2 नवंबर 2026
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असम में एफपीसी की संख्या दोगुनी होगी, कृषि मंत्री हजारिका ने दिया किसानों की आय बढ़ाने का निर्देश

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असम में एफपीसी की संख्या दोगुनी होगी, कृषि मंत्री हजारिका ने दिया किसानों की आय बढ़ाने का निर्देश

सारांश

असम के कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने किसान प्रोड्यूसर कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का निर्देश दिया है। मखाना से लेकर ड्रैगन फ्रूट तक — पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़ने और बाज़ार जुड़ाव मज़बूत करने की रणनीति से असम को बागवानी हब बनाने का रोडमैप साफ़ हो रहा है।

मुख्य बातें

कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने 2 नवंबर 2026 को गुवाहाटी में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
अधिकारियों को राज्य में किसान प्रोड्यूसर कंपनियों (एफपीसी) की संख्या दोगुनी करने के निर्देश दिए गए।
मखाना मिशन, एडिबल ऑयल पाम मिशन, पल्स मिशन और बराक घाटी के राजमाह मिशन की प्रगति की समीक्षा हुई।
नलबाड़ी स्थित प्रसंस्करण संयंत्र से जुड़े लगभग 1,200 आलू किसानों की आय बढ़ाने और भागीदारी विस्तार पर चर्चा।
मखाना, अगरवुड, एडिबल ऑयल पाम, नारियल और ड्रैगन फ्रूट जैसी वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहन देने पर जोर।
असम को बागवानी-आधारित अग्रणी राज्य बनाने का विज़न दोहराया गया।

असम के कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को अधिकारियों को राज्य में किसान प्रोड्यूसर कंपनियों (एफपीसी) की संख्या दोगुनी करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए। गुवाहाटी के खानापारा स्थित कृषि भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने किसानों की आय में ठोस सुधार के लिए फसल विविधीकरण और मज़बूत बाज़ार जुड़ाव (मार्केट लिंकेज) को प्राथमिकता देने पर विशेष बल दिया।

मुख्य घटनाक्रम

समीक्षा बैठक में मंत्री हजारिका ने मखाना मिशन, एडिबल ऑयल पाम मिशन और पल्स मिशन सहित कई कृषि पहलों की प्रगति का आकलन किया। इसके अलावा बराक घाटी में प्रस्तावित राजमाह मिशन की स्थिति का भी विस्तार से रिव्यू किया गया। बैठक में कृषि विभाग के आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मंत्री ने पारंपरिक धान की खेती से परे जाकर मखाना, अगरवुड, एडिबल ऑयल पाम, नारियल और ड्रैगन फ्रूट जैसी वैकल्पिक फसलों के साथ-साथ बागवानी उत्पादों को बढ़ावा देने की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को विभागीय योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, जवाबदेही को मज़बूत करने और ज़मीनी स्तर पर किसानों से जुड़ाव बेहतर बनाने के स्पष्ट निर्देश दिए।

आलू किसानों पर विशेष ध्यान

इसी क्रम में मंत्री ने एक अलग बैठक में एक निजी कंपनी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की, जो नलबाड़ी में एक प्रसंस्करण संयंत्र संचालित करती है। फिलहाल इस कंपनी से राज्य के लगभग 1,200 आलू किसान जुड़े हुए हैं। बैठक में आलू उत्पादन बढ़ाने, किसान-उद्योग साझेदारी को मज़बूत करने और कंपनी की ज़रूरतों की पूर्ति के लिए अधिक किसानों को इस सहयोग से जोड़ने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

हजारिका ने स्पष्ट किया कि मज़बूत मार्केट लिंकेज के ज़रिए आलू उगाने वाले किसानों की आमदनी में सुधार लाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करना, फसलों के विविध उपयोग को प्रोत्साहित करना और उद्योग-किसान भागीदारी को आगे बढ़ाना राज्य सरकार की मूल नीतियों में शामिल रहेंगे।

असम को बागवानी हब बनाने का विज़न

मंत्री ने राज्य सरकार के उस व्यापक विज़न को भी दोहराया जिसमें विभिन्न ज़िलों की कृषि क्षमता का दोहन करके असम को बागवानी-आधारित एक अग्रणी राज्य के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर नीतिगत चर्चा के केंद्र में है।

