11 अगस्त 2026
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पाकिस्तान के गुरुद्वारे में सिख दंपति की गोली मारकर हत्या, BJP प्रवक्ता बोले — अंतरराष्ट्रीय समुदाय चुप न रहे

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पाकिस्तान के गुरुद्वारे में सिख दंपति की गोली मारकर हत्या, BJP प्रवक्ता बोले — अंतरराष्ट्रीय समुदाय चुप न रहे

सारांश

पाकिस्तान के मर्दान जिले में एक गुरुद्वारे के भीतर सिख दंपति जगन्नाथ और अस्मा वंती की गोली मारकर हत्या ने वैश्विक सिख समुदाय को झकझोर दिया है। BJP प्रवक्ता आरपी सिंह और SGPC ने कड़ी निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से चुप्पी तोड़ने की अपील की है।

मुख्य बातें

18 जून 2026 को पाकिस्तान के मर्दान जिले (खैबर पख्तूनख्वा) के एक गुरुद्वारे में सिख दंपति जगन्नाथ और अस्मा वंती की गोली मारकर हत्या की गई।
स्थानीय पुलिस के अनुसार दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई; घटना पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर दूर बाबू मोहल्ला में हुई।
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने एक्स पर पाकिस्तान सरकार से जवाब माँगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 'चयनात्मक मौन' न रखने की अपील की।
SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने इसे 'धार्मिक स्वतंत्रता पर गंभीर हमला' बताते हुए दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की माँग की।
अब तक किसी संगठन ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली ; पाकिस्तान पुलिस की जाँच जारी है।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मर्दान जिले स्थित एक गुरुद्वारे में 18 जून 2026 को सेवादार जगन्नाथ और उनकी पत्नी अस्मा वंती की गोली मारकर हत्या कर दी गई। स्थानीय पुलिस के अनुसार दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। यह घटना प्रांतीय राजधानी पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर दूर बाबू मोहल्ला इलाके में हुई, जैसा कि पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक डॉन ने अपनी रिपोर्ट में बताया।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार हमलावर गुरुद्वारे के परिसर में घुसे और धार्मिक सेवा में लगे दंपति को निशाना बनाया। अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है और जाँच जारी है। यह घटना उस समय और अधिक संवेदनशील हो जाती है क्योंकि पाकिस्तान में सिख समुदाय पहले से ही अत्यंत सीमित संख्या में रह गया है और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा लंबे समय से चिंता का विषय रही है।

BJP प्रवक्ता की कड़ी प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "पाकिस्तान एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है।" उन्होंने इस हत्या को केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि "पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी असुरक्षा, भय और उत्पीड़न की एक और भयावह याद" करार दिया।

सिंह ने लिखा, "मैं इस जघन्य घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ और शोक संतप्त परिवार तथा विश्वभर के सिख समुदाय के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ।" उन्होंने पाकिस्तान सरकार से माँग की कि दोषियों की तत्काल पहचान कर उन्हें कानून के कठघरे में लाया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि अल्पसंख्यक समुदायों व उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी आगाह किया कि "मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता कोई चुनिंदा सिद्धांत नहीं, बल्कि सार्वभौमिक मूल्य हैं" और जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है तब "चयनात्मक मौन स्वीकार्य नहीं है।"

SGPC की निंदा और माँग

बुधवार देर शाम जारी बयान में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने हत्या की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, "गुरुद्वारे के अंदर एक सिख दंपति की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर हमला है।" धामी ने कहा कि आरोपियों ने एक पवित्र धार्मिक संस्थान की मर्यादा का उल्लंघन किया है क्योंकि उन्होंने धार्मिक सेवा में लगे एक निर्दोष दंपति को निशाना बनाया।

SGPC प्रमुख ने पाकिस्तान सरकार से मामले की जाँच, दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी सजा की अपील की।

व्यापक संदर्भ और अल्पसंख्यक सुरक्षा का सवाल

गौरतलब है कि पाकिस्तान में सिख समुदाय की आबादी विभाजन के बाद से निरंतर घटती रही है और अनुमानतः कुछ हज़ार तक सिमट गई है। खैबर पख्तूनख्वा में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएँ पहले भी दर्ज हो चुकी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा का दावा करता रहा है। दुनिया भर के सिखों में इस घटना को लेकर तीव्र आक्रोश है और सोशल मीडिया पर विरोध की आवाज़ें उठ रही हैं।

क्या होगा आगे

पाकिस्तान पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। भारत और वैश्विक सिख संगठनों की ओर से पाकिस्तान सरकार पर दोषियों को सज़ा दिलाने और अल्पसंख्यक सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी गुरुद्वारों, मंदिरों और चर्चों पर हमले थमे नहीं हैं — यह विरोधाभास जवाबदेही की माँग करता है। BJP और SGPC की प्रतिक्रिया राजनीतिक रूप से अपेक्षित है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि भारत सरकार इसे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर किस ज़ोर से उठाती है। बिना ठोस कूटनीतिक दबाव के, ये निंदाएँ उसी 'चयनात्मक मौन' का हिस्सा बन जाती हैं जिसका विरोध आरपी सिंह खुद कर रहे हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान के गुरुद्वारे में किसकी हत्या हुई और कहाