अक्षय यादव का आरोप: ईडी-सीबीआई केवल विपक्ष के लिए, यूपी के ब्राह्मण अब सपा के साथ
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के सांसद अक्षय यादव ने 23 जून को फिरोजाबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसियों पर पक्षपात का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का उपयोग विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है, न कि निष्पक्ष जांच के लिए। यह बयान मध्य प्रदेश के कथित जमीन खरीद विवाद की पृष्ठभूमि में आया है।
जांच एजेंसियों पर पक्षपात के आरोप
अक्षय यादव ने आरोप लगाया कि ईडी और सीबीआई जैसी संस्थाएं व्यवहार में विपक्ष के विरुद्ध औजार बन चुकी हैं। उनके अनुसार, 'विपक्ष की जांच करो, उन पर मुकदमा करो और उन्हें जेल भेजो — और जरूरत पड़े तो उन्हें तोड़कर भाजपा में ले आओ, फिर वॉशिंग मशीन की तरह सारे मुकदमे साफ हो जाते हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश जमीन विवाद में यदि कोई गड़बड़ी है तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उन्हें एजेंसियों की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है।
दल-बदल पर कड़ा रुख
तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) में नेताओं के पार्टी छोड़ने के मुद्दे पर सपा सांसद ने कहा कि इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दबाव हो सकता है। उन्होंने जनादेश के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि जो सांसद या विधायक किसी दल के चुनाव चिह्न पर जीतकर बाद में दूसरी पार्टी में चले जाते हैं, वे जनता के विश्वास को तोड़ते हैं।
उनका मत था कि ऐसे जनप्रतिनिधियों को पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर नए दल के टिकट पर चुनाव लड़कर जनता से ताजा जनादेश लेना चाहिए। 'जनता ने उन्हें जिस पार्टी के प्रतीक पर वोट दिया था, उस विश्वास को तोड़ना जनता के साथ धोखा है' — यादव ने कहा।
योगी के कार्यक्रम में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व पर सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक हालिया कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज की कथित अनुपस्थिति को लेकर भी अक्षय यादव ने निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि उस कार्यक्रम के मंच पर ब्राह्मण जाति का कोई प्रतिनिधि दिखाई नहीं दिया। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन पुलों का उद्घाटन किया गया, उनका निर्माण लगभग दस साल पहले शुरू हुआ था।
यादव ने कहा, 'मैं समझता हूं कि ब्राह्मण समाज अब समाजवादी पार्टी के साथ आ गया है, इसलिए भाजपा उन्हें पूरी तरह हाशिए पर धकेलना चाहती है।' यह बयान उत्तर प्रदेश की जातीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे सकता है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ अभी से शुरू हो रही हैं और ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिश सभी प्रमुख दल कर रहे हैं। गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने हाल के वर्षों में यादव-मुस्लिम समीकरण से आगे बढ़कर अन्य पिछड़े वर्गों और उच्च जातियों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है। अक्षय यादव का यह बयान उसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
भाजपा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक बयानबाजी के और तीखे होने की संभावना है।