पाकिस्तान: मरदान गुरुद्वारे में सिख दंपती की हत्या, खैबर पख्तूनख्वा में अल्पसंख्यकों में दहशत
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मरदान जिले में स्थित एक गुरुद्वारे के भीतर 17 जून 2025 को एक बुजुर्ग सिख दंपती की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद प्रांत में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों में भय और असुरक्षा की गहरी भावना फैल गई है। पुलिस के अनुसार, मोटरसाइकिल पर सवार अज्ञात हमलावरों ने पूजा स्थल के अंदर घुसकर दंपती को निशाना बनाया और फरार हो गए।
घटनाक्रम: गुरुद्वारे में दिनदहाड़े हमला
पुलिस के बयान के अनुसार, 72 वर्षीय जगन्नाथ वंती और उनकी 69 वर्षीय पत्नी आशा वंती उस समय मरदान स्थित गुरुद्वारे में मौजूद थे, जब मोटरसाइकिल पर आए कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने उन पर गोलीबारी की। दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। हमलावर घटना को अंजाम देकर तत्काल फरार हो गए और अब तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं।
यह घटना मुहर्रम के पहले दिन हुई — वह अवसर जब पाकिस्तान में धार्मिक जुलूसों की सुरक्षा के लिए हजारों पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल तैनात किए जाते हैं। इस पृष्ठभूमि में हुई इस हत्या ने मरदान जिले की पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समुदाय की प्रतिक्रिया: 'कोई भी पूजा स्थल सुरक्षित नहीं'
पेशावर के वरिष्ठ सिख नागरिक साहिब सिंह ने कहा कि दिनदहाड़े हुई इस दोहरी हत्या ने पूरे समुदाय में दहशत फैला दी है। उन्होंने यूनियन ऑफ कैथोलिक एशियन न्यूज़ से बातचीत में कहा, 'दुर्भाग्य से आज कोई भी पूजा स्थल सुरक्षित महसूस नहीं होता।' साहिब सिंह ने इस हत्याकांड की पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से जाँच कराने तथा अल्पसंख्यक समुदायों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करने की माँग की।
प्रांतीय विधानसभा के हिंदू सदस्य सुरेश कुमार ने भी पुलिस से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की अपील की है।
मरदान में अल्पसंख्यकों की स्थिति
मरदान की कुल आबादी करीब 27 लाख है, जिसमें 99.5 प्रतिशत से अधिक लोग मुस्लिम हैं। समुदाय के नेताओं के अनुसार, इस जिले में लगभग 350 सिख, 1,300 हिंदू और करीब 7,500 ईसाई निवास करते हैं। सिख समुदाय के सूत्रों के अनुसार, हाल के वर्षों में खैबर पख्तूनख्वा में 25 से अधिक सिखों की हत्या की जा चुकी है, जिनमें से अधिकांश हमले पेशावर में हुए।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान तालिबान और कथित इस्लामिक स्टेट से जुड़े संगठनों सहित कई उग्रवादी गुट अल्पसंख्यक समुदायों को लक्षित करते रहे हैं। इन समूहों की कट्टरपंथी विचारधारा के तहत इन्हें हमलों का वैध निशाना माना जाता है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएँ
यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले अप्रैल 2025 में एक प्रमुख अल्पसंख्यक अधिकार संगठन वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (VOPM) ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सुक्कुर शहर में एक युवा हिंदू कारोबारी विशाल कुमार की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या की जानकारी दी थी। संगठन के अनुसार, यह हत्या खुलेआम और बेहद निर्ममता से की गई, जिससे स्थानीय अल्पसंख्यक समुदायों में भय का माहौल और गहरा हो गया।
गौरतलब है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हमलों का यह कोई पहला मामला नहीं है — मानवाधिकार संगठन लंबे समय से देश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते रहे हैं। मरदान की घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या पाकिस्तान में पूजा स्थल वास्तव में सुरक्षित हैं।
आगे क्या होगा
अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और हमलावर फरार हैं। समुदाय के नेताओं ने माँग की है कि जाँच स्वतंत्र और पारदर्शी हो तथा अल्पसंख्यक पूजा स्थलों पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यह मामला पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अधिकारों की व्यापक बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।