गौरतलब है कि एफपीसी मॉडल किसानों को सामूहिक सौदेबाज़ी की शक्ति देता है और बाज़ार तक सीधी पहुँच सुनिश्चित करता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है। एफपीसी की संख्या दोगुनी करने का यह निर्देश राज्य की कृषि नीति में एक महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव का संकेत देता है।

आगे की राह

अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के बाद अब सभी की नज़रें क्रियान्वयन की गति पर रहेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि एफपीसी विस्तार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और वित्तीय सुविधाएँ कितनी तेज़ी से मिलती हैं। आने वाले हफ्तों में विभाग द्वारा रोडमैप जारी किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल चुनौती क्रियान्वयन की है — अतीत में ऐसे निर्देश अक्सर बैठक-कक्षों तक सीमित रह जाते हैं। मखाना और ड्रैगन फ्रूट जैसी नकदी फसलों का प्रोत्साहन तभी अर्थपूर्ण होगा जब किसानों को बाज़ार तक पहुँच, ठंडे भंडारण की सुविधा और उचित मूल्य की गारंटी एक साथ मिले। नलबाड़ी के आलू किसान मॉडल यह दिखाता है कि उद्योग-किसान साझेदारी काम कर सकती है — लेकिन 1,200 किसानों से राज्यव्यापी विस्तार की राह लंबी और संसाधन-गहन है। बिना जवाबदेही तंत्र के, यह विज़न केवल एक और नीतिगत घोषणा बनकर रह सकता है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में किसान प्रोड्यूसर कंपनियाँ (एफपीसी) क्या होती हैं और इन्हें दोगुना क्यों किया जा रहा है?
किसान प्रोड्यूसर कंपनियाँ (एफपीसी) किसानों का सामूहिक संगठन होती हैं जो उन्हें बाज़ार तक सीधी पहुँच और सामूहिक सौदेबाज़ी की शक्ति देती हैं। कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने 2 नवंबर 2026 को इनकी संख्या दोगुनी करने का निर्देश इसलिए दिया ताकि अधिक किसानों को सरकारी योजनाओं और बाज़ार से बेहतर जोड़ा जा सके और उनकी आय में वृद्धि हो।
असम के मखाना मिशन और अन्य कृषि मिशनों की क्या स्थिति है?
2 नवंबर 2026 की समीक्षा बैठक में मखाना मिशन, एडिबल ऑयल पाम मिशन और पल्स मिशन की प्रगति का आकलन किया गया। बराक घाटी में प्रस्तावित राजमाह मिशन का भी रिव्यू हुआ। मंत्री ने इन सभी योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और ज़मीनी स्तर पर बेहतर जुड़ाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
असम में आलू किसानों के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
नलबाड़ी में एक प्रसंस्करण संयंत्र चलाने वाली एक कंपनी के साथ बैठक में आलू उत्पादन बढ़ाने और अधिक किसानों को इस साझेदारी से जोड़ने पर चर्चा हुई। फिलहाल लगभग 1,200 आलू किसान इस कंपनी से जुड़े हैं। मंत्री हजारिका ने मज़बूत मार्केट लिंकेज के ज़रिए इन किसानों की आमदनी सुधारने को प्राथमिकता बताया।
असम सरकार किन वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दे रही है?
असम सरकार पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़कर मखाना, अगरवुड, एडिबल ऑयल पाम, नारियल और ड्रैगन फ्रूट जैसी वैकल्पिक फसलों के साथ-साथ अन्य बागवानी उत्पादों को प्रोत्साहित कर रही है। इसका उद्देश्य अलग-अलग ज़िलों की कृषि क्षमता का दोहन कर असम को बागवानी-आधारित अग्रणी राज्य बनाना है।
असम को बागवानी हब बनाने की योजना से किसानों को कब और कैसे फायदा होगा?
सरकार का लक्ष्य विभागीय योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, एफपीसी विस्तार और उद्योग-किसान साझेदारी के ज़रिए किसानों को ठोस लाभ पहुँचाना है। आने वाले हफ्तों में विभाग द्वारा विस्तृत रोडमैप जारी किए जाने की उम्मीद है, हालाँकि क्रियान्वयन की गति और वित्तीय सहायता के विवरण अभी सामने आने हैं।
राष्ट्र प्रेस
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