खैबर में दोहरी हत्या के बाद जखाखेल कबीले का विद्रोह: टोरखम हाईवे जाम, हथियार उठाने का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के खैबर जिले में शुक्रवार देर शाम लांडी कोटल के सुल्तानखेल इलाके में दो रिश्तेदारों की गोली मारकर हत्या के बाद जखाखेल कबीले में भारी आक्रोश फैल गया। गुस्साए कबायलियों ने शनिवार को टोरखम हाईवे को पूरी तरह बंद कर दिया और आत्मरक्षा के लिए सशस्त्र गश्त शुरू करने का ऐलान किया। पुलिस के अनुसार, यह रमजान के बाद से इस तरह की तीसरी घटना है।
हत्याकांड का घटनाक्रम
पुलिस ने बताया कि मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने दोनों पीड़ितों को उनके घर के सामने गोली मार दी और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर पास के पहाड़ी इलाके में फरार हो गए। इससे पहले इसी क्षेत्र में अज्ञात बंदूकधारियों ने दो पुलिसकर्मियों और एक पुलिस अधिकारी के किशोर रिश्तेदार को निशाना बनाया था। यह ऐसे समय में आया है जब खैबर जिले में कानून-व्यवस्था पहले से ही नाजुक बनी हुई है।
कबायली विरोध और मांगें
कबायली बुजुर्ग मलिक अब्दुल्ला खान के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता, समाज सेवी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की कि अब सशस्त्र कबायली अपने क्षेत्रों में गश्त करेंगे और सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं संभालेंगे।
कबायली नेताओं ने कई कड़े फैसले लिए — इलाके में मोटरसाइकिल चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध, जखाखेल कबीले से जुड़े सभी सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का निर्देश, पोलियो टीकाकरण अभियान का बहिष्कार, और जखाखेल क्षेत्र के सभी सरकारी व निजी स्कूलों को बंद रखने की घोषणा शामिल है।
सुरक्षा बलों पर आरोप
कबायली बुजुर्गों ने सुरक्षा बलों द्वारा घरों पर की जा रही छापेमारी और सफाई अभियान के नाम पर निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना की। उनका आरोप है कि स्थानीय निवासी रात के समय हथियारों के साथ सड़कों पर खुलेआम गश्त करते हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था एजेंसियाँ उनकी गतिविधियों पर रोक लगाने में नाकाम रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक मजरिना और आसपास के क्षेत्रों में छिपे संदिग्धों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, वे किसी सरकारी अधिकारी से बातचीत नहीं करेंगे।
आम जनता पर असर
टोरखम हाईवे बंद होने से अफगान परिवारों की वापसी प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ा है और अफगानों को लेकर जा रहे कई वाहन रास्ते में फंस गए। गौरतलब है कि टोरखम सीमा चौकी पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच प्रमुख व्यापारिक और आवागमन मार्ग है, इसलिए यह अवरोध दोनों देशों के नागरिकों को प्रभावित करता है।
क्या होगा आगे
कबायली नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक क्षेत्र में स्थायी शांति बहाल नहीं होती और संदिग्धों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा। पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह घटनाक्रम खैबर पख्तूनख्वा में कबायली इलाकों में राज्य और स्थानीय समुदायों के बीच बढ़ते तनाव की एक और कड़ी है।