अकाल तख्त के फैसले पर रंधावा का केजरीवाल से सवाल: क्या भगवंत मान से माँगेंगे इस्तीफा?
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा धार्मिक कदाचार का दोषी घोषित किए जाने के बाद 15 जून को पंजाब की सियासत में नया तूफान आ गया। पंजाब कांग्रेस ने मान के इस्तीफे की माँग करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को सीधे घेरना शुरू कर दिया है।
रंधावा का केजरीवाल से सीधा सवाल
पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अरविंद केजरीवाल से सीधा सवाल दागा कि क्या वे भगवंत मान से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा माँगेंगे। रंधावा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि श्री अकाल तख्त साहिब के फैसले के बाद देश-विदेश में बसे करोड़ों सिखों में गहरी पीड़ा और रोष है।
रंधावा के अनुसार, भगवंत मान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मान ऐसा नहीं करते, तो केजरीवाल को सार्वजनिक रूप से बताना होगा कि वे अपने मुख्यमंत्री से इस्तीफा माँगेंगे या नहीं।
आस्था और सम्मान का सवाल: रंधावा का रुख
रंधावा ने इस पूरे विवाद को राजनीति नहीं, बल्कि आस्था और सम्मान का विषय बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता जानना चाहती है कि आम आदमी पार्टी श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा और सिख भावनाओं के साथ खड़ी है, या सत्ता बचाने के लिए मौन साधे हुए है। उनके शब्दों में, 'पंजाब कभी भी पंथ विरोधी सोच को स्वीकार नहीं करेगा।'
अकाल तख्त का फैसला: मुख्य घटनाक्रम
सोमवार को अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को धार्मिक कदाचार का दोषी घोषित किया। यह फैसला एक कथित वायरल वीडियो के आधार पर लिया गया, जिसमें मुख्यमंत्री पर सिख गुरुओं के चित्रों पर शराब छिड़कने का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस के अनुसार, यह निर्णय कथित वीडियो की फोरेंसिक जाँच के बाद लिया गया।
अकाल तख्त ने भगवंत मान को 'गुरु दोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' करार देते हुए सिख समुदाय से उनके साथ सामाजिक और धार्मिक संबंध समाप्त करने की अपील की है। साथ ही यह भी घोषणा की गई है कि पंजाब के सभी सिख विधायक — चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से हों — और राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष पेश हों।
कांग्रेस की माँग और AAP की चुप्पी
पंजाब कांग्रेस ने भी एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि अकाल तख्त के इस फैसले के बाद भगवंत मान मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं और उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब AAP की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जो विपक्ष के लिए राजनीतिक हमले का नया अवसर बन गई है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि 29 जून की अकाल तख्त में पेशी की समय-सीमा अब राजनीतिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से निर्णायक मानी जा रही है। यह देखना होगा कि भगवंत मान और AAP नेतृत्व इस दबाव में क्या रुख अपनाते हैं — और क्या केजरीवाल रंधावा के सवाल का सीधा जवाब देते हैं।