28 अक्टूबर 2026
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मस्जिदों की सुरक्षा के लिए उठाएगा ठोस कदम, जामिया छात्र संघ चुनाव का भी किया समर्थन

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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मस्जिदों की सुरक्षा के लिए उठाएगा ठोस कदम, जामिया छात्र संघ चुनाव का भी किया समर्थन

सारांश

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मस्जिदों की सुरक्षा के लिए सर्वसमावेशी पहल का ऐलान किया है — जिसमें अन्य समुदाय भी शामिल होंगे। साथ ही बोर्ड ने जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव में हो रही देरी पर प्रशासन की आलोचना की और स्पष्ट तारीख की माँग का समर्थन किया।

मुख्य बातें

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने 28 अक्टूबर 2026 को मस्जिदों की सुरक्षा के लिए ठोस पहल करने की घोषणा की।
बोर्ड की 51 सदस्यीय निगरानी समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया; पहल में मुस्लिम और अन्य समुदाय दोनों शामिल होंगे।
प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने पंजाब में मस्जिदों पर कब्जे की घटनाओं का हवाला देते हुए सुरक्षा की आवश्यकता रेखांकित की।
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की माँग का समर्थन करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये को गलत बताया गया।
इलियास ने चेतावनी दी कि संविधान तैयार होने की अनिश्चित समय-सीमा के चलते पूरे शैक्षणिक वर्ष तक चुनाव नहीं हो पाएगा।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने 28 अक्टूबर 2026 को देशभर में मस्जिदों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक पहल करने की घोषणा की। बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने स्पष्ट किया कि इस अभियान में केवल मुस्लिम समुदाय नहीं, बल्कि अन्य धार्मिक समुदायों के लोग भी शामिल किए जाएंगे। साथ ही उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव की माँग का समर्थन करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये को गलत ठहराया।

बोर्ड की निगरानी समिति में हुई चर्चा

बोर्ड की 51 सदस्यीय निगरानी समिति की बैठक में मस्जिदों की सुरक्षा के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि इस दिशा में ठोस पहल की जाएगी। इलियास ने बताया कि देश के कई हिस्सों में मस्जिदों पर कब्जे की घटनाएँ हुई हैं — उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाब में कई मस्जिदों पर कब्जा किया गया था, जिन्हें बाद में मुक्त करा लिया गया।

उन्होंने कहा, 'दुनिया में इस तरह की घटनाएँ होती रहती हैं — कभी मस्जिदों को गिरा दिया जाता है, लेकिन मुसलमानों में उन्हें दोबारा बनाने और फिर से आबाद करने का जज्बा बना रहता है। इस तरह की घटनाओं को रोका जाना चाहिए।'

सर्वसमावेशी पहल की योजना

इलियास ने जोर देकर कहा कि मस्जिदों की सुरक्षा के लिए शुरू की जाने वाली पहल केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं रहेगी। उनके अनुसार, हर समुदाय का अपने पूजा-स्थलों के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव होता है, इसलिए धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुँचाने की घटनाएँ एक संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दा हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में विभिन्न धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद और कानूनी लड़ाइयाँ सुर्खियों में बनी हुई हैं।

जामिया में छात्र संघ चुनाव पर विश्वविद्यालय प्रशासन की आलोचना

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए इलियास ने विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि छात्र संघ छात्रों की बुनियादी आवश्यकता है और उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाने में इसकी केंद्रीय भूमिका होती है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में छात्र संघ चुनाव संपन्न हो सकते हैं, तो जामिया में इसकी अनुमति क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर पाबंदियाँ लगाना और उसे रोकने की कोशिश करना न्यायसंगत नहीं है।

संविधान की अनिश्चितता पर सवाल

इलियास ने प्रशासन के उस कथित रुख पर भी आपत्ति जताई, जिसके अनुसार छात्र संघ का संविधान तैयार होने के 15 दिन बाद चुनाव कराए जाएंगे। उन्होंने तर्क दिया कि जब संविधान निर्माण की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं है, तो चुनाव की तारीख भी अनिश्चित बनी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो शैक्षणिक वर्ष समाप्त होने तक भी मतदान संभव नहीं हो पाएगा।

गौरतलब है कि जामिया के छात्र लंबे समय से छात्र संघ चुनाव की माँग करते रहे हैं। छात्रों की माँग है कि प्रशासन चुनाव के लिए एक स्पष्ट और निश्चित तारीख घोषित करे। बोर्ड के समर्थन से यह मुद्दा अब और व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता का व्यापक प्रश्न है। जामिया के मुद्दे पर बोर्ड का हस्तक्षेप यह भी दर्शाता है कि वह शैक्षणिक संस्थाओं में छात्र अधिकारों को लेकर अपनी भूमिका का विस्तार कर रहा है — लेकिन यह देखना होगा कि घोषणाएँ ठोस कार्रवाई में तब्दील होती हैं या नहीं।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मस्जिदों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाएगा?
बोर्ड की 51 सदस्यीय निगरानी समिति ने मस्जिदों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक पहल करने का निर्णय लिया है, जिसमें मुस्लिम समुदाय के अलावा अन्य धार्मिक समुदायों को भी शामिल किया जाएगा। पहल का विस्तृत खाका अभी तैयार किया जाना है।
AIMPLB ने मस्जिद सुरक्षा का मुद्दा क्यों उठाया?
बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने बताया कि देश के कई हिस्सों में मस्जिदों पर कब्जे की घटनाएँ हुई हैं। पंजाब में कई मस्जिदों पर कब्जे का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएँ एक संवेदनशील मुद्दा हैं और इन्हें रोका जाना चाहिए।
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव क्यों नहीं हो रहे?
विश्वविद्यालय प्रशासन का कथित रुख है कि छात्र संघ का संविधान तैयार होने के 15 दिन बाद चुनाव कराए जाएंगे। लेकिन संविधान निर्माण की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं है, जिससे चुनाव की तारीख अनिश्चित बनी हुई है।
क्या अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव होते हैं?
हाँ, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में छात्र संघ चुनाव होते हैं। AIMPLB के प्रवक्ता ने इसी तथ्य का हवाला देते हुए जामिया में चुनाव न होने पर सवाल उठाया है।
AIMPLB की 51 सदस्यीय निगरानी समिति क्या है?
यह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की एक आंतरिक समिति है जो बोर्ड के निर्णयों और पहलों की निगरानी करती है। इसी समिति की बैठक में मस्जिदों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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