30 जून 2026
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पंजाब नगर निगम चुनाव: अकाली दल का AAP सरकार पर एनओसी रोककर विपक्ष को दबाने का आरोप

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पंजाब नगर निगम चुनाव: अकाली दल का AAP सरकार पर एनओसी रोककर विपक्ष को दबाने का आरोप

सारांश

पंजाब नगर परिषद चुनावों में अकाली दल के बिक्रम सिंह मजीठिया ने AAP सरकार पर तीन दिनों से एनओसी रोककर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन से वंचित करने का आरोप लगाया है। कार्यकारी अधिकारी पर सरकारी दबाव का दावा और SDM के निर्देशों की अनदेखी — यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा सवाल है।

मुख्य बातें

बिक्रम सिंह मजीठिया ने 15 मई 2026 को AAP की पंजाब सरकार पर नगर परिषद चुनावों में सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
अकाली दल के उम्मीदवार 13, 14 और 15 मई से एनओसी के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन दस्तावेज़ जारी नहीं हुए।
मजीठिया नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी मनमोहन सिंह रंधावा ने कथित तौर पर सरकारी दबाव स्वीकार किया।
SDM के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कार्यकारी अधिकारी कार्यालय नहीं आए।
मामला पंजाब चुनाव आयोग सहित कई अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने 15 मई 2026 को चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि नगर परिषद चुनावों के दौरान सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर विपक्षी उम्मीदवारों को जानबूझकर नामांकन प्रक्रिया से बाहर रखने की कोशिश की जा रही है। मजीठिया के अनुसार, अकाली दल के उम्मीदवारों को नामांकन के लिए अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तीन दिनों से नहीं दी जा रही।

मुख्य आरोप: तीन दिन से एनओसी नहीं

पूर्व मंत्री मजीठिया ने आरोप लगाया कि 13, 14 और 15 मई को अकाली दल के उम्मीदवार सरकारी दफ्तरों में पूरा दिन बिताने के बावजूद एनओसी हासिल नहीं कर सके। उनका कहना है कि अधिकारी जानबूझकर प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं ताकि विपक्षी प्रत्याशी नामांकन दाखिल न कर सकें।

मजीठिया के अनुसार यह मामला उपायुक्त, उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDM), रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर और पंजाब चुनाव आयोग के संज्ञान में लाया गया, लेकिन बार-बार आश्वासन के बाद भी दस्तावेज़ जारी नहीं किए गए।

कार्यकारी अधिकारी पर दबाव का दावा

मजीठिया ने आरोप लगाया कि मजीठिया नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी मनमोहन सिंह रंधावा ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन पर पंजाब सरकार का भारी दबाव है, जिसके कारण एनओसी जारी नहीं की जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि SDM के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कार्यकारी अधिकारी कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए।

गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब पंजाब में नगर परिषद चुनावों की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है और नामांकन की समय-सीमा नज़दीक है।

AAP सरकार पर व्यापक साजिश का इल्ज़ाम

मजीठिया ने कहा कि यह मुद्दा केवल एनओसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंजाब भर में विपक्षी उम्मीदवारों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'जो कुछ सामने आ रहा है वह विपक्ष को चुप कराने के लिए डराने-धमकाने, प्रशासनिक दबाव बनाने और राज्य शक्ति के दुरुपयोग का प्रदर्शन है।'

आलोचकों का कहना है कि यदि ये आरोप सही हैं, तो यह स्थानीय निकाय चुनावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। AAP सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

शिरोमणि अकाली दल पंजाब में मुख्य विपक्षी दलों में से एक है। 2022 के विधानसभा चुनावों में AAP की भारी जीत के बाद से SAD लगातार राज्य सरकार पर प्रशासनिक दुरुपयोग के आरोप लगाता रहा है। यह ऐसी पहली बार नहीं है जब किसी राज्य में सत्तारूढ़ दल पर स्थानीय निकाय चुनावों में विपक्षी उम्मीदवारों को बाधित करने के आरोप लगे हों।

आगे क्या

मजीठिया ने संकेत दिया कि यदि एनओसी जारी नहीं की गई तो अकाली दल इस मामले को न्यायालय में ले जाने पर विचार कर सकता है। पंजाब चुनाव आयोग से इस मामले में स्पष्टीकरण की माँग भी की गई है। आगामी दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि चुनावी मौसम में विपक्षी दल प्रशासनिक अड़चनों को राजनीतिक रंग देते हैं — और सत्तारूढ़ दल अक्सर ऐसे आरोपों को खारिज करते हैं। असली परीक्षा यह है कि पंजाब चुनाव आयोग इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है। यदि एनओसी में देरी सिद्ध होती है, तो यह केवल SAD बनाम AAP का मामला नहीं रहेगा — यह स्थानीय निकाय चुनावों की निष्पक्षता पर एक संस्थागत सवाल बन जाएगा। पंजाब में 2022 के बाद से विपक्ष के कमज़ोर होने के संदर्भ में यह विवाद और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब नगर परिषद चुनाव में अकाली दल ने क्या आरोप लगाए हैं?
शिरोमणि अकाली दल ने आरोप लगाया है कि AAP सरकार के दबाव में अधिकारी जानबूझकर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन के लिए अनिवार्य एनओसी नहीं दे रहे। 13 से 15 मई तक उम्मीदवार दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन दस्तावेज़ जारी नहीं किए गए।
एनओसी क्यों ज़रूरी है और इसे क्यों रोका जा रहा है?
नगर परिषद चुनावों में नामांकन दाखिल करने के लिए उम्मीदवारों को संबंधित नगर निकाय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होता है। अकाली दल का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के कारण अधिकारी यह प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहे, जिससे उम्मीदवार समय-सीमा के भीतर नामांकन नहीं भर सकते।
क्या AAP सरकार ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, AAP सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस मामले में अकाली दल ने किन अधिकारियों से शिकायत की?
अकाली दल ने उपायुक्त, उपमंडल मजिस्ट्रेट, रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर और पंजाब चुनाव आयोग को इस मामले की जानकारी दी। बार-बार आश्वासन के बावजूद एनओसी जारी नहीं की गई।
आगे इस विवाद का क्या होगा?
बिक्रम सिंह मजीठिया ने संकेत दिया है कि यदि एनओसी जारी नहीं हुई तो अकाली दल न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकता है। पंजाब चुनाव आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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