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आर्मी चीफ जनरल द्विवेदी ने असम के कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य को COAS कमेंडेशन मेडल से नवाज़ा

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आर्मी चीफ जनरल द्विवेदी ने असम के कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य को COAS कमेंडेशन मेडल से नवाज़ा

सारांश

तेजपुर में आयोजित समारोह में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने असम के कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य को COAS कमेंडेशन मेडल से नवाज़ा — NDA में ऑल इंडिया रैंक-1 पाने वाले असम के पहले व्यक्ति, जो आज वकील, प्रोफेसर और दिव्य शंकर फाउंडेशन के ज़रिए पूर्वोत्तर के युवाओं को सेना में राह दिखा रहे हैं।

मुख्य बातें

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 22 जून 2026 को तेजपुर में कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य (सेवानिवृत्त) को COAS कमेंडेशन कार्ड एवं मेडल प्रदान किया।
कर्नल भट्टाचार्य ने भारतीय सेना में 33 वर्षों से अधिक सेवा दी और यूपीएससी एनडीए में ऑल इंडिया रैंक-1 पाने वाले असम के पहले व्यक्ति हैं।
उन्होंने ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन पराक्रम में भाग लिया तथा BRO में डायरेक्टर रहे।
सेवानिवृत्ति के बाद वे गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता और आर्य विद्या पीठ कॉलेज में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस हैं।
दिव्य शंकर फाउंडेशन के माध्यम से वे असम और पूर्वोत्तर के छात्रों को सशस्त्र बलों में करियर के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं।
उन्हें हाल ही में सर्वोत्तम साधना पुरस्कार 2026 से भी नवाज़ा गया था।

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 22 जून 2026 को तेजपुर में आयोजित एक आधिकारिक सैन्य समारोह में असम के वरिष्ठ पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य (सेवानिवृत्त) को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड एवं मेडल प्रदान किया। यह सम्मान कर्नल भट्टाचार्य के 33 वर्षों से अधिक के असाधारण सैन्य करियर और सेवानिवृत्ति के बाद भी राष्ट्र एवं समाज के प्रति उनके अनवरत योगदान की स्वीकृति के रूप में दिया गया।

सम्मान समारोह का विवरण

सम्मान प्रदान करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि कर्नल भट्टाचार्य ने अपने उत्कृष्ट सैन्य जीवन के दौरान और उसके बाद भी कर्तव्य, समर्पण, ईमानदारी और पेशेवर उत्कृष्टता के उच्चतम आदर्शों को अटूट रूप से बनाए रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि सेवानिवृत्ति के पश्चात भी कर्नल भट्टाचार्य ने देश के विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा अपने आचरण और सेवा से सैनिकों एवं आम नागरिकों, दोनों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

सैन्य करियर की उपलब्धियाँ

कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य ने भारतीय सेना में 33 वर्षों से अधिक की सेवा दी। वे यूपीएससी एनडीए परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त करने वाले असम के प्रथम व्यक्ति हैं — एक ऐसी उपलब्धि जो आज भी पूर्वोत्तर के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।

अपने सेवाकाल में उन्होंने पाकिस्तान और चीन सीमा क्षेत्रों में तैनाती के साथ-साथ पंजाब और जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक (आतंकवाद विरोधी अभियान) तथा ऑपरेशन पराक्रम में सक्रिय भागीदारी की। इसके अतिरिक्त वे प्रतिष्ठित सीनियर ऑफिसर्स कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले अधिकारी रहे और बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) में डायरेक्टर के पद पर भी कार्य किया।

सेवानिवृत्ति के बाद का योगदान

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद कर्नल भट्टाचार्य ने अपनी सार्वजनिक उपस्थिति को और विस्तृत किया है। वे वर्तमान में गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं और आर्य विद्या पीठ कॉलेज, गुवाहाटी में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में भी जुड़े हैं।

उन्होंने दिव्य शंकर फाउंडेशन की स्थापना की है, जो विशेष रूप से असम और पूर्वोत्तर भारत के छात्रों को भारतीय सशस्त्र बलों में करियर बनाने के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान करती है। उनके प्रयासों से अनेक युवा रक्षा सेवाओं की ओर प्रेरित हुए हैं। उन्हें हाल ही में सर्वोत्तम साधना पुरस्कार 2026 से भी सम्मानित किया गया था।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और विरासत

कर्नल भट्टाचार्य असम के प्रसिद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता, विधिवेत्ता और साहित्यकार स्वर्गीय गौरी शंकर भट्टाचार्य के सबसे छोटे पुत्र हैं। यह पारिवारिक विरासत और उनकी अपनी उपलब्धियाँ मिलकर उन्हें असम के सार्वजनिक जीवन में एक विशिष्ट स्थान देती हैं। सेना प्रमुख द्वारा प्रदत्त यह सम्मान उनके राष्ट्र, सेना और समाज के प्रति आजीवन समर्पण का प्रतीक है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी प्रेरणा बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर वकील, प्रोफेसर और फाउंडेशन संस्थापक तक का सफर यह दर्शाता है कि सैन्य उत्कृष्टता और नागरिक सेवा परस्पर विरोधी नहीं हैं। असली सवाल यह है कि क्या ऐसे अधिकारियों की विरासत को संस्थागत रूप से संरक्षित किया जा रहा है, या यह सम्मान महज़ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नल दिव्य शंकर भट्टाचार्य को COAS कमेंडेशन मेडल क्यों दिया गया?
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने उन्हें 33 वर्षों की असाधारण सैन्य सेवा और सेवानिवृत्ति के बाद भी राष्ट्र व समाज के प्रति उनके योगदान के लिए यह सम्मान दिया। उनकी कर्तव्यनिष्ठा, पेशेवर उत्कृष्टता और दिव्य शंकर फाउंडेशन के माध्यम से युवाओं को सेना में प्रेरित करने की भूमिका को विशेष रूप से सराहा गया।
कर्नल भट्टाचार्य की सबसे बड़ी सैन्य उपलब्धि क्या है?
वे यूपीएससी एनडीए परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त करने वाले असम के पहले व्यक्ति हैं। इसके अलावा उन्होंने ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन पराक्रम में भाग लिया, सीनियर ऑफिसर्स कोर्स में प्रथम स्थान पाया और BRO में डायरेक्टर के रूप में कार्य किया।
दिव्य शंकर फाउंडेशन क्या करती है?
दिव्य शंकर फाउंडेशन असम और पूर्वोत्तर भारत के छात्रों को भारतीय सशस्त्र बलों में करियर बनाने के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान करती है। कर्नल भट्टाचार्य द्वारा स्थापित यह संस्था क्षेत्र के युवाओं को रक्षा सेवाओं की ओर प्रेरित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
सेवानिवृत्ति के बाद कर्नल भट्टाचार्य किस क्षेत्र में कार्यरत हैं?
सेवानिवृत्ति के बाद वे गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता और आर्य विद्या पीठ कॉलेज, गुवाहाटी में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे दिव्य शंकर फाउंडेशन के माध्यम से सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं।
यह समारोह कब और कहाँ आयोजित हुआ?
यह आधिकारिक सम्मान समारोह 22 जून 2026 को असम के तेजपुर में आयोजित किया गया, जहाँ सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने व्यक्तिगत रूप से कर्नल भट्टाचार्य को COAS कमेंडेशन कार्ड और मेडल प्रदान किया।
राष्ट्र प्रेस
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