23 अगस्त 2026
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अमित शाह ने सिलिगुड़ी में पश्चिम बंगाल पहाड़ी क्षेत्र बैठक की अध्यक्षता की, संविधान के दायरे में स्थायी समाधान का आश्वासन

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अमित शाह ने सिलिगुड़ी में पश्चिम बंगाल पहाड़ी क्षेत्र बैठक की अध्यक्षता की, संविधान के दायरे में स्थायी समाधान का आश्वासन

सारांश

दशकों पुरानी पहाड़ी पहचान की माँग को लेकर सिलिगुड़ी में हुई इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान के दायरे में स्थायी समाधान का भरोसा दिया। पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में वार्ता समिति का गठन इस प्रक्रिया को ठोस दिशा देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 22 अगस्त 2026 को सिलिगुड़ी में पश्चिम बंगाल पहाड़ी क्षेत्र के हितधारकों के साथ बैठक की अध्यक्षता की।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि, सांसद, विधायक और क्षेत्रीय दल नेता बैठक में उपस्थित रहे।
पहाड़ी समुदाय की पृथक पहचान , स्थायी राजनीतिक समाधान और संवैधानिक मान्यता की मांगें प्रमुखता से उठाई गईं।
शाह ने भारतीय संविधान के दायरे में शीघ्र स्थायी राजनीतिक समाधान और केंद्र से पर्याप्त धनराशि का आश्वासन दिया।
समझौते को अंतिम रूप देने के लिए पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में वार्ता समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 22 अगस्त 2026 को सिलिगुड़ी में पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र के प्रतिनिधियों और विभिन्न हितधारकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पहाड़ी समुदाय की पृथक पहचान, स्थायी राजनीतिक समाधान और संवैधानिक मान्यता जैसी दीर्घकालिक मांगों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल रहे।

बैठक में कौन-कौन शामिल रहे

बैठक में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व व्यापक रहा। सांसद राजू बिस्ता और सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला, पहाड़ मंत्री बिशाल लामा, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) नेता बिमल गुरुंग, गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) नेता मान घीसिंग, विधायक भरत छेत्री, विधायक सोनम लामा, विधायक नोमन राई, सीपीआरएम नेता जेबी राई, गोरानिमो नेता दावा पाखरीन और सुमेती नेता बिकाश राई सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्य मांगें और चर्चा के बिंदु

बैठक में पश्चिम बंगाल की पहाड़ी जनसंख्या से जुड़े तमाम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने पहाड़ी समुदाय की पृथक पहचान, स्थायी राजनीतिक समाधान और भारत के संविधान के अंतर्गत उनकी मांगों की आधिकारिक मान्यता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। यह ऐसे समय में आया है जब दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में राजनीतिक अस्थिरता एक पुरानी चुनौती रही है और विभिन्न दलों के बीच इस क्षेत्र के भविष्य को लेकर मतभेद बने रहे हैं।

अमित शाह का आश्वासन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पहाड़ी क्षेत्र के सभी लंबित मुद्दों के समाधान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत के संविधान के दायरे में शीघ्र स्थायी राजनीतिक समाधान का आश्वासन दिया और कहा कि समुदाय की अन्य मांगों पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। शाह ने यह भी कहा कि केंद्र से पर्याप्त धनराशि के माध्यम से सभी लंबित मुद्दों का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

वार्ता समिति का गठन

बैठक का एक अहम नतीजा यह रहा कि समझौते की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। इस समिति की अध्यक्षता पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एवं वर्तमान वार्ताकार पंकज कुमार सिंह करेंगे। यह समिति संविधान के तहत पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के लिए तैयार किए जाने वाले अंतिम समझौते के विवरण को अंतिम रूप देने का काम करेगी।

बैठक का माहौल और आगे की राह

बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। विभिन्न संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं ने अमित शाह और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को उनके सकारात्मक और उदार दृष्टिकोण के लिए धन्यवाद दिया। गौरतलब है कि दार्जिलिंग पहाड़ी क्षेत्र में स्थायी राजनीतिक व्यवस्था की माँग दशकों पुरानी है और इस बैठक को उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वार्ता समिति के गठन के बाद अब सभी की नज़रें उसकी पहली बैठक और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दार्जिलिंग पहाड़ी क्षेत्र में 'स्थायी राजनीतिक समाधान' के वादे नए नहीं हैं — 1988 का दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल समझौता और 2011 का गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन समझौता भी इसी श्रेणी में आते हैं, जो अंततः समुदाय की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सके। असली कसौटी यह है कि पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली वार्ता समिति कितने समय में ठोस रूपरेखा तैयार करती है और क्या उसमें संवैधानिक दर्जे का स्पष्ट उल्लेख होगा। केंद्र और राज्य सरकार दोनों की एक साथ उपस्थिति राजनीतिक इच्छाशक्ति का संकेत देती है, पर बिना समयसीमा और जवाबदेही तंत्र के यह भरोसा भी पिछले वादों की कतार में शामिल हो सकता है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिलिगुड़ी में 22 अगस्त को हुई बैठक किस विषय पर थी?
यह बैठक पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र के लोगों की पृथक पहचान, स्थायी राजनीतिक समाधान और भारतीय संविधान के तहत मान्यता की दीर्घकालिक मांगों पर केंद्रित थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में यह बैठक सिलिगुड़ी में आयोजित हुई।
पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित वार्ता समिति क्या करेगी?
पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एवं वर्तमान वार्ताकार पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली यह समिति भारत के संविधान के तहत पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के लिए तैयार किए जाने वाले अंतिम राजनीतिक समझौते की रूपरेखा और विवरण को अंतिम रूप देगी।
अमित शाह ने पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को क्या आश्वासन दिया?
अमित शाह ने भारत के संविधान के दायरे में शीघ्र स्थायी राजनीतिक समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि समुदाय की अन्य मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार होगा और केंद्र से पर्याप्त धनराशि के ज़रिए सभी लंबित मुद्दे सुलझाए जाएंगे।
बैठक में कौन-से प्रमुख नेता और संगठन शामिल थे?
बैठक में जीजेएम नेता बिमल गुरुंग, जीएनएलएफ नेता मान घीसिंग, सांसद राजू बिस्ता, सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला, पहाड़ मंत्री बिशाल लामा, सीपीआरएम नेता जेबी राई, गोरानिमो नेता दावा पाखरीन और सुमेती नेता बिकाश राई सहित कई विधायक और क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र की स्थायी समाधान की माँग कितनी पुरानी है?
दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में पृथक पहचान और राजनीतिक स्वायत्तता की माँग दशकों पुरानी है। इससे पहले 1988 में दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल और 2011 में गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन के गठन जैसे समझौते हुए, लेकिन समुदाय की आकांक्षाएं अब भी पूरी तरह संबोधित नहीं हुई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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