28 जून 2026
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एनीमिया मुक्त भारत अभियान: जेपी नड्डा 29 जून को जारी करेंगे ऑपरेशनल गाइडलाइंस, 7-7-7 फ्रेमवर्क से मिलेगी नई ताकत

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एनीमिया मुक्त भारत अभियान: जेपी नड्डा 29 जून को जारी करेंगे ऑपरेशनल गाइडलाइंस, 7-7-7 फ्रेमवर्क से मिलेगी नई ताकत

सारांश

भारत की एनीमिया उन्मूलन रणनीति में बड़ा बदलाव आ रहा है — 29 जून को जेपी नड्डा नई ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी करेंगे। 6-6-6 से 7-7-7 फ्रेमवर्क, T3 से T4 अप्रोच और एकीकृत AMB पोर्टल के साथ यह अभियान अब सिर्फ आयरन की गोली से कहीं आगे जाता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा 29 जून 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में एनीमिया मुक्त भारत अभियान – ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी करेंगे।
मौजूदा 6-6-6 रणनीति को उन्नत 7-7-7 फ्रेमवर्क में बदला जाएगा; कम वजन वाले शिशु (0–6 महीने) सातवें लाभार्थी समूह के रूप में जोड़े जाएंगे।
T3 (Test, Treat, Talk) से T4 (Test, Treat, Talk, Track) अप्रोच की ओर बदलाव होगा।
गंभीर एनीमिया के लिए फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) और आयरन सुक्रोज के ज़रिए इंट्रावेनस आयरन थेरेपी शामिल की जाएगी।
सभी डेटा जननी पोर्टल , RBSK और U-WIN से जुड़कर केंद्रीय AMB अभियान पोर्टल पर एकत्रित होंगे।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा 29 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद की 16वीं बैठक के दौरान 'एनीमिया मुक्त भारत (AMB) अभियान – ऑपरेशनल गाइडलाइंस' औपचारिक रूप से जारी करेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह कदम भारत में एनीमिया उन्मूलन की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है, जो कार्यक्रम को पुरानी 'एनीमिया मुक्त भारत' योजना से एक व्यापक, प्रौद्योगिकी-आधारित अभियान में रूपांतरित करेगा।

क्या है नया ढाँचा

नई गाइडलाइंस मौजूदा 6-6-6 रणनीति को उन्नत 7-7-7 फ्रेमवर्क में बदलेंगी। इसमें एक नया — सातवाँ — लाभार्थी समूह, सातवाँ हस्तक्षेप और सातवाँ संस्थागत तंत्र जोड़ा जाएगा। सातवें लाभार्थी समूह के रूप में कम वजन (LBW) वाले शिशुओं (0–6 महीने) को शामिल किया जाएगा, जो यह मानते हुए कि एनीमिया की जड़ें जीवन के शुरुआती महीनों में ही पड़ती हैं, एक महत्त्वपूर्ण विस्तार है।

सातवें हस्तक्षेप के रूप में 'ईटिंग राइट' दृष्टिकोण लागू होगा, जो प्रतिदिन आयरन-युक्त और विविध आहार अपनाने की आदत को बढ़ावा देगा। वहीं सातवें संस्थागत तंत्र के तहत डिजिटल ट्रैकिंग से समर्थित एक सुदृढ़ मॉनिटरिंग और मूल्यांकन ढाँचा तैयार किया जाएगा।

T3 से T4 अप्रोच की ओर बदलाव

अभियान की एक प्रमुख विशेषता T3 अप्रोच (Test, Treat, Talk) से T4 अप्रोच (Test, Treat, Talk और Track) में संक्रमण है। नई रणनीति में हीमोग्लोबिन जाँच, राष्ट्रीय एनीमिया प्रबंधन प्रोटोकॉल के अनुसार आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया का उपचार, रेफरल और फॉलोअप के लिए लाभार्थियों की व्यवस्थित ट्रैकिंग, तथा स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देने हेतु विशेष परामर्श (काउंसलिंग) पर जोर दिया जाएगा।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में गंभीर एनीमिया के उपचार के लिए, विशेषकर जहाँ सामान्य उपचार प्रभावी नहीं हो रहा, फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) और आयरन सुक्रोज के माध्यम से इंट्रावेनस आयरन थेरेपी को एक महत्त्वपूर्ण नैदानिक उपाय के रूप में शामिल किया जाएगा।

