आदिलाबाद रिम्स अस्पताल में आग: SNCU में 2 नवजात की मौत, 28 बच्चे सुरक्षित बचाए गए
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के रिम्स अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में सोमवार रात करीब 11:50 बजे भीषण आग लग गई, जिसमें 2 नवजात शिशुओं की मौत हो गई और वार्ड में भर्ती 28 अन्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यह हादसा 22 सितंबर 2026 की देर रात हुआ, और इसने अस्पताल के संवेदनशील वार्डों में अग्नि सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
आग लगने की सूचना मिलते ही आपातकालीन कर्मियों ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। दमकल विभाग की गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। अग्निशमन अधिकारियों के अनुसार, यदि समय पर बचाव अभियान नहीं चलाया जाता, तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था। फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है।
स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर घटना की जाँच शुरू कर दी है। अस्पताल में स्थिति नियंत्रण में है और अन्य वार्डों में भर्ती मरीजों को सुरक्षित बताया जा रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इस दुखद घटना का संज्ञान लेते हुए औपचारिक जाँच के आदेश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को आग लगने के कारणों की तत्काल रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने मृतक नवजातों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और प्रभावित बच्चों को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है।
साथ ही अस्पताल के फायर सेफ्टी सिस्टम की जाँच के भी आदेश दिए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी न दोहराई जाए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री के. टी. रामा राव (KTR) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, 'रिम्स आदिलाबाद के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में आग लगने की घटना के बारे में जानकर गहरा सदमा और दुख हुआ। इस हादसे में एक नवजात शिशु की मौत हो गई है और 20 से ज़्यादा बच्चे प्रभावित हुए हैं। सभी बच्चों की सलामती के लिए मेरी प्रार्थनाएँ हैं।' गौरतलब है कि KTR का यह बयान घटना की प्रारंभिक रिपोर्टों पर आधारित था, जिसमें मृतकों की संख्या बाद में 2 हो गई।
अस्पताल सुरक्षा पर सवाल
यह घटना अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न उठाती है। SNCU जैसे अत्यंत संवेदनशील वार्ड में, जहाँ नवजात शिशु जीवनरक्षक उपकरणों पर निर्भर होते हैं, अग्नि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होना अनिवार्य है। आलोचकों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में अग्निशमन व्यवस्था की नियमित ऑडिट की कमी ऐसे हादसों की वजह बनती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में सरकारी अस्पतालों की अवसंरचना और सुरक्षा मानकों पर पहले से ही बहस चल रही है।
आगे क्या होगा
जाँच एजेंसियाँ आग लगने के कारणों की पड़ताल कर रही हैं। अस्पताल के फायर सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट शीघ्र अपेक्षित है। प्रभावित परिवारों को राहत और बचाए गए 28 बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी जारी है। सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों के SNCU वार्डों का भी सुरक्षा मूल्यांकन करवाएगी।