पंजाब विधानसभा विवाद: भाजपा विधायक अश्वनी शर्मा ने जताया खेद, AAP पर लगाया दोहरे रवैये का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब विधानसभा में 6 अगस्त 2026 को महिलाओं के विरुद्ध कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर जोरदार हंगामा हुआ, जब विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक अश्वनी शर्मा ने सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट किया। शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया, और यदि उनके किसी शब्द से किसी की भावनाएँ आहत हुई हैं तो वे उसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
अश्वनी शर्मा के अनुसार, उन्होंने विधानसभा में आम आदमी पार्टी (AAP) की कार्यशैली और मानसिकता पर टिप्पणी करते हुए एक स्थानीय बोलचाल का शब्द प्रयोग किया था। उनका कहना है कि पंजाब में ऐसे कई शब्द और वाक्यांश प्रचलित हैं। उन्होंने कहा, 'यदि किसी सदस्य को वह शब्द अमर्यादित लगा, तो उसे विधानसभा की कार्यवाही से हटाया जा सकता है।'
भाजपा का महिला सम्मान पर पक्ष
शर्मा ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं के सम्मान में अटूट विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि BJP नवरात्रों में कन्या पूजन करती है और बेटियों को लक्ष्मी का स्वरूप मानती है। उन्होंने यह भी कहा कि वे घर से निकलते समय बेटियों के चरण स्पर्श करके निकलते हैं। उनके अनुसार, महिलाओं के प्रति सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि सोच और संस्कारों में होता है।
AAP सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप
शर्मा ने AAP सरकार पर महिलाओं के प्रति दोहरे रवैये का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब विभिन्न आंदोलनों में महिलाओं पर पुलिस कार्रवाई हुई, तब सत्ता पक्ष की महिला विधायक और सरकार मौन रही। उन्होंने बरनाला में वाल्मीकि समाज की महिलाओं, बठिंडा में सहायक प्रोफेसरों के आंदोलन, नर्सों के प्रदर्शन, किसान आंदोलन में शामिल महिलाओं तथा मनरेगा से जुड़े प्रदर्शन का हवाला दिया — जहाँ कथित तौर पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन का उपयोग किया गया।
विशिष्ट घटनाओं का उल्लेख
शर्मा ने बताया कि 7 फरवरी 2026 को बठिंडा में किसान आंदोलन के दौरान महिलाओं पर लाठीचार्ज किया गया और 15 जुलाई को मनरेगा से जुड़े प्रदर्शन में भी महिलाओं के खिलाफ बल प्रयोग हुआ। उनका आरोप है कि इन घटनाओं पर सत्ता पक्ष ने कोई गंभीर प्रतिक्रिया नहीं दी।
राजनीतिक अपील
शर्मा ने अपील की कि महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और बहनों व महिलाओं के नाम पर राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब में विधानसभा सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी पहले से ही चरम पर है।