डिजिटल इकोसिस्टम और निगरानी तंत्र

नई गाइडलाइंस विभिन्न लाभार्थी समूहों के लिए एनीमिया सेवाओं की निगरानी हेतु एक सुदृढ़ डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करेंगी। गर्भवती महिलाओं के हीमोग्लोबिन परीक्षण के रिकॉर्ड 'जननी पोर्टल' के माध्यम से मैप किए जाएंगे, जबकि बच्चों के रिकॉर्ड RBSK और U-WIN पोर्टल्स के ज़रिए दर्ज होंगे। ये सभी प्लेटफ़ॉर्म एक केंद्रीय 'AMB अभियान पोर्टल' से जुड़ेंगे, जिससे समग्र निगरानी, डेटा विश्लेषण और साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण संभव हो सकेगा।

व्यापक परिप्रेक्ष्य

यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आँकड़ों के अनुसार भारत में 57% से अधिक बच्चे और 57% महिलाएँ एनीमिया से पीड़ित हैं। गौरतलब है कि 'एनीमिया मुक्त भारत' कार्यक्रम 2018 में शुरू हुआ था और अब इसका यह नया संस्करण सिर्फ आयरन सप्लीमेंटेशन से आगे बढ़कर एक समग्र सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति अपनाता है। 29 जून को होने वाली यह लॉन्चिंग नई दिशा को आधिकारिक रूप देगी और राज्य सरकारों के साथ क्रियान्वयन की अगली कड़ी शुरू होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी NFHS-5 के आँकड़े बताते हैं कि देश की आधी से अधिक महिलाएँ और बच्चे अब भी एनीमिया से पीड़ित हैं — यह सवाल उठाता है कि केवल ढाँचे का नाम बदलने से ज़मीनी हकीकत कितनी बदलेगी। 7-7-7 फ्रेमवर्क और T4 अप्रोच की दिशा सही है, लेकिन असली परीक्षा राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन की होगी, जहाँ स्वास्थ्यकर्मियों की कमी और डिजिटल बुनियादी ढाँचे की खामियाँ अब भी बड़ी चुनौती हैं। AMB पोर्टल का एकीकरण स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन डेटा की गुणवत्ता और वास्तविक समय में अपडेट सुनिश्चित करना उतना ही ज़रूरी होगा जितना पोर्टल बनाना।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनीमिया मुक्त भारत अभियान की नई ऑपरेशनल गाइडलाइंस क्या हैं?
ये गाइडलाइंस 29 जून 2026 को जारी होने वाला वह नया ढाँचा हैं जो 'एनीमिया मुक्त भारत' कार्यक्रम को एक व्यापक, प्रौद्योगिकी-आधारित अभियान में बदलेंगी। इनमें 7-7-7 फ्रेमवर्क, T4 अप्रोच और डिजिटल निगरानी तंत्र शामिल हैं।
6-6-6 और 7-7-7 फ्रेमवर्क में क्या अंतर है?
6-6-6 फ्रेमवर्क में छह लाभार्थी समूह, छह हस्तक्षेप और छह संस्थागत तंत्र थे। नए 7-7-7 फ्रेमवर्क में कम वजन वाले शिशुओं (0–6 महीने) को सातवें लाभार्थी समूह के रूप में, 'ईटिंग राइट' को सातवें हस्तक्षेप के रूप में, और डिजिटल मॉनिटरिंग को सातवें संस्थागत तंत्र के रूप में जोड़ा गया है।
T4 अप्रोच क्या है और यह T3 से कैसे अलग है?
T3 अप्रोच में Test (जाँच), Treat (उपचार) और Talk (परामर्श) शामिल थे। T4 अप्रोच में चौथा तत्व Track (ट्रैकिंग) जोड़ा गया है, जिससे लाभार्थियों का रेफरल और फॉलोअप व्यवस्थित रूप से डिजिटल माध्यम से किया जा सकेगा।
इंट्रावेनस आयरन थेरेपी किनके लिए उपलब्ध होगी?
यह थेरेपी मुख्यतः गर्भवती और स्तनपान कराने वाली उन महिलाओं के लिए है जिनमें एनीमिया गंभीर है या जिन पर सामान्य उपचार का असर नहीं हो रहा। इसमें फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (FCM) और आयरन सुक्रोज का उपयोग किया जाएगा।
AMB अभियान पोर्टल कैसे काम करेगा?
AMB अभियान पोर्टल जननी पोर्टल, RBSK और U-WIN जैसे मौजूदा स्वास्थ्य प्लेटफ़ॉर्म को एकीकृत करेगा। इससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों के हीमोग्लोबिन डेटा एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगे, जिससे साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण संभव होगा।
राष्ट्र प्रेस
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