अकाल तख्त विवाद: कांग्रेस सांसद औजला ने भगवंत मान से माँगा इस्तीफा, अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक जाँच की उठाई माँग
सारांश
मुख्य बातें
अमृतसर से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के सांसद गुरजीत सिंह औजला ने 25 जून 2025 को अकाल तख्त विवाद पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोला और माँग की कि पूरे मामले की जाँच किसी अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक एजेंसी या उच्च न्यायालय के वर्तमान अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। औजला ने यह भी माँग की कि मुख्यमंत्री मान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें।
मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल
कांग्रेस सांसद औजला ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसा प्रतीत हुआ जैसे वह किसी गंभीर मुद्दे पर जवाबदेही लेने के बजाय राजनीतिक विरोधियों पर टिप्पणी करने में व्यस्त थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हार-जीत एक सामान्य प्रक्रिया है और जनता के फैसले का सम्मान सभी राजनीतिक दलों को करना चाहिए। औजला ने यह भी जोड़ा कि आम आदमी पार्टी (AAP) भी कई चुनावों में हार का सामना कर चुकी है, इसलिए चुनावी नतीजों पर दोहरे मानदंड उचित नहीं हैं।
अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक जाँच की माँग
औजला ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार को अपने रुख पर भरोसा है, तो उसे इस मामले की जाँच किसी निष्पक्ष एजेंसी से करानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि दुनिया में ऐसी कई अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक प्रयोगशालाएँ हैं जिनकी रिपोर्टों को न्यायालयों में भी मान्यता प्राप्त है। ऐसी एजेंसी से जाँच कराए जाने पर, उनके शब्दों में, 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो जाएगा और सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी।
धार्मिक संस्थाओं की गरिमा पर जोर
कांग्रेस सांसद ने कहा कि अकाल तख्त जैसे संवेदनशील धार्मिक मामलों में सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को अत्यंत संयमित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों से राज्य सरकार के प्रवक्ता और मंत्री ऐसे बयान दे रहे हैं जिनसे विवाद और गहरा हो रहा है। औजला ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं और संवैधानिक पदों का सम्मान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होना चाहिए।
इस्तीफे की माँग
औजला ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की माँग की। यह माँग ऐसे समय में आई है जब अकाल तख्त विवाद को लेकर पंजाब की राजनीति में तनाव बढ़ता जा रहा है और विपक्षी दल सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। गौरतलब है कि अकाल तख्त सिख धर्म की सर्वोच्च अस्थायी सत्ता का प्रतीक है और इससे जुड़े किसी भी विवाद की राजनीतिक एवं सामाजिक अनुगूँज अत्यंत व्यापक होती है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस की इस माँग के बाद अब देखना होगा कि पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान किसी स्वतंत्र जाँच के प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं। विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति का केंद्रबिंदु बना रह सकता है।