असम BJP की 13-31 अक्टूबर रैलियाँ: CM सरमा का राहुल गांधी के ECI-विरोध अभियान पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की असम इकाई 13 से 31 अक्टूबर तक राज्यभर के जिला मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण रैलियाँ आयोजित करेगी। ये रैलियाँ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस अभियान के जवाब में हैं, जिसमें वे भारत के चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। सरमा के अनुसार, इन रैलियों का उद्देश्य जनता को संवैधानिक संस्थाओं को कथित रूप से कमज़ोर करने की इन कोशिशों के प्रति सतर्क करना है।
रैलियों की घोषणा और पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री सरमा ने यह घोषणा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर की। उन्होंने लिखा कि BJP की असम इकाई रैलियाँ आयोजित करेगी ताकि कांग्रेस की उन कोशिशों का जवाब दिया जा सके, जिनके ज़रिए वह संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बना रही है और लोकतांत्रिक जनादेश को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई जब राहुल गांधी नई दिल्ली में चुनाव आयोग के कामकाज के विरुद्ध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा का आरोप भी लगाया है, जिससे चुनावी पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही का मुद्दा और तीखा हो गया है।
सरमा के आरोप: दोहरे मापदंड का सवाल
सीएम सरमा ने कांग्रेस पर चुनावी नतीजों को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी एक्स पोस्ट में कहा, 'राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी भारत के लोकतंत्र की नींव पर हमला कर रहे हैं।' उनके अनुसार, जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री चुने जाते हैं तो उसे हेरफेर कहा जाता है, किंतु राहुल गांधी का स्वयं का संसद चुनाव और विपक्ष के नेता के रूप में पदभार संभालना सवालों से परे माना जाता है।
उन्होंने असम और केरल के चुनाव परिणामों का उदाहरण देते हुए कहा कि असम में वोटिंग के नतीजे स्वीकार्य नहीं होते, जबकि केरल के नतीजों का स्वागत किया जाता है। सरमा ने कहा, 'कांग्रेस के लिए लोकतंत्र तभी सही है जब कांग्रेस की जीत हो।'
न्यायपालिका और SIR पर कांग्रेस के विरोध का मुद्दा
सरमा ने राहुल गांधी के उस फ़ैसले की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा विपक्षी सांसदों के साथ बैठक के अनुरोध को ठुकराए जाने के बाद भी यह मामला जारी रखा। सरमा ने आरोप लगाया कि इस कदम से न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी।
रैलियों में मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) के प्रति कांग्रेस के विरोध को भी उजागर किया जाएगा। सरमा ने दावा किया कि इस विरोध का असली मकसद अवैध घुसपैठियों को बचाना है — हालाँकि कांग्रेस ने इस दावे को खारिज किया है।
रैलियों के मुख्य एजेंडे और भाजपा का संदेश
मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, इन रैलियों में तीन मुख्य मुद्दे उठाए जाएँगे: संवैधानिक संस्थाओं को कथित रूप से 'ब्लैकमेल' करने की कोशिश, SIR का विरोध कर अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देना, और लोकतांत्रिक जनादेश को कमज़ोर करने का प्रयास।
सरमा ने 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री मोदी के विजन के लिए BJP के समर्थन को दोहराते हुए कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए और संस्थाओं को आज़ादी मिलनी चाहिए — 'दोनों में से किसी को भी राजनीतिक सुविधा के लिए बंधक नहीं बनाया जा सकता।'
आगे क्या होगा
यह राजनीतिक टकराव चुनावी पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही के व्यापक राष्ट्रीय विमर्श से जुड़ा हुआ है। 13 अक्टूबर से शुरू होने वाली ये रैलियाँ असम के समस्त जिला मुख्यालयों को कवर करेंगी और 31 अक्टूबर तक जारी रहेंगी। देखना होगा कि कांग्रेस इस जवाबी अभियान पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह विवाद केवल राज्य तक सीमित रहता है या राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक रूप लेता है।