19 अगस्त 2026
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असम कोचिंग सेंटर नियम 2026: 50+ छात्रों पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, काउंसलर रखना ज़रूरी

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असम कोचिंग सेंटर नियम 2026: 50+ छात्रों पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, काउंसलर रखना ज़रूरी

सारांश

असम ने कोचिंग उद्योग पर लगाम कसी — 50 या अधिक छात्रों वाले केंद्रों को अब अनिवार्य पंजीकरण, वार्षिक नवीनीकरण और योग्य मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर रखना होगा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अगुआई में कैबिनेट ने 19 अगस्त को इस व्यापक नियामक ढाँचे को हरी झंडी दी।

मुख्य बातें

असम कैबिनेट ने 19 अगस्त 2026 को 'असम प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट्स (कंट्रोल एंड स्टूडेंट मेंटल हेल्थ सेफगार्ड) नियम, 2026' को मंजूरी दी।
50 या अधिक छात्रों वाले सभी निजी कोचिंग केंद्रों को अनिवार्य पंजीकरण कराना होगा।
पंजीकृत संस्थानों को प्रतिवर्ष पंजीकरण नवीनीकृत कराना होगा और इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा प्रमाण पत्र जमा करना होगा।
प्रत्येक संस्थान को एक योग्य मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य रूप से करनी होगी।
पंजीकरण की निगरानी संबंधित जिले के जिला आयुक्त करेंगे; NBC, AICTE और UGC मानकों का पालन भी अनिवार्य।

असम सरकार ने 19 अगस्त 2026 को राज्य के निजी कोचिंग संस्थानों के लिए एक व्यापक नियामक ढाँचा अधिसूचित किया, जिसके तहत 50 या अधिक छात्रों वाले सभी केंद्रों को अनिवार्य पंजीकरण, वार्षिक नवीनीकरण और एक योग्य मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर की नियुक्ति करनी होगी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह जानकारी दी। यह कदम बढ़ते शैक्षणिक दबाव और कोचिंग उद्योग में जवाबदेही की माँग के बीच उठाया गया है।

नए नियमों में क्या है

कैबिनेट ने 'असम प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट्स (कंट्रोल एंड स्टूडेंट मेंटल हेल्थ सेफगार्ड) नियम, 2026' को मंजूरी दी। इसके अनुसार जिन संस्थानों में 50 या उससे अधिक छात्र नामांकित हैं, उन्हें औपचारिक पंजीकरण कराना होगा। संबंधित जिले के जिला आयुक्त को पंजीकरण प्रक्रिया लागू करने और निगरानी रखने का अधिकार दिया गया है।

पंजीकृत संस्थानों को हर वर्ष अपना पंजीकरण नवीनीकृत कराना होगा और इसके साथ इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा, जो यह प्रमाणित करेगा कि परिसर निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप है।

मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ज़ोर

नए ढाँचे का एक केंद्रीय प्रावधान यह है कि प्रत्येक पंजीकृत कोचिंग संस्थान को एक योग्य काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य रूप से करनी होगी। यह प्रावधान उस पृष्ठभूमि में आया है जब देशभर में कोचिंग संस्थानों में छात्रों पर अत्यधिक शैक्षणिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य संकट की घटनाएँ सामने आई हैं।

गौरतलब है कि राजस्थान के कोटा जैसे कोचिंग हब में पिछले कुछ वर्षों में छात्र आत्महत्या की दर्दनाक घटनाओं ने पूरे देश में इस मुद्दे को नीतिगत एजेंडे पर ला दिया था। असम का यह कदम उसी राष्ट्रीय चिंता का राज्य-स्तरीय जवाब है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और नियामक मानक

नियमों के अनुसार संस्थानों को नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) के तहत निर्धारित भवन एवं सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। जहाँ लागू हो, वहाँ AICTE और UGC द्वारा निर्धारित मानदंडों का अनुपालन भी अनिवार्य होगा। इस बहुस्तरीय अनुपालन ढाँचे का उद्देश्य राज्य भर के कोचिंग केंद्रों में एकरूपता और न्यूनतम गुणवत्ता मानक सुनिश्चित करना है।

