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अक्षय यादव का आरोप: ईडी-सीबीआई केवल विपक्ष के लिए, यूपी के ब्राह्मण अब सपा के साथ

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अक्षय यादव का आरोप: ईडी-सीबीआई केवल विपक्ष के लिए, यूपी के ब्राह्मण अब सपा के साथ

सारांश

सपा सांसद अक्षय यादव ने फिरोजाबाद में तीखे तेवर दिखाए — ईडी-सीबीआई को 'विपक्ष के लिए वॉशिंग मशीन' बताया, दल-बदलुओं को जनता का दुश्मन कहा और दावा किया कि यूपी का ब्राह्मण समाज अब सपा के पाले में है।

मुख्य बातें

सपा सांसद अक्षय यादव ने 23 जून को फिरोजाबाद में ED और CBI पर विपक्ष को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि भाजपा में शामिल होते ही विपक्षी नेताओं के मुकदमे 'वॉशिंग मशीन की तरह साफ' हो जाते हैं।
TMC और शिवसेना (UBT) में दल-बदल को जनादेश का अपमान बताते हुए इस्तीफे और पुनर्चुनाव की माँग की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व न होने का आरोप लगाया; कहा — ब्राह्मण समाज अब सपा के साथ।
जिन पुलों का उद्घाटन हुआ, उनका निर्माण कथित तौर पर दस साल पहले शुरू हुआ था — यादव का दावा।

समाजवादी पार्टी के सांसद अक्षय यादव ने 23 जून को फिरोजाबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसियों पर पक्षपात का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का उपयोग विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है, न कि निष्पक्ष जांच के लिए। यह बयान मध्य प्रदेश के कथित जमीन खरीद विवाद की पृष्ठभूमि में आया है।

जांच एजेंसियों पर पक्षपात के आरोप

अक्षय यादव ने आरोप लगाया कि ईडी और सीबीआई जैसी संस्थाएं व्यवहार में विपक्ष के विरुद्ध औजार बन चुकी हैं। उनके अनुसार, 'विपक्ष की जांच करो, उन पर मुकदमा करो और उन्हें जेल भेजो — और जरूरत पड़े तो उन्हें तोड़कर भाजपा में ले आओ, फिर वॉशिंग मशीन की तरह सारे मुकदमे साफ हो जाते हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश जमीन विवाद में यदि कोई गड़बड़ी है तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उन्हें एजेंसियों की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है।

दल-बदल पर कड़ा रुख

तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) में नेताओं के पार्टी छोड़ने के मुद्दे पर सपा सांसद ने कहा कि इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दबाव हो सकता है। उन्होंने जनादेश के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि जो सांसद या विधायक किसी दल के चुनाव चिह्न पर जीतकर बाद में दूसरी पार्टी में चले जाते हैं, वे जनता के विश्वास को तोड़ते हैं।

उनका मत था कि ऐसे जनप्रतिनिधियों को पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर नए दल के टिकट पर चुनाव लड़कर जनता से ताजा जनादेश लेना चाहिए। 'जनता ने उन्हें जिस पार्टी के प्रतीक पर वोट दिया था, उस विश्वास को तोड़ना जनता के साथ धोखा है' — यादव ने कहा।

योगी के कार्यक्रम में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व पर सवाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक हालिया कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज की कथित अनुपस्थिति को लेकर भी अक्षय यादव ने निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि उस कार्यक्रम के मंच पर ब्राह्मण जाति का कोई प्रतिनिधि दिखाई नहीं दिया। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन पुलों का उद्घाटन किया गया, उनका निर्माण लगभग दस साल पहले शुरू हुआ था।

यादव ने कहा, 'मैं समझता हूं कि ब्राह्मण समाज अब समाजवादी पार्टी के साथ आ गया है, इसलिए भाजपा उन्हें पूरी तरह हाशिए पर धकेलना चाहती है।' यह बयान उत्तर प्रदेश की जातीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे सकता है।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ अभी से शुरू हो रही हैं और ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिश सभी प्रमुख दल कर रहे हैं। गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने हाल के वर्षों में यादव-मुस्लिम समीकरण से आगे बढ़कर अन्य पिछड़े वर्गों और उच्च जातियों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है। अक्षय यादव का यह बयान उसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।

भाजपा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक बयानबाजी के और तीखे होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'वॉशिंग मशीन' वाला रूपक राजनीतिक विमर्श में पहले से स्थापित हो चुका है और जनता के बीच असर रखता है। असली दिलचस्पी ब्राह्मण वोट-बैंक के दावे में है — अगर सपा यह समीकरण साधने में सफल होती है तो 2027 का यूपी चुनाव बहुत अलग होगा। लेकिन एक कार्यक्रम के मंच पर किसी जाति की अनुपस्थिति से जातीय बदलाव का निष्कर्ष निकालना राजनीतिक अतिशयोक्ति है, जिसे आँकड़ों की कसौटी पर परखना जरूरी है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्षय यादव ने ईडी और सीबीआई पर क्या आरोप लगाए?
सपा सांसद अक्षय यादव ने आरोप लगाया कि ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को जेल भेजने और फिर उन्हें भाजपा में शामिल कराकर मुकदमे खत्म करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने इसे 'वॉशिंग मशीन' की संज्ञा दी।
अक्षय यादव दल-बदल पर क्या कहते हैं?
यादव का कहना है कि जो जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद दूसरी पार्टी में जाते हैं, वे जनता के जनादेश का अपमान करते हैं। उनके अनुसार ऐसे नेताओं को पहले इस्तीफा देना चाहिए और फिर नए दल के टिकट पर चुनाव लड़कर ताजा जनादेश लेना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम पर अक्षय यादव ने क्या कहा?
यादव ने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक कार्यक्रम के मंच पर ब्राह्मण समाज का कोई प्रतिनिधि नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उद्घाटन किए गए पुलों का निर्माण लगभग दस साल पहले शुरू हुआ था।
सपा का ब्राह्मण वोटरों के बारे में क्या दावा है?
अक्षय यादव ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश का ब्राह्मण समाज अब समाजवादी पार्टी के साथ आ गया है और इसीलिए भाजपा उन्हें राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेलना चाहती है। यह दावा 2027 के विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में राजनीतिक महत्व रखता है।
मध्य प्रदेश जमीन खरीद विवाद क्या है?
मध्य प्रदेश में एक कथित जमीन खरीद विवाद सामने आया है जिस पर जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अक्षय यादव ने इस मामले में जांच की मांग तो की, लेकिन एजेंसियों की निष्पक्षता पर संदेह जताते हुए कहा कि उन्हें कार्रवाई की उम्मीद नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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