5 नवंबर 2026
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अग्निवीर योजना: नौसेना वेटरन्स एसोसिएशन अध्यक्ष ने माँगी सेवानिवृत्ति बाद नौकरी-आरक्षण पर स्पष्टता

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अग्निवीर योजना: नौसेना वेटरन्स एसोसिएशन अध्यक्ष ने माँगी सेवानिवृत्ति बाद नौकरी-आरक्षण पर स्पष्टता

सारांश

अग्निवीर योजना के दो साल के विस्तार को मैसूर के नौसेना वेटरन्स एसोसिएशन ने राष्ट्र-सेवा का अवसर माना, लेकिन सेवानिवृत्ति बाद आरक्षण, वरिष्ठता और भर्ती पर सरकार से जवाब माँगा। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी ने फैसले का स्वागत किया।

मुख्य बातें

गजानन भट , मैसूर नौसेना वेटरन्स एसोसिएशन अध्यक्ष, ने अग्निवीर योजना के दो साल के विस्तार को युवाओं के लिए सकारात्मक बताया।
भट ने चेताया कि सेवानिवृत्ति के दौरान अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस में भर्ती रुकने से आरक्षण का व्यावहारिक लाभ सीमित हो सकता है।
चयनित विभागों में अग्निवीरों को सबसे कनिष्ठ माने जाने की खबरों पर भट ने वरिष्ठता नीति स्पष्ट करने की माँग की।
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी ने फैसले का समर्थन किया; बताया कि 2022 में अग्निपथ का उद्देश्य सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए संसाधन जुटाना था।
मूल योजना में 25% अग्निवीरों को स्थायी किया जाना और शेष 75% को ₹11.71 लाख का पैकेज देकर बलों से मुक्त करना था।
महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस विभाग में अग्निवीरों के लिए स्थान आरक्षित किए हैं, जिसे भट ने सही दिशा में कदम बताया।

मैसूर के नौसेना वेटरन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गजानन भट ने 5 नवंबर 2026 को अग्निवीर योजना में दो वर्ष के विस्तार को युवाओं के लिए राष्ट्र-सेवा का सार्थक अवसर बताया। साथ ही उन्होंने माँग की कि सेवानिवृत्ति के बाद अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस में भर्ती, आरक्षण और वरिष्ठता को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार स्थिति स्पष्ट करे। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी ने भी अग्निवीरों के भविष्य पर चल रही बहस के बीच इस फैसले को सकारात्मक बताया।

गजानन भट का आकलन: अवसर भी, चिंताएँ भी

गजानन भट ने कहा, 'यह युवाओं के लिए वास्तव में अच्छा है। पहले चार साल की योजना थी, लेकिन अब इसमें दो साल का विस्तार किया गया है। जो लोग रक्षा बलों में रहना चाहते हैं, उनके लिए राष्ट्र-सेवा का यह बहुत अच्छा अवसर है।' उन्होंने रूस समेत कई देशों में युवाओं के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा का हवाला देते हुए कहा कि समाज पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

हालाँकि भट ने यह भी रेखांकित किया कि अभ्यास और प्रयोग में कुछ नकारात्मक पहलू भी हो सकते हैं। उन्होंने इसकी तुलना नोटबंदी जैसी नीतिगत पहलों से करते हुए कहा कि सरकार सुधार के रास्ते आज़मा रही है, जिसमें अच्छे और कम अच्छे दोनों परिणाम संभव हैं।

सेवानिवृत्ति बाद भर्ती और आरक्षण पर सवाल

भट के अनुसार, योजना की सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती यह है कि सेवानिवृत्ति के बाद अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस और अन्य अनुशासित सेवाओं में इन दो वर्षों के दौरान भर्ती प्रक्रिया रुक जाती है। उनका कहना था, 'जब नौकरी ही नहीं मिलेगी, तो आरक्षण का क्या लाभ होगा।' महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस विभाग में अग्निवीरों के लिए कुछ स्थान अलग रखे हैं, जिसे उन्होंने एक सकारात्मक कदम बताया।

वरिष्ठता का प्रश्न भी उन्होंने उठाया। उनके अनुसार सुनने में आया है कि चयनित विभागों में अग्निवीरों को सबसे कनिष्ठ माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर योजना की अवधि और बढ़ाई जाए — चाहे छह साल हो — और सेवानिवृत्ति बाद की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाए, तो युवाओं का भरोसा बढ़ेगा।

