पंजाब नगर निगम चुनाव: अकाली दल का AAP सरकार पर एनओसी रोककर विपक्ष को दबाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने 15 मई 2026 को चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि नगर परिषद चुनावों के दौरान सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर विपक्षी उम्मीदवारों को जानबूझकर नामांकन प्रक्रिया से बाहर रखने की कोशिश की जा रही है। मजीठिया के अनुसार, अकाली दल के उम्मीदवारों को नामांकन के लिए अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तीन दिनों से नहीं दी जा रही।
मुख्य आरोप: तीन दिन से एनओसी नहीं
पूर्व मंत्री मजीठिया ने आरोप लगाया कि 13, 14 और 15 मई को अकाली दल के उम्मीदवार सरकारी दफ्तरों में पूरा दिन बिताने के बावजूद एनओसी हासिल नहीं कर सके। उनका कहना है कि अधिकारी जानबूझकर प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं ताकि विपक्षी प्रत्याशी नामांकन दाखिल न कर सकें।
मजीठिया के अनुसार यह मामला उपायुक्त, उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDM), रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर और पंजाब चुनाव आयोग के संज्ञान में लाया गया, लेकिन बार-बार आश्वासन के बाद भी दस्तावेज़ जारी नहीं किए गए।
कार्यकारी अधिकारी पर दबाव का दावा
मजीठिया ने आरोप लगाया कि मजीठिया नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी मनमोहन सिंह रंधावा ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन पर पंजाब सरकार का भारी दबाव है, जिसके कारण एनओसी जारी नहीं की जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि SDM के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कार्यकारी अधिकारी कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए।
गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब पंजाब में नगर परिषद चुनावों की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है और नामांकन की समय-सीमा नज़दीक है।
AAP सरकार पर व्यापक साजिश का इल्ज़ाम
मजीठिया ने कहा कि यह मुद्दा केवल एनओसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंजाब भर में विपक्षी उम्मीदवारों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'जो कुछ सामने आ रहा है वह विपक्ष को चुप कराने के लिए डराने-धमकाने, प्रशासनिक दबाव बनाने और राज्य शक्ति के दुरुपयोग का प्रदर्शन है।'
आलोचकों का कहना है कि यदि ये आरोप सही हैं, तो यह स्थानीय निकाय चुनावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। AAP सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
शिरोमणि अकाली दल पंजाब में मुख्य विपक्षी दलों में से एक है। 2022 के विधानसभा चुनावों में AAP की भारी जीत के बाद से SAD लगातार राज्य सरकार पर प्रशासनिक दुरुपयोग के आरोप लगाता रहा है। यह ऐसी पहली बार नहीं है जब किसी राज्य में सत्तारूढ़ दल पर स्थानीय निकाय चुनावों में विपक्षी उम्मीदवारों को बाधित करने के आरोप लगे हों।
आगे क्या
मजीठिया ने संकेत दिया कि यदि एनओसी जारी नहीं की गई तो अकाली दल इस मामले को न्यायालय में ले जाने पर विचार कर सकता है। पंजाब चुनाव आयोग से इस मामले में स्पष्टीकरण की माँग भी की गई है। आगामी दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना है।