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एफपीओ से किसान बनेंगे निर्यातक: नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया मोदी का कृषि विज़न

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एफपीओ से किसान बनेंगे निर्यातक: नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया मोदी का कृषि विज़न

सारांश

मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भोपाल में एफएमसीएएस प्लेटफॉर्म के उद्घाटन पर कहा कि एफपीओ किसानों को उत्पादक से निर्यातक बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के सपने को ज़मीन पर उतार रहे हैं — लेकिन असली कसौटी यह है कि ये संगठन टिकाऊ और व्यापार-समर्थ कब बनेंगे।

मुख्य बातें

नरेंद्र सिंह तोमर ने 3 सितंबर को भोपाल में एफएमसीएएस के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उद्घाटन किया।
तोमर ने कहा कि एफपीओ किसानों को उत्पादक से निर्यातक बनाने के PM मोदी के विज़न को साकार कर रहे हैं।
किसान की असली चुनौती उत्पादन नहीं, बल्कि उचित मूल्य, भंडारण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार पहुंच है।
तोमर ने अपने केंद्रीय कृषि मंत्री कार्यकाल का हवाला देते हुए एफपीओ अभियान की पृष्ठभूमि साझा की।
अब लक्ष्य है कि देश में गठित एफपीओ टिकाऊ और व्यापार-समर्थ बनें।

मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने 3 सितंबर को भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस सपने को साकार कर रहे हैं, जिसमें देश के किसानों को उत्पादक से निर्यातक बनाने की परिकल्पना की गई है। फार्मर्स कंसोर्टियम फॉर एग्रीकल्चर एंड अलायड सेक्टर (एफएमसीएएस) के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के उद्घाटन अवसर पर दिए गए संबोधन में तोमर ने कृषि क्षेत्र की संरचनागत चुनौतियों और एफपीओ के समाधान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मूल्य श्रृंखला की खामी पर तोमर का जोर

तोमर ने कहा कि किसान अपनी उपज पैदा करे, लेकिन उसके मूल्य का बड़ा हिस्सा किसी और के पास चला जाए — यह व्यवस्था टिकाऊ नहीं है। उन्होंने रेखांकित किया कि देश के किसान की सबसे बड़ी चुनौती उत्पादन नहीं, बल्कि उचित मूल्य, बाजार तक सीधी पहुंच, भंडारण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और व्यापारिक क्षमता रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में कृषि आय बढ़ाने को लेकर नीतिगत बहस तेज़ है।

केंद्रीय कृषि मंत्री के कार्यकाल का अनुभव

तोमर ने अपने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि उस दौर में किसानों की आय, बाजार तक पहुंच और सामूहिक शक्ति को लेकर लगातार विचार-विमर्श होता था। उन्होंने कहा, 'यदि किसान अकेले बाजार में जाएगा तो उसकी उत्पाद बेचने की क्षमता सीमित रहेगी, लेकिन यदि वही किसान संगठित होकर अपनी उपज का संग्रह करे, उसका प्रसंस्करण करे, ब्रांड बनाए और बाजार में सामूहिक रूप से उतरे, तो उसकी शक्ति कई गुना बढ़ सकती है।' इसी सोच के आधार पर देश में एफपीओ को बढ़ावा देने का व्यापक अभियान शुरू किया गया था।

एफपीओ की उपलब्धि और आगे का लक्ष्य

तोमर ने कहा कि आज देश में बड़ी संख्या में एफपीओ का गठन हो चुका है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अब लक्ष्य यह है कि ये एफपीओ टिकाऊ और व्यापार-समर्थ बनें। गौरतलब है कि एफपीओ मॉडल किसानों को सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति देता है, जिससे वे बड़े बाजारों और निर्यात श्रृंखलाओं से जुड़ सकते हैं।

एफएमसीएएस प्लेटफॉर्म का महत्व

एफएमसीएएस के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उद्घाटन इस दिशा में एक व्यावहारिक कदम माना जा रहा है, जो किसान संगठनों को डिजिटल बाजार और कृषि-संबद्ध क्षेत्रों से जोड़ने में सहायक होगा। तोमर ने कहा कि ऐसे संगठित प्रयासों से ही किसानों की आय कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य पूर्ण होगा और प्रधानमंत्री मोदी का किसानों को निर्यातक बनाने का सपना साकार होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि गठित हो चुके एफपीओ में से कितने वास्तव में लाभकारी और निर्यात-सक्षम हैं। देश में हजारों एफपीओ के गठन के बावजूद बड़ी संख्या अभी भी संचालन और वित्तपोषण की चुनौतियों से जूझ रही है। किसान की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की समयसीमा बीत चुकी है और मूल्य श्रृंखला में किसान की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है। एफएमसीएएस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सही दिशा में कदम हैं, पर बिना जवाबदेही तंत्र के ये घोषणाएं महज़ संख्याओं का खेल बन सकती हैं।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) क्या होते हैं और ये किसानों की कैसे मदद करते हैं?
एफपीओ किसानों के सामूहिक संगठन हैं जो उन्हें मिलकर उपज का संग्रह, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार में बिक्री करने की क्षमता देते हैं। इससे किसान अकेले की बजाय सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति से बेहतर मूल्य पा सकते हैं और निर्यात श्रृंखलाओं से भी जुड़ सकते हैं।
एफएमसीएएस का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म क्या है और इसका उद्घाटन कब हुआ?
फार्मर्स कंसोर्टियम फॉर एग्रीकल्चर एंड अलायड सेक्टर (एफएमसीएएस) का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म 3 सितंबर को भोपाल में लॉन्च किया गया। यह प्लेटफॉर्म किसान संगठनों को डिजिटल बाजार और कृषि-संबद्ध क्षेत्रों से जोड़ने के लिए बनाया गया है।
PM मोदी का किसानों को निर्यातक बनाने का सपना क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी का विज़न है कि भारत के किसान केवल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी उपज को प्रसंस्कृत कर, ब्रांड बनाकर और सामूहिक रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतरें। एफपीओ इस लक्ष्य को हासिल करने का प्रमुख माध्यम माने जा रहे हैं।
नरेंद्र सिंह तोमर ने एफपीओ के संदर्भ में किसानों की किन चुनौतियों का जिक्र किया?
तोमर ने कहा कि किसान की मुख्य चुनौती उत्पादन नहीं, बल्कि उचित मूल्य, बाजार तक सीधी पहुंच, भंडारण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और व्यापारिक क्षमता है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक मूल्य श्रृंखला में किसान की हिस्सेदारी नहीं बढ़ती, यह व्यवस्था टिकाऊ नहीं होगी।
एफपीओ को टिकाऊ बनाने के लिए आगे क्या किया जाएगा?
तोमर के अनुसार, अब प्राथमिकता यह है कि देश में गठित एफपीओ टिकाऊ और व्यापार-समर्थ बनें। एफएमसीएएस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म इस दिशा में मदद करेंगे, जिससे किसान संगठन बड़े बाजारों और निर्यात नेटवर्क से जुड़ सकें।
राष्ट्र प्रेस
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