असम CM हिमंत बिस्वा सरमा की छात्रों को नसीहत: डिग्री के साथ स्किल ज़रूरी, 5 साल में 2 लाख भर्तियाँ
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 6 अगस्त 2026 को गुवाहाटी के श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में छात्रों को स्पष्ट संदेश दिया — केवल पारंपरिक डिग्री अब रोज़गार की गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि बदलते जॉब मार्केट में टिके रहने के लिए स्किल-आधारित और विशेषज्ञता वाली शिक्षा अपनाना अनिवार्य हो गया है। उनके अनुसार, आने वाले समय में मेरिट और विशेषज्ञता ही अवसरों की कुंजी होगी।
कार्यक्रम और अपील का संदर्भ
मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नीजुत मोइना योजना और मुख्यमंत्री नीजुत बाबू योजना के आवेदन फॉर्म वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ करने के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे नियमित पाठ्यक्रम के साथ-साथ किसी एक अतिरिक्त क्षेत्र में विशेष दक्षता अवश्य हासिल करें। सरमा ने कहा, 'आज की दुनिया विशेषज्ञों को महत्व देती है। सिर्फ ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री अब पर्याप्त नहीं है। रोज़गार की संभावनाएँ बढ़ाने के लिए छात्रों को किसी एक क्षेत्र में अतिरिक्त दक्षता विकसित करनी होगी।'
राज्य सरकार की भर्ती योजना
रोज़गार के अवसरों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार अगले पाँच वर्षों में करीब 2 लाख लोगों की भर्ती करने जा रही है। इसमें लगभग 22 हज़ार लैब टेक्नीशियन, जीएनएम नर्स और एएनएम शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 1.60 लाख सरकारी नौकरियाँ पूरी तरह मेरिट के आधार पर दी जा चुकी हैं और आगे भी भर्तियाँ बिना भ्रष्टाचार के होंगी। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं।
विज्ञान शिक्षा पर चिंता
सरमा ने असम में विज्ञान की पढ़ाई में छात्रों की घटती रुचि पर गहरी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए विज्ञान के प्रति रुझान बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट का समय जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है और इसे आंदोलन में नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति समर्पण में लगाना चाहिए।
नीजुत मोइना और नीजुत बाबू योजनाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि बाल विवाह रोकने के उद्देश्य से शुरू की गई नीजुत मोइना योजना के तहत इस वित्तीय वर्ष में 5 लाख बालिकाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं नीजुत बाबू योजना के विस्तार के बाद इससे 1.20 लाख छात्र लाभान्वित होंगे। दोनों योजनाओं का उद्देश्य छात्रों की शैक्षणिक प्रतिबद्धता को मज़बूत करना और गंभीरता से पढ़ाई को बढ़ावा देना है।
बाढ़ प्रभावित स्कूलों को राहत
इस अवसर पर सरमा ने शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों की बाढ़ प्रभावित 793 स्कूलों के लिए डीबीटी के माध्यम से ₹15.86 करोड़ की वित्तीय सहायता जारी की। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री राहत कोष से शिवसागर और चराईदेव के 21,025 छात्रों को बाढ़ में नष्ट हुई अध्ययन सामग्री की भरपाई के लिए ₹4.26 करोड़ से अधिक की सहायता राशि दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन स्कूलों को स्थायी नुकसान हुआ है, उन्हें विस्तृत आकलन के बाद अतिरिक्त सहायता दी जाएगी और सरकार छात्रों की पढ़ाई बाधित किए बिना शैक्षणिक ढाँचे को बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है।