सरकार का उद्देश्य

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार इस नियामक तंत्र का मकसद राज्य के निजी कोचिंग क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता लाना है। सरकार चाहती है कि छात्रों को एक ऐसा वातावरण मिले जो शारीरिक रूप से सुरक्षित और मानसिक रूप से सहायक हो। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रमाणन, वार्षिक पंजीकरण नवीनीकरण और काउंसलर की उपलब्धता — ये तीनों मिलकर एक समग्र सुरक्षा कवच बनाते हैं।

आगे क्या होगा

नियमों की अधिसूचना के बाद अब जिला आयुक्तों के स्तर पर पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। 50 से कम छात्रों वाले छोटे केंद्र फिलहाल अनिवार्य पंजीकरण के दायरे से बाहर हैं, लेकिन उन पर भविष्य में नज़र रखी जा सकती है। असम का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन में है। राज्य भर में बिखरे हज़ारों छोटे-बड़े कोचिंग केंद्रों पर जिला आयुक्त के ज़रिए निगरानी रखना प्रशासनिक रूप से महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। '50 छात्र' की सीमा एक तार्किक शुरुआत है, लेकिन इससे छोटे केंद्र — जहाँ अक्सर सबसे कम जवाबदेही होती है — नियामक दायरे से बाहर रह जाते हैं। काउंसलर की अनिवार्यता स्वागत योग्य है, परंतु योग्यता मानक और काउंसलर-छात्र अनुपात स्पष्ट नहीं है — बिना इसके यह प्रावधान कागज़ी खानापूर्ति बन सकता है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम कोचिंग संस्थान नियम 2026 क्या है?
यह असम सरकार द्वारा 19 अगस्त 2026 को कैबिनेट से मंजूर किया गया नियामक ढाँचा है, जो राज्य के निजी कोचिंग केंद्रों के लिए अनिवार्य पंजीकरण, वार्षिक नवीनीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रमाणन और मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर की नियुक्ति को अनिवार्य बनाता है। इसका पूरा नाम 'असम प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट्स (कंट्रोल एंड स्टूडेंट मेंटल हेल्थ सेफगार्ड) नियम, 2026' है।
किन कोचिंग सेंटरों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा?
असम में जिन निजी कोचिंग संस्थानों में 50 या उससे अधिक छात्र नामांकित हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। 50 से कम छात्रों वाले केंद्र फिलहाल इस अनिवार्य पंजीकरण के दायरे से बाहर हैं।
काउंसलर रखना क्यों अनिवार्य किया गया है?
बढ़ते शैक्षणिक दबाव और प्रतिस्पर्धा के कारण कोचिंग छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य संकट की घटनाएँ राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी हैं। नए नियमों के तहत प्रत्येक पंजीकृत संस्थान को एक योग्य मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर नियुक्त करना होगा, ताकि छात्रों को समय पर सहायता मिल सके।
पंजीकरण प्रक्रिया की निगरानी कौन करेगा?
संबंधित जिले के जिला आयुक्त को पंजीकरण प्रक्रिया लागू करने और उसकी निगरानी के लिए सक्षम अधिकारी नियुक्त किया गया है। संस्थानों को हर वर्ष अपना पंजीकरण नवीनीकृत कराना होगा और इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा।
इन नियमों से छात्रों को क्या फायदा होगा?
नए नियम छात्रों को तीन स्तरों पर सुरक्षा देते हैं — भवन सुरक्षा (NBC मानक), मानसिक स्वास्थ्य सहायता (योग्य काउंसलर) और संस्थागत जवाबदेही (वार्षिक पंजीकरण)। इससे छात्रों को एक सुरक्षित और व्यवस्थित शिक्षण वातावरण मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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