इशारा

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एक्स पर इस हमले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि 'बंगाल में अभिषेक बनर्जी के ऊपर जानलेवा हमला करवाकर बंगाल की अराजक BJP सरकार ने साबित कर दिया है कि BJP नफरत भरी नकारात्मक हिंसक राजनीति के सिवा और कुछ नहीं कर सकती।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'इतने संवेदनशील वातावरण में भी पुलिस की व्यवस्था न होना एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करती है।'

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल में हाल के चुनावों के बाद राजनीतिक तनाव चरम पर बताया जा रहा है। गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने पहले भी केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को लेकर BJP पर निशाना साधा है। अब कई विपक्षी दल — वामपंथी, कांग्रेस और सपा — एक साथ इस हमले की निंदा में आए हैं, जो इसे एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप देता है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पश्चिम बंगाल पुलिस और केंद्र सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और क्या हमले की स्वतंत्र जाँच की माँग को स्वीकार किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कांग्रेस और सपा — दर्शाता है कि अभिषेक बनर्जी पर हमला महज एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक आख्यान का हिस्सा बन चुका है। हालाँकि BJP का पक्ष इस रिपोर्ट में सामने नहीं आया, जो एकतरफा तस्वीर पेश करता है — पाठकों को यह ध्यान रखना चाहिए। असली सवाल यह है कि एक सांसद के दौरे पर पर्याप्त पुलिस बंदोबस्त क्यों नहीं था — यह जवाबदेही राज्य सरकार की भी उतनी ही है जितनी केंद्र की। जब तक स्वतंत्र जाँच नहीं होती, 'साजिश' और 'चूक' के बीच का फ़र्क महज राजनीतिक दावा ही रहेगा।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हमला कब और क्यों हुआ?
30 मई को TMC सांसद अभिषेक बनर्जी सोनारपुर में चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित एक परिवार से मिलने जा रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ। विपक्षी दलों के अनुसार उन्हें पर्याप्त पुलिस सुरक्षा नहीं दी गई थी।
दीपांकर भट्टाचार्य ने इस हमले को पिनाराई विजयन के ED छापे से क्यों जोड़ा?
सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य का तर्क है कि केरल में ED का छापा और पश्चिम बंगाल में यह हमला दोनों BJP की उस रणनीति के हिस्से हैं जिसमें केंद्रीय एजेंसियों और राजनीतिक हिंसा के ज़रिए विपक्ष को दबाया जाता है। उनके अनुसार ये घटनाएँ अलग-थलग नहीं, बल्कि एक पैटर्न का हिस्सा हैं।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस हमले पर क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर हमले को 'चौंकाने वाला' बताते हुए पश्चिम बंगाल व केंद्र सरकार से विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पुलिस की अनुपस्थिति को 'बड़ी साजिश' का संकेत बताया।
इस हमले का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
यह घटना चुनाव के बाद पहले से तनावपूर्ण पश्चिम बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकती है। विपक्षी एकजुटता और पुलिस सुरक्षा पर उठे सवाल राज्य सरकार के लिए भी जवाबदेही का मुद्दा बन सकते हैं।
क्या BJP ने इस हमले पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस रिपोर्ट में BJP का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। विपक्षी दलों के आरोपों पर BJP की प्रतिक्रिया अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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