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी का पक्ष

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी ने कहा, 'यह बहुत अच्छा फैसला है।' उन्होंने याद दिलाया कि 2022 में अग्निपथ योजना की शुरुआत सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए संसाधन जुटाने के उद्देश्य से हुई थी। मूल ढाँचे के तहत चार साल की सेवा के बाद 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सेना, नौसेना और वायु सेना में स्थायी किया जाना था, जबकि शेष 75 प्रतिशत को ₹11.71 लाख का सेवानिवृत्ति पैकेज देकर बलों से विदा किया जाना था।

बख्शी ने माना कि सेवा पूरी करने के बाद ये युवा लगभग 23-24 वर्ष के होंगे और उनके पास सैन्य प्रशिक्षण का मूल्यवान अनुभव होगा, फिर भी भविष्य को लेकर चिंता बनी रही है।

व्यापक संदर्भ: अग्निपथ पर जारी बहस

गौरतलब है कि अग्निपथ योजना की घोषणा के समय से ही इस पर तीव्र सार्वजनिक बहस जारी है। कई राज्यों में युवाओं ने इसके विरोध में प्रदर्शन किए थे। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और निजी उद्यमों से अग्निवीरों को समायोजित करने का अनुरोध किया था। यह ऐसे समय में आया है जब सशस्त्र बलों में भर्ती प्रक्रिया और सैन्य आधुनिकीकरण दोनों राष्ट्रीय प्राथमिकताएँ हैं।

दो वर्ष के विस्तार का लक्ष्य सेवा अवधि को अधिक सार्थक बनाना है, परंतु विशेषज्ञों और वेटरन्स की राय में जब तक सेवानिवृत्ति बाद के रोज़गार मार्गों को स्पष्ट और बाध्यकारी नहीं बनाया जाता, तब तक योजना की स्वीकार्यता सीमित रहेगी। आगामी महीनों में केंद्र सरकार के स्पष्टीकरण और राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया इस बहस की दिशा तय करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

असुविधाजनक सवाल भी। असली मुद्दा यह है कि सरकार ने राज्यों और निजी क्षेत्र से समायोजन का 'अनुरोध' किया, बाध्यकारी ढाँचा नहीं बनाया। जब तक सेवानिवृत्ति बाद के रोज़गार मार्ग स्पष्ट और विधिसम्मत नहीं होते, तब तक आरक्षण और वरिष्ठता पर वादे खोखले लग सकते हैं। महाराष्ट्र का पुलिस-समायोजन मॉडल सही दिशा है, पर यह राष्ट्रीय नीति बने, अपवाद नहीं — यही इस बहस की असली माँग है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अग्निवीर योजना में दो साल का विस्तार क्या है?
मूल अग्निपथ योजना में अग्निवीरों की सेवा अवधि चार साल थी। नए विस्तार के तहत इसमें दो अतिरिक्त वर्ष जोड़े गए हैं, जिससे कुल सेवा अवधि बढ़ सकती है। इसका उद्देश्य युवाओं को रक्षा बलों में अधिक समय तक राष्ट्र-सेवा का अवसर देना बताया गया है।
अग्निवीरों के आरक्षण पर क्या समस्या है?
नौसेना वेटरन्स एसोसिएशन अध्यक्ष गजानन भट के अनुसार, सेवा के इन दो वर्षों के दौरान अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस और अन्य अनुशासित सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया रुक जाती है। इससे आरक्षण का व्यावहारिक लाभ नहीं मिल पाता, क्योंकि नौकरियाँ उपलब्ध ही नहीं होतीं।
अग्निवीरों को सेवानिवृत्ति पर क्या मिलता है?
केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को ₹11.71 लाख का सेवानिवृत्ति पैकेज देने की व्यवस्था की है। इसके अलावा 25% अग्निवीरों को सेना, नौसेना या वायु सेना में स्थायी रखा जाना है, जबकि 75% को बलों से मुक्त किया जाता है।
अग्निवीरों की वरिष्ठता को लेकर क्या विवाद है?
गजानन भट ने बताया कि सुनने में आया है कि जब अग्निवीर किसी चयनित विभाग में शामिल होते हैं, तो उन्हें सबसे कनिष्ठ दर्जा दिया जाता है, चाहे उनके पास सैन्य सेवा का अनुभव हो। उन्होंने माँग की कि वरिष्ठता नीति को स्पष्ट और पारदर्शी बनाया जाए।
राज्य सरकारें अग्निवीरों के लिए क्या कर रही हैं?
महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस विभाग में अग्निवीरों के लिए कुछ स्थान आरक्षित किए हैं, जिसे वेटरन्स ने सकारात्मक कदम बताया है। केंद्र ने राज्य सरकारों और निजी उद्यमों से अग्निवीरों को समायोजित करने का अनुरोध किया था, परंतु यह बाध्यकारी नीति नहीं है।
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