8 अगस्त 2026
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अबान अहमद का अंतिम संस्कार आज प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो भाइयों को दी पैरोल

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अबान अहमद का अंतिम संस्कार आज प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो भाइयों को दी पैरोल

सारांश

अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान अहमद, जिनकी झांसी-कानपुर हाईवे पर सड़क दुर्घटना में मौत हुई, को शनिवार को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल में बंद भाइयों अली और उमर को जनाजे में शामिल होने की अनुमति दी है।

मुख्य बातें

अबान अहमद को शनिवार, 9 अगस्त को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा।
अबान की मृत्यु झांसी-कानपुर हाईवे पर खिल्ली गाँव के निकट सड़क हादसे में हुई; साथी सोनू की भी मौके पर मौत, तीन अन्य घायल।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल में बंद भाइयों अली (झांसी जेल) और उमर (लखनऊ जेल) को जनाजे में शामिल होने की पैरोल दी।
दोनों भाइयों पर मीडिया व सार्वजनिक सभा से संवाद पर पूर्ण प्रतिबंध ; अंतिम संस्कार के बाद वापस जेल।
शव को दफनाने से पूर्व कसारी-मसारी स्थित पुश्तैनी मकान की ज़मीन पर रखा जाएगा, जो अब मलबे में तब्दील है।

अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान अहमद को शनिवार, 9 अगस्त 2026 को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम संस्कार की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं और कब्र भी खोदी जा चुकी है। झांसी-कानपुर हाईवे पर हुए एक सड़क हादसे में अबान की मृत्यु के बाद उनका पार्थिव शरीर फिलहाल हटवा गाँव में उनकी बुआ प्रवीन कुरैशी के घर पर रखा गया है।

मुख्य घटनाक्रम

शुक्रवार, 8 अगस्त को झांसी में अबान का पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद शव को हटवा गाँव लाया गया, जहाँ बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुँचे। दफनाने से पूर्व शव को कसारी-मसारी स्थित अतीक अहमद के पुश्तैनी मकान की ज़मीन पर रखा जाएगा। यह मकान अब पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुका है। परिवारिक परंपरा के अनुसार, परिवार के किसी भी सदस्य के निधन पर शव को कब्रिस्तान ले जाने से पहले इसी पुश्तैनी स्थान पर रखा जाता है। इससे पूर्व पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अतीक के बेटे असद का शव भी यहीं लाया गया था।

अंतिम संस्कार की व्यवस्था

मलबे में तब्दील पुश्तैनी मकान की शेष ज़मीन पर अंतिम रस्मों के लिए टेंट लगाया गया है और शव को सुरक्षित रखने के लिए डीप फ्रीज़र की व्यवस्था की गई है। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस ने पर्याप्त सुरक्षा बंदोबस्त किए हैं। कब्रिस्तान में कब्र खोदने का काम पहले ही पूरा हो चुका है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अतीक अहमद के जेल में बंद दो बेटों — अली और उमर — को छोटे भाई अबान के जनाजे में शामिल होने की अनुमति देते हुए पैरोल प्रदान की। अली फिलहाल झांसी जेल में और उमर लखनऊ जेल में बंद हैं। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अंतिम संस्कार के पश्चात दोनों भाइयों को पुलिस हिरासत में उनकी संबंधित जेलों में वापस ले जाया जाएगा।

न्यायालय ने दोनों पर कड़ी शर्तें भी लगाई हैं — वे किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित नहीं कर सकते और मीडिया — जिसमें सोशल मीडिया तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भी शामिल है — से किसी प्रकार की बातचीत नहीं कर सकते। अदालत के अनुसार दोनों केवल अंतिम संस्कार कराने वाले व्यक्ति, अपनी बुआ प्रवीन कुरैशी और भाई अहजम अहमद से ही संवाद कर सकेंगे।

सड़क हादसे में हुई थी मौत

अबान अहमद की मृत्यु झांसी-कानपुर हाईवे पर पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गाँव के निकट हुए एक सड़क दुर्घटना में हुई। इस हादसे में अबान के साथ उनके साथी सोनू की भी मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को झांसी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने अबान और सोनू को मृत घोषित किया। पोस्टमार्टम के बाद अबान का शव प्रयागराज लाया गया।

आगे क्या

अंतिम संस्कार के बाद अली और उमर को पुलिस की निगरानी में वापस उनकी जेलों में भेजा जाएगा। अतीक अहमद परिवार से जुड़े इस पूरे प्रकरण पर प्रशासन की कड़ी नज़र बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि अतीक परिवार से जुड़ी हर घटना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और कानूनी जटिलताओं से घिर जाती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का पैरोल देना और साथ ही मीडिया संवाद पर कड़ी पाबंदी लगाना — यह न्यायपालिका की उस संतुलन-कोशिश को दर्शाता है जहाँ मानवीय अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था दोनों को साधना होता है। पुश्तैनी मकान का मलबे में होना और फिर भी उसी ज़मीन पर अंतिम रस्म — यह उस परिवार की टूटती विरासत का प्रतीक है जो एक दशक पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली था।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अबान अहमद कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
अबान अहमद, गैंगस्टर-राजनेता अतीक अहमद के छोटे बेटे थे। उनकी मौत झांसी-कानपुर हाईवे पर पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गाँव के निकट एक सड़क दुर्घटना में हुई, जिसमें उनके साथी सोनू की भी मौके पर मृत्यु हो गई और तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
अबान अहमद का अंतिम संस्कार कहाँ और कब होगा?
अबान अहमद को शनिवार, 9 अगस्त को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। दफनाने से पूर्व शव को कसारी-मसारी स्थित पुश्तैनी मकान की ज़मीन पर रखा जाएगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अली और उमर को पैरोल क्यों दी?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतीक अहमद के जेल में बंद बेटों अली और उमर को छोटे भाई अबान के जनाजे में शामिल होने के लिए पैरोल दी। अंतिम संस्कार के बाद दोनों को पुलिस हिरासत में उनकी संबंधित जेलों में वापस ले जाया जाएगा।
पैरोल पर रिहा अली और उमर पर क्या शर्तें लगाई गई हैं?
अदालत ने दोनों को किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित करने और मीडिया — जिसमें सोशल मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया शामिल हैं — से बातचीत करने पर पूरी तरह रोक लगाई है। वे केवल अंतिम संस्कार कराने वाले व्यक्ति, बुआ प्रवीन कुरैशी और भाई अहजम अहमद से संवाद कर सकते हैं।
अतीक अहमद के पुश्तैनी मकान का क्या हुआ है?
कसारी-मसारी स्थित अतीक अहमद का पुश्तैनी मकान अब पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुका है। परिवारिक परंपरा के अनुसार, परिवार के किसी सदस्य के निधन पर शव को कब्रिस्तान ले जाने से पहले इसी स्थान पर रखा जाता है — अबान से पहले एनकाउंटर में मारे गए उनके भाई असद का शव भी यहाँ लाया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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