8 अगस्त 2026
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अतीक अहमद के बेटे अबान की प्रयागराज में दफ्न, 5-6 हजार की भीड़ में पुलिस ने संभाला मोर्चा

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अतीक अहमद के बेटे अबान की प्रयागराज में दफ्न, 5-6 हजार की भीड़ में पुलिस ने संभाला मोर्चा

सारांश

अतीक अहमद के बेटे अबान को प्रयागराज में पिता की कब्र के बगल में दफनाया गया। जनाजे में 5-6 हजार लोग उमड़े, बैरिकेडिंग टूटी। पैरोल पर आए भाई अली और उमर ने चार साल बाद पहली बार परिवार से मुलाकात की। माँ शाइस्ता परवीन 2023 से फरार हैं और इस बार भी नहीं पहुँचीं।

मुख्य बातें

अतीक अहमद के 21 वर्षीय बेटे अबान को 8 अगस्त 2026 की शाम कसारी-मसारी कब्रिस्तान, प्रयागराज में पिता की कब्र के बगल में दफनाया गया।
जनाजे में अनुमानतः 5,000 से 6,000 लोग पहुँचे; भीड़ बेकाबू होने पर बैरिकेडिंग टूट गई और पुलिस को सख्ती करनी पड़ी।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय से पैरोल मिलने पर भाई अली (झांसी जेल) और उमर (लखनऊ जेल) चार साल बाद पहली बार परिवार से मिले।
अबान की मृत्यु गुरुवार सुबह 10:30 बजे झांसी हाईवे पर सड़क दुर्घटना में हुई; मित्र सोनू की भी जान गई, तीन अन्य घायल।
माँ शाइस्ता परवीन 2023 से फरार हैं और अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुईं।

प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में शनिवार, 8 अगस्त 2026 की शाम दिवंगत माफिया-नेता अतीक अहमद के 21 वर्षीय पुत्र अबान को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अबान की कब्र उनके पिता अतीक की कब्र के ठीक बगल में बनाई गई। अंतिम विदाई के इस दुखद अवसर पर उनके तीनों भाइयों — अली, उमर और अहजम — ने जनाजे को कंधा दिया।

जनाजे में उमड़ी भीड़, बैरिकेडिंग टूटी

अबान के जनाजे में अनुमानतः 5,000 से 6,000 लोग पहुँचे। कब्रिस्तान और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। जब बड़े भाई अहजम अबान का शव लेकर कब्रिस्तान पहुँचे, तो उनके पीछे बड़ी संख्या में लोग भी अंदर घुसने लगे। पुलिस ने भीड़ को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कुछ ही देर में बैरिकेडिंग टूट गई और स्थिति अनियंत्रित हो गई। बाद में पुलिस ने सख्ती बरतते हुए भीड़ को नियंत्रित किया।

पुलिस ने अंतिम संस्कार के दौरान केवल परिवार और चुनिंदा रिश्तेदारों को कब्रिस्तान के भीतर जाने की अनुमति दी। उल्लेखनीय है कि इसी कब्रिस्तान में अबान के दादा फिरोज अहमद, चाचा अशरफ और भाई असद की कब्रें भी हैं।

पैरोल पर पहुँचे अली और उमर, चार साल बाद मिली छूट

इलाहाबाद उच्च न्यायालय से पैरोल मिलने के बाद अली और उमर शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज पहुँचे। अली को झांसी जेल से करीब 400 किलोमीटर की दूरी तय कर लाया गया, जबकि उमर को लखनऊ जेल से प्रयागराज लाया गया। अली को सुबह करीब साढ़े नौ बजे झांसी जेल से लगभग 30 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में रवाना किया गया था। पुलिस वैन पर पर्दे लगाए गए थे ताकि अली का चेहरा बाहर से दिखाई न दे।

उमर करीब साढ़े चार बजे और अली करीब साढ़े पाँच बजे प्रयागराज पहुँचे। पुलिस वैन से बाहर निकलते ही दोनों भाई एक-दूसरे से गले मिले। इसके बाद दोनों ने मस्जिद में नमाज अदा की और अबान को मिट्टी दी। दोनों को करीब चार साल बाद पहली बार पैरोल मिली है।

