11 अगस्त 2026
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आर्मी चीफ जनरल द्विवेदी ने तेजपुर में कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य को COAS कमेंडेशन मेडल से नवाज़ा

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आर्मी चीफ जनरल द्विवेदी ने तेजपुर में कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य को COAS कमेंडेशन मेडल से नवाज़ा

सारांश

असम के पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य को सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने तेजपुर में COAS कमेंडेशन कार्ड व मेडल से नवाज़ा। NDA में ऑल इंडिया रैंक-1 से लेकर गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता और दिव्य शंकर फाउंडेशन के संस्थापक तक — यह सम्मान एक बहुआयामी जीवन की पहचान है।

मुख्य बातें

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 22 जून 2026 को तेजपुर में कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य को COAS कमेंडेशन कार्ड एवं मेडल प्रदान किया।
कर्नल भट्टाचार्य ने भारतीय सेना में 33 वर्षों से अधिक सेवा दी और यूपीएससी एनडीए में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल करने वाले असम के पहले व्यक्ति हैं।
उन्होंने ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन पराक्रम में भाग लिया तथा बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन में डायरेक्टर रहे।
सेवानिवृत्ति के बाद वे गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता और आर्य विद्या पीठ कॉलेज में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में कार्यरत हैं।
दिव्य शंकर फाउंडेशन के माध्यम से वे पूर्वोत्तर के युवाओं को सशस्त्र बलों में प्रवेश के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं।
उन्हें हाल ही में सर्वोत्तम साधना पुरस्कार 2026 से भी नवाज़ा गया था।

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 22 जून 2026 को तेजपुर में आयोजित एक आधिकारिक सम्मान समारोह में असम के वरिष्ठ पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य (सेवानिवृत्त) को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड एवं मेडल प्रदान किया। यह सम्मान उनके 33 वर्षों से अधिक के सैन्य योगदान और सेवानिवृत्ति के बाद समाज के प्रति उनकी अनवरत प्रतिबद्धता को मान्यता देता है।

सम्मान समारोह का विवरण

सम्मान प्रदान करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि कर्नल भट्टाचार्य ने अपने सैन्य करियर के दौरान और उसके पश्चात भी कर्तव्य, समर्पण, ईमानदारी और पेशेवर उत्कृष्टता के उच्चतम आदर्शों को अटूट रूप से बनाए रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी कर्नल भट्टाचार्य ने देश के विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अपने आचरण व सेवा से सैनिकों तथा आम नागरिकों — दोनों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

असाधारण सैन्य करियर

कर्नल भट्टाचार्य वह गौरव प्राप्त करने वाले असम के पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने यूपीएससी एनडीए परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल किया। अपने करियर के दौरान उन्होंने पाकिस्तान और चीन सीमा क्षेत्रों में सेवा दी तथा पंजाब और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन रक्षक एवं ऑपरेशन पराक्रम में भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

वे प्रतिष्ठित सीनियर ऑफिसर्स कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले अधिकारी भी रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) में डायरेक्टर के रूप में भी महत्वपूर्ण दायित्व संभाला।

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा

सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी कर्नल भट्टाचार्य की सक्रियता थमी नहीं है। वे वर्तमान में गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं और आर्य विद्या पीठ कॉलेज, गुवाहाटी में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के पद पर भी अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

उन्होंने दिव्य शंकर फाउंडेशन की स्थापना की है, जो विशेष रूप से असम और पूर्वोत्तर भारत के युवाओं को भारतीय सशस्त्र बलों में प्रवेश के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान करता है। उनके प्रयासों से अनेक युवा रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित हुए हैं।

पुरस्कार और पारिवारिक पृष्ठभूमि

कर्नल भट्टाचार्य को हाल ही में सर्वोत्तम साधना पुरस्कार 2026 से भी सम्मानित किया गया था। वे असम के प्रसिद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता, विधिवेत्ता और साहित्यकार स्वर्गीय गौरी शंकर भट्टाचार्य के सबसे छोटे पुत्र हैं।

सेना प्रमुख द्वारा प्रदत्त यह सम्मान उनके राष्ट्र, सेना और समाज के प्रति आजीवन समर्पण का प्रतीक है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूर्वोत्तर भारत के उस अदृश्य योगदान की स्वीकृति है जो राष्ट्रीय सुरक्षा में दशकों से होता आया है, पर मुख्यधारा की चर्चा में अक्सर हाशिये पर रहता है। दिव्य शंकर फाउंडेशन का मॉडल उल्लेखनीय है — यह सेवानिवृत्त अधिकारियों की विशेषज्ञता को सीधे युवा भर्ती पाइपलाइन में बदलने का प्रयास है, जो सरकारी तंत्र के बाहर काम करता है। प्रश्न यह है कि ऐसे व्यक्तिगत प्रयासों को संस्थागत समर्थन कब और कैसे मिलेगा, ताकि पूर्वोत्तर से रक्षा सेवाओं में भागीदारी और व्यापक हो सके।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य को कौन-सा सम्मान मिला?
उन्हें 22 जून 2026 को तेजपुर में आयोजित समारोह में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी द्वारा चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) कमेंडेशन कार्ड एवं मेडल से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके सैन्य करियर और सेवानिवृत्ति के बाद के राष्ट्रीय योगदान को मान्यता देता है।
कर्नल भट्टाचार्य की सैन्य उपलब्धियाँ क्या हैं?
उन्होंने भारतीय सेना में 33 वर्षों से अधिक सेवा दी और यूपीएससी एनडीए परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त करने वाले असम के पहले व्यक्ति बने। उन्होंने ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन पराक्रम और पाकिस्तान-चीन सीमा क्षेत्रों में सेवा दी, तथा बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन में डायरेक्टर के रूप में भी कार्य किया।
दिव्य शंकर फाउंडेशन क्या करता है?
दिव्य शंकर फाउंडेशन असम और पूर्वोत्तर भारत के युवाओं को भारतीय सशस्त्र बलों में प्रवेश के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान करता है। कर्नल भट्टाचार्य द्वारा स्थापित इस संस्था के प्रयासों से कई युवा रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित हुए हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद कर्नल भट्टाचार्य क्या कर रहे हैं?
सेवानिवृत्ति के बाद वे गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं और आर्य विद्या पीठ कॉलेज, गुवाहाटी में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के पद पर भी सेवाएँ दे रहे हैं। इसके साथ ही वे दिव्य शंकर फाउंडेशन के माध्यम से युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित कर रहे हैं।
कर्नल भट्टाचार्य को हाल ही में और कौन-से पुरस्कार मिले हैं?
COAS कमेंडेशन से पूर्व उन्हें सर्वोत्तम साधना पुरस्कार 2026 से भी सम्मानित किया गया था। ये दोनों पुरस्कार उनके सैन्य और नागरिक जीवन में असाधारण योगदान की व्यापक स्वीकृति को दर्शाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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