अग्निवीर योजना: नौसेना वेटरन्स एसोसिएशन अध्यक्ष ने माँगी सेवानिवृत्ति बाद नौकरी-आरक्षण पर स्पष्टता
सारांश
मुख्य बातें
मैसूर के नौसेना वेटरन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गजानन भट ने 5 नवंबर 2026 को अग्निवीर योजना में दो वर्ष के विस्तार को युवाओं के लिए राष्ट्र-सेवा का सार्थक अवसर बताया। साथ ही उन्होंने माँग की कि सेवानिवृत्ति के बाद अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस में भर्ती, आरक्षण और वरिष्ठता को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार स्थिति स्पष्ट करे। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी ने भी अग्निवीरों के भविष्य पर चल रही बहस के बीच इस फैसले को सकारात्मक बताया।
गजानन भट का आकलन: अवसर भी, चिंताएँ भी
गजानन भट ने कहा, 'यह युवाओं के लिए वास्तव में अच्छा है। पहले चार साल की योजना थी, लेकिन अब इसमें दो साल का विस्तार किया गया है। जो लोग रक्षा बलों में रहना चाहते हैं, उनके लिए राष्ट्र-सेवा का यह बहुत अच्छा अवसर है।' उन्होंने रूस समेत कई देशों में युवाओं के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा का हवाला देते हुए कहा कि समाज पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
हालाँकि भट ने यह भी रेखांकित किया कि अभ्यास और प्रयोग में कुछ नकारात्मक पहलू भी हो सकते हैं। उन्होंने इसकी तुलना नोटबंदी जैसी नीतिगत पहलों से करते हुए कहा कि सरकार सुधार के रास्ते आज़मा रही है, जिसमें अच्छे और कम अच्छे दोनों परिणाम संभव हैं।
सेवानिवृत्ति बाद भर्ती और आरक्षण पर सवाल
भट के अनुसार, योजना की सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती यह है कि सेवानिवृत्ति के बाद अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस और अन्य अनुशासित सेवाओं में इन दो वर्षों के दौरान भर्ती प्रक्रिया रुक जाती है। उनका कहना था, 'जब नौकरी ही नहीं मिलेगी, तो आरक्षण का क्या लाभ होगा।' महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस विभाग में अग्निवीरों के लिए कुछ स्थान अलग रखे हैं, जिसे उन्होंने एक सकारात्मक कदम बताया।
वरिष्ठता का प्रश्न भी उन्होंने उठाया। उनके अनुसार सुनने में आया है कि चयनित विभागों में अग्निवीरों को सबसे कनिष्ठ माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर योजना की अवधि और बढ़ाई जाए — चाहे छह साल हो — और सेवानिवृत्ति बाद की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाए, तो युवाओं का भरोसा बढ़ेगा।
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी का पक्ष
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी ने कहा, 'यह बहुत अच्छा फैसला है।' उन्होंने याद दिलाया कि 2022 में अग्निपथ योजना की शुरुआत सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए संसाधन जुटाने के उद्देश्य से हुई थी। मूल ढाँचे के तहत चार साल की सेवा के बाद 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सेना, नौसेना और वायु सेना में स्थायी किया जाना था, जबकि शेष 75 प्रतिशत को ₹11.71 लाख का सेवानिवृत्ति पैकेज देकर बलों से विदा किया जाना था।
बख्शी ने माना कि सेवा पूरी करने के बाद ये युवा लगभग 23-24 वर्ष के होंगे और उनके पास सैन्य प्रशिक्षण का मूल्यवान अनुभव होगा, फिर भी भविष्य को लेकर चिंता बनी रही है।
व्यापक संदर्भ: अग्निपथ पर जारी बहस
गौरतलब है कि अग्निपथ योजना की घोषणा के समय से ही इस पर तीव्र सार्वजनिक बहस जारी है। कई राज्यों में युवाओं ने इसके विरोध में प्रदर्शन किए थे। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और निजी उद्यमों से अग्निवीरों को समायोजित करने का अनुरोध किया था। यह ऐसे समय में आया है जब सशस्त्र बलों में भर्ती प्रक्रिया और सैन्य आधुनिकीकरण दोनों राष्ट्रीय प्राथमिकताएँ हैं।
दो वर्ष के विस्तार का लक्ष्य सेवा अवधि को अधिक सार्थक बनाना है, परंतु विशेषज्ञों और वेटरन्स की राय में जब तक सेवानिवृत्ति बाद के रोज़गार मार्गों को स्पष्ट और बाध्यकारी नहीं बनाया जाता, तब तक योजना की स्वीकार्यता सीमित रहेगी। आगामी महीनों में केंद्र सरकार के स्पष्टीकरण और राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया इस बहस की दिशा तय करेंगी।