परिवार से मुलाकात और वापसी

अंतिम संस्कार के बाद अली और उमर को परिवार से मिलने की अनुमति दी गई। उच्च न्यायालय ने पैरोल के दौरान दोनों को भाई अहजम और बुआ से मुलाकात की अनुमति दी थी। पुलिस ने कब्रिस्तान से कुछ दूरी पर स्थित एक मस्जिद के बाहर टेंट लगाकर इसकी व्यवस्था की थी। करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद अली को झांसी जेल और उमर को लखनऊ जेल वापस ले जाने की तैयारी थी।

अबान की माँ शाइस्ता परवीन अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुईं। वह वर्ष 2023 से फरार हैं और इससे पहले अपने पति अतीक अहमद तथा बेटे असद के अंतिम संस्कार में भी नहीं पहुँची थीं।

कैसे हुई अबान की मौत

अबान की मृत्यु गुरुवार सुबह झांसी में एक सड़क दुर्घटना में हुई थी। वह झांसी जेल में बंद भाई अली से मिलने के लिए प्रयागराज से निकले थे। उनकी क्रेटा कार में चार अन्य लोग भी सवार थे। सुबह करीब 10:30 बजे हाईवे पर एक जानवर को बचाने के प्रयास में कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। इस हादसे में अबान और उनके मित्र सोनू की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। दोनों के शव शुक्रवार तड़के करीब चार बजे एक ही एंबुलेंस से झांसी से प्रयागराज के हटवा गाँव लाए गए थे।

यह घटना अतीक अहमद परिवार से जुड़ी त्रासदियों की लंबी श्रृंखला की एक और कड़ी है, जो उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और संगठित अपराध के संदर्भ में चर्चा का विषय बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीति और कानून-व्यवस्था के उलझे धागों की याद दिलाता है। हजारों की भीड़ का उमड़ना और बैरिकेडिंग का टूटना यह सवाल उठाता है कि राज्य प्रशासन ऐसे संवेदनशील आयोजनों में भीड़ प्रबंधन को लेकर कितना तैयार था। शाइस्ता परवीन का लगातार तीसरी बार अनुपस्थित रहना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है — वह 2023 से फरार हैं और कानून की पहुँच से बाहर हैं, जो प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक अनुत्तरित प्रश्न बना हुआ है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अबान अतीक अहमद की मौत कैसे हुई?
अबान की मृत्यु गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे झांसी हाईवे पर एक सड़क दुर्घटना में हुई। वह प्रयागराज से झांसी जेल में बंद भाई अली से मिलने जा रहे थे, जब हाईवे पर एक जानवर को बचाने के प्रयास में उनकी क्रेटा कार डिवाइडर से टकरा गई। इस हादसे में अबान और उनके मित्र सोनू की जान गई, जबकि तीन अन्य घायल हुए।
अबान को कहाँ दफनाया गया?
अबान को 8 अगस्त 2026 की शाम प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में उनके पिता अतीक अहमद की कब्र के बगल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इसी कब्रिस्तान में अबान के दादा फिरोज अहमद, चाचा अशरफ और भाई असद की कब्रें भी हैं।
अली और उमर को पैरोल क्यों और कैसे मिली?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भाई अबान के निधन के कारण अली और उमर को पैरोल दी। अली को झांसी जेल से और उमर को लखनऊ जेल से कड़ी पुलिस सुरक्षा में प्रयागराज लाया गया। दोनों को करीब चार साल बाद पहली बार पैरोल मिली और उन्हें भाई अहजम व बुआ से मिलने की अनुमति दी गई।
शाइस्ता परवीन अंतिम संस्कार में क्यों नहीं आईं?
अबान की माँ शाइस्ता परवीन वर्ष 2023 से फरार हैं। वह इससे पहले अपने पति अतीक अहमद और बेटे असद के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुई थीं। उनकी अनुपस्थिति का कारण उनका कानून से बचते रहना बताया जाता है।
जनाजे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी?
कसारी-मसारी कब्रिस्तान और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात था। भीड़ के बेकाबू होने पर बैरिकेडिंग टूट गई और पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी। केवल परिवार और चुनिंदा रिश्तेदारों को कब्रिस्तान के अंदर जाने की अनुमति दी गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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