असम-बंगाल में एससी-एसटी सीटों पर भाजपा का दबदबा: असम में 19/19, बंगाल में 67/84 सीटें जीतीं

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असम-बंगाल में एससी-एसटी सीटों पर भाजपा का दबदबा: असम में 19/19, बंगाल में 67/84 सीटें जीतीं

सारांश

असम में एनडीए ने सभी 19 एसटी सीटें जीतकर शून्य छोड़ा विपक्ष के लिए, और पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 84 एससी-एसटी सीटों में से 67 पर कब्जा जमाकर टीएमसी को 17 पर समेट दिया। दक्षिण भारत में भी एनडीए ने दस्तक दी — यह आरक्षित वर्गों में भाजपा की बढ़ती पैठ का स्पष्ट संकेत है।

मुख्य बातें

असम में एनडीए ने 19 एसटी सीटें और 8 एससी सीटें जीतीं; भाजपा अकेले 13 एसटी और 5 एससी सीटें जीती।
पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 84 एससी-एसटी सीटों में से 67 जीतीं; टीएमसी केवल 17 पर सिमटी।
बंगाल की 68 एससी सीटों में भाजपा को 51 (~75%) और सभी 16 एसटी सीटें मिलीं।
मतुआ समुदाय के एकजुट समर्थन को विशेषज्ञ सीमावर्ती एससी क्षेत्रों में भाजपा की जीत का प्रमुख कारण मानते हैं।
तमिलनाडु में AIADMK ने 9 एससी और 1 एसटी सीट जीती; पुडुचेरी में AINRC ने 2 एससी सीटें जीतीं।
परिसीमन से असम में एसटी सीटें 16 से 19 और एससी सीटें 8 से 9 हुईं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों ने हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित सीटों पर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। असम में एनडीए ने सभी 19 एसटी सीटें जीतीं, जबकि पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 84 एससी-एसटी सीटों में से 67 पर जीत दर्ज की। तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने आरक्षित सीटों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

असम में एनडीए का संपूर्ण वर्चस्व

असम में भाजपा ने राज्य की 9 एससी आरक्षित सीटों में से 5 जीतीं, और एनडीए ने कुल 8 एससी सीटें अपने नाम कीं। केवल 1 सीट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के खाते में गई।

19 एसटी आरक्षित सीटों पर भाजपा ने अकेले 13 सीटें जीतीं। सहयोगी दलों बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) और असम गण परिषद (AGP) के साथ मिलकर एनडीए ने सभी 19 एसटी सीटों पर कब्जा जमाया — एक भी सीट विपक्ष को नहीं मिली।

विश्लेषकों के अनुसार, परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे एसटी सीटें 16 से बढ़कर 19 और एससी सीटें 8 से बढ़कर 9 हो गईं। अपर असम और पहाड़ी क्षेत्रों में भाजपा के विस्तार तथा आदिवासी क्षेत्रों में सहयोगी दलों की मजबूत पकड़ ने इस सफलता को और पुख्ता किया।

पश्चिम बंगाल में भाजपा का बड़ा राजनीतिक उलटफेर

पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम आरक्षित सीटों पर एक बड़े राजनीतिक बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं। राज्य की 68 एससी सीटों में भाजपा ने 51 सीटें जीतकर करीब 75 प्रतिशत पर कब्जा किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) को केवल 17 सीटों पर संतोष करना पड़ा।

एसटी सीटों पर भाजपा का प्रदर्शन और भी निर्णायक रहा — उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे आदिवासी क्षेत्रों में सभी 16 एसटी सीटें भाजपा की झोली में गईं। कुल मिलाकर, भाजपा ने 84 एससी-एसटी सीटों में से 67 पर जीत हासिल की, जबकि टीएमसी 17 सीटों तक सिमट गई। अन्य दलों का इन सीटों पर लगभग सफाया हो गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि मतुआ समुदाय का एकजुट समर्थन भाजपा के पक्ष में जाने से एससी बहुल क्षेत्रों, खासकर सीमावर्ती इलाकों में पार्टी को बड़ा लाभ मिला।

दक्षिण भारत में एनडीए की उपस्थिति

दक्षिण भारत में भी एनडीए ने आरक्षित सीटों पर अपनी दावेदारी जताई। तमिलनाडु में एनडीए की सहयोगी अखिल भारतीय अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने 46 एससी सीटों में से 9 और 2 एसटी सीटों में से 1 सीट जीती।

पुडुचेरी में एनडीए की सहयोगी ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस ने 5 एससी आरक्षित सीटों में से 2 पर जीत दर्ज की। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत में भाजपा-नीत गठबंधन की पैठ परंपरागत रूप से सीमित मानी जाती रही है।

आम जनता और वंचित वर्गों पर असर

इन चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि भाजपा और एनडीए ने न केवल अपने पारंपरिक समर्थन आधार को मजबूत किया है, बल्कि एससी और एसटी जैसे ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों में भी गहरी पैठ बनाई है। गौरतलब है कि इन सीटों पर ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा है।

कई राज्यों में आरक्षित सीटें अब भाजपा के लिए निर्णायक चुनावी आधार बनती दिख रही हैं। आने वाले चुनावों में यह रुझान किस दिशा में जाता है, यह देखना अहम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसका असर सीमावर्ती समुदायों पर सबसे अधिक पड़ता है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह समर्थन नीतिगत लाभों में तब्दील होता है या केवल चुनावी गणित तक सीमित रहता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में भाजपा ने एससी-एसटी सीटों पर कितनी जीत हासिल की?
असम में भाजपा ने 9 एससी सीटों में से 5 और 19 एसटी सीटों में से 13 जीतीं। BPF और AGP के साथ मिलकर एनडीए ने सभी 19 एसटी सीटें जीतीं और 8 एससी सीटें अपने नाम कीं।
पश्चिम बंगाल में एससी-एसटी सीटों पर भाजपा और टीएमसी का प्रदर्शन कैसा रहा?
पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 84 एससी-एसटी सीटों में से 67 जीतीं, जिसमें 68 एससी सीटों में से 51 और सभी 16 एसटी सीटें शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) केवल 17 एससी सीटें जीत सकी।
असम में परिसीमन का एससी-एसटी सीटों पर क्या असर पड़ा?
परिसीमन की प्रक्रिया से असम में एसटी सीटें 16 से बढ़कर 19 और एससी सीटें 8 से बढ़कर 9 हो गईं। विश्लेषकों के अनुसार, इस बदलाव ने भाजपा-नीत एनडीए को रणनीतिक लाभ दिया।
तमिलनाडु और पुडुचेरी में एनडीए का आरक्षित सीटों पर प्रदर्शन कैसा रहा?
तमिलनाडु में एनडीए सहयोगी AIADMK ने 46 एससी सीटों में से 9 और 2 एसटी सीटों में से 1 जीती। पुडुचेरी में AINRC ने 5 एससी सीटों में से 2 पर जीत दर्ज की।
मतुआ समुदाय का पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा को क्या फायदा हुआ?
विशेषज्ञों के अनुसार, मतुआ समुदाय का एकजुट समर्थन भाजपा को मिलने से एससी बहुल क्षेत्रों, विशेषकर सीमावर्ती इलाकों में पार्टी को निर्णायक बढ़त मिली। यह समुदाय पश्चिम बंगाल की कई एससी आरक्षित सीटों पर निर्णायक मतदाता माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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