अहमदाबाद विमान हादसा: एयर इंडिया पर आरोप — मुआवजे के बदले कानूनी दावों का अधिकार छुड़वाया
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद विमान हादसे को एक वर्ष पूरे होने के बाद अब एयर इंडिया पर एक गंभीर आरोप सामने आया है — कथित तौर पर एयरलाइन ने पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा देने के एवज में ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए, जिनसे वे भविष्य में किसी भी कानूनी दावे का अधिकार खो देते हैं। 12 जून को यह मामला तब उजागर हुआ जब पीड़ितों के वकील ने मीडिया के सामने इन दस्तावेजों का ब्यौरा रखा।
क्या है 'रसीद, डिस्चार्ज और इंडेम्निटी' दस्तावेज
पीड़ितों और उनके परिवारों का कानूनी प्रतिनिधित्व कर रहे वकील आयुष दुबे ने बताया कि एयर इंडिया ने हाल ही में घायलों और मृतकों के परिजनों को एक दस्तावेज भेजा है, जिसे 'रसीद, डिस्चार्ज और इंडेम्निटी' कहा जाता है। उनके अनुसार, इस दस्तावेज में स्पष्ट लिखा है कि एक बार मुआवजा स्वीकार कर हस्ताक्षर करने के बाद परिवार भविष्य में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकते।
दुबे ने कहा, 'इस दस्तावेज में सभी संभावित पक्षों के नाम शामिल हैं — यानी यदि भविष्य में कोई जाँच रिपोर्ट बोइंग या एयर इंडिया के विरुद्ध आती है, तो हस्ताक्षरकर्ता परिवार अपने सभी कानूनी अधिकार गँवा चुके होंगे।'
कितने परिवारों ने हस्ताक्षर किए
वकील दुबे के अनुसार, घायलों में से लगभग 50 प्रतिशत लोग इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर चुके हैं और अब उनका कानूनी अधिकार समाप्त हो गया है। मुआवजे की राशि अलग-अलग परिवारों को भिन्न-भिन्न दी गई है — कुछ को कुछ लाख रुपये मिले हैं, जबकि कुछ मामलों में ₹4 करोड़ और ₹15 करोड़ तक के प्रस्ताव भी सामने आए हैं।
गौरतलब है कि मुआवजे की इस असमानता ने भी परिजनों में असंतोष पैदा किया है, क्योंकि एक ही हादसे के पीड़ितों को मिलने वाली राशि में भारी अंतर है।
ब्लैक बॉक्स डेटा की माँग
दुबे ने यह भी बताया कि सभी पीड़ित परिवार एकजुट होकर माँग कर रहे हैं कि उन्हें ब्लैक बॉक्स का डेटा उपलब्ध कराया जाए। उनका तर्क है कि जब तक दुर्घटना के वास्तविक कारण सार्वजनिक नहीं होते, तब तक किसी भी मुआवजा समझौते पर हस्ताक्षर करना परिवारों के हित में नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय विमानन जाँच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। आलोचकों का कहना है कि जाँच पूरी होने से पहले इस तरह के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाना नैतिक और कानूनी दृष्टि से संदिग्ध है।
एयर इंडिया की स्थिति
इस मामले में एयर इंडिया की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विमानन नियामक DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने भी इस विशेष आरोप पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
आगे क्या होगा
वकील दुबे ने संकेत दिया है कि जिन परिवारों ने अभी तक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, उन्हें ऐसा करने से रोका जा रहा है और कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। यह मामला अब न्यायालय तक पहुँचने की संभावना है, जहाँ इन दस्तावेजों की वैधता को चुनौती दी जा सकती है।