अखिलेश यादव का आरोप: ई-20 ईंधन नीति में ऑटो कंपनियों और सरकार की मिलीभगत संभव
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 4 अगस्त को मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि यदि ऑटोमोबाइल कंपनियाँ ई-20 ईंधन के फायदों का प्रचार नहीं कर रही हैं, तो इसका अर्थ है कि वे केंद्र सरकार के साथ मिलकर अधिक स्पेयर पार्ट्स बेचकर मुनाफा कमा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में 'पर्दे के पीछे' सांठगाँठ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ई-20 ईंधन पर मिलीभगत का आरोप
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार के साथ-साथ कोई और भी इस नीति से मुनाफा कमा रहा है — चाहे वह स्पेयर पार्ट्स के ज़रिये हो या किसी अन्य माध्यम से। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले का हवाला देते हुए कहा, 'ऊपर से तो ताला लगा होता है, लेकिन नीचे एक सुरंग होती है।' उनका आशय था कि ऊपर से सब कुछ ठीक दिखाई देता है, लेकिन भीतर से नफे की व्यवस्था बनी रहती है। यह आरोप उन्होंने बिना किसी दस्तावेज़ी प्रमाण के लगाया, इसलिए इसे कथित तौर पर ही माना जाएगा।
बांकीपुर-दतिया उपचुनाव: भाजपा पर तीखा हमला
बांकीपुर और दतिया उपचुनाव के नतीजों पर अखिलेश यादव ने कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए 12 साल बाद मिला 'रिटर्न गिफ्ट' है। उनके अनुसार, यदि भाजपा ने इस चुनाव में भी कुंदरकी, रामपुर या पश्चिम बंगाल जैसे उपचुनावों की तरह पुलिस-प्रशासन का इस्तेमाल किया होता, तो परिणाम अलग होते। उन्होंने तर्क दिया कि यह हार जनता के गुस्से की असली अभिव्यक्ति है और निष्पक्ष चुनाव में भाजपा की वास्तविक स्थिति को दर्शाती है। दतिया पर उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ता और वहाँ की जनता इंडिया गठबंधन के साथ डटी रही।
संसद में गतिरोध: विपक्ष की तीन प्रमुख माँगें
सपा सांसद डिंपल यादव ने स्पष्ट किया कि संसद की कार्यवाही विपक्ष की वजह से नहीं, बल्कि सरकार की चुप्पी के कारण बाधित है। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि सरकार 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल तथा युवतियों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर जवाब दे।
सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने सदन में तीन माँगें रखीं — पहली, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और निर्माण में कथित कमीशनखोरी पर चर्चा; दूसरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का सदन में उपस्थित होकर 20 जुलाई की घटना पर जवाब देना; तीसरी, नीट मामले में पारदर्शिता। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट पर बहस का अवसर दिए बिना जल्दबाज़ी में विधेयक पास कर दिया गया।
मदरसा विवाद और संसद की जवाबदेही
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों पर दिए बयान पर सपा सांसद इकरा हसन ने कहा कि बिना तथ्यों के ऐसे बयान देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, 'मदरसा, मस्जिद, कांवड़, होली, दीपावली — ये सब हमारे देश की संस्कृति का हिस्सा हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी नई दिल्ली में होते हुए भी सदन में नहीं आ रहे, जो लोकतंत्र के प्रति उपेक्षा दर्शाता है।
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने भी गृह मंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय होनी चाहिए और सरकार को संसद में आकर इन सवालों का जवाब देना चाहिए।
आगे क्या
विपक्ष का रुख स्पष्ट है — जब तक सरकार इन तीन मुद्दों पर सदन में जवाब नहीं देती, संसदीय गतिरोध जारी रह सकता है। ई-20 ईंधन नीति पर अखिलेश यादव के आरोपों के बाद यह देखना होगा कि सरकार और ऑटोमोबाइल उद्योग इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं।