8 जुलाई 2026
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अग्नि-1 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण, चांदीपुर से दागी गई शॉर्ट रेंज मिसाइल

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अग्नि-1 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण, चांदीपुर से दागी गई शॉर्ट रेंज मिसाइल

सारांश

भारत ने मई में दूसरा बड़ा मिसाइल परीक्षण किया — 22 मई को चांदीपुर से 'अग्नि-1' शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई। 8 मई को MIRV-सक्षम एडवांस्ड अग्नि के परीक्षण के बाद यह लगातार दूसरी सफलता है, जो भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ती आत्मनिर्भरता का संकेत देती है।

मुख्य बातें

भारत ने 22 मई 2026 को चांदीपुर, ओडिशा स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से 'अग्नि-1' शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया।
परीक्षण सामरिक बल कमान की निगरानी में हुआ; सभी परिचालन और तकनीकी मानकों का सत्यापन किया गया।
इसी माह 8 मई 2026 को डॉ.
एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से MIRV -सक्षम एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का भी सफल परीक्षण हो चुका है।
MIRV तकनीक एक ही मिसाइल से कई अलग-अलग लक्ष्यों को भेदने में सक्षम बनाती है, जिससे मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ये परीक्षण भारत की विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक नीति और सामरिक आत्मनिर्भरता को मज़बूत करते हैं।

भारत ने 22 मई 2026 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल 'अग्नि-1' का सफल परीक्षण कर अपनी सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को एक और मज़बूती प्रदान की। रक्षा मंत्रालय के अनुसार परीक्षण के दौरान मिसाइल के सभी परिचालन और तकनीकी मानकों का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया।

परीक्षण का विवरण

यह परीक्षण सामरिक बल कमान (Strategic Forces Command) की निगरानी में संपन्न हुआ। मिसाइल ने निर्धारित उड़ान मानकों और लक्ष्य मापदंडों को पूरी तरह हासिल किया। रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि 'अग्नि-1' भारत की स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल शृंखला का अभिन्न हिस्सा है और यह कम दूरी तक अत्यंत सटीकता से मार करने में सक्षम है।

मई में दूसरा बड़ा परीक्षण

गौरतलब है कि इसी महीने 8 मई 2026 को भारत ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा से एक अत्याधुनिक एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया था। उस परीक्षण की सबसे उल्लेखनीय विशेषता मिसाइल में MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) प्रणाली का उपयोग था, जिसके ज़रिए एक ही मिसाइल एक साथ कई अलग-अलग लक्ष्यों को भेद सकती है।

रक्षा सूत्रों के अनुसार उस परीक्षण में मिसाइल को कई पेलोड के साथ प्रक्षेपित किया गया था, जिन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग भौगोलिक स्थानों पर मौजूद लक्ष्यों को सफलतापूर्वक साधा।

MIRV तकनीक का सामरिक महत्व

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार MIRV तकनीक को आधुनिक सामरिक युद्ध क्षमता में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे मिसाइल की मारक क्षमता और प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाती है। यह तकनीक दुश्मन की मिसाइल-रोधी प्रणालियों को चकमा देने में भी सहायक होती है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस माह के भीतर दो सफल परीक्षण भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास क्षमता और सामरिक तकनीक में बढ़ती आत्मनिर्भरता को रेखांकित करते हैं। यह परीक्षण भारत की विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। आने वाले समय में इसी शृंखला के अन्य संस्करणों के परीक्षण भी अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

रणनीतिक संदेश है। भारत-पाकिस्तान तनाव की पृष्ठभूमि में ये परीक्षण भारत की 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक' नीति को सक्रिय रूप से प्रदर्शित करने की कोशिश लगते हैं। हालाँकि रक्षा मंत्रालय इन्हें नियमित परीक्षण बताता है, लेकिन समय और आवृत्ति स्पष्ट रूप से कूटनीतिक संकेत देती है। असली सवाल यह है कि क्या ये परीक्षण DRDO की दीर्घकालिक तकनीकी रोडमैप का हिस्सा हैं, या तात्कालिक भू-राजनीतिक दबाव में त्वरित किए गए — इसका जवाब रक्षा मंत्रालय की पारदर्शिता पर निर्भर करेगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'अग्नि-1' बैलिस्टिक मिसाइल क्या है?
'अग्नि-1' भारत की स्वदेशी शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल शृंखला का हिस्सा है, जो कम दूरी तक सटीक मार करने में सक्षम है। यह मिसाइल भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता की रीढ़ मानी जाती है और सामरिक बल कमान के नियंत्रण में संचालित होती है।
22 मई 2026 का परीक्षण कहाँ और किसकी निगरानी में हुआ?
यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से किया गया और सामरिक बल कमान की निगरानी में संपन्न हुआ। रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइल के सभी परिचालन और तकनीकी मानकों का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया।
8 मई 2026 के MIRV परीक्षण और इस परीक्षण में क्या अंतर है?
8 मई को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का परीक्षण MIRV तकनीक के साथ हुआ था, जिसमें एक ही मिसाइल से हिंद महासागर क्षेत्र में कई अलग-अलग लक्ष्यों को साधा गया। 22 मई का परीक्षण 'अग्नि-1' शॉर्ट रेंज मिसाइल का था, जो एकल लक्ष्य पर सटीक मार के लिए डिज़ाइन है।
MIRV तकनीक क्यों महत्वपूर्ण है?
MIRV यानी Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle तकनीक एक ही मिसाइल को एक साथ कई अलग-अलग लक्ष्यों पर वार करने में सक्षम बनाती है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक मिसाइल की मारक क्षमता कई गुना बढ़ा देती है और दुश्मन की मिसाइल-रोधी प्रणालियों को चकमा देने में भी सहायक होती है।
इन परीक्षणों का भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर क्या असर है?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सफल परीक्षण भारत की 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक' नीति को मज़बूत करते हैं और रक्षा अनुसंधान में बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं। ये परीक्षण भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे को और सुदृढ़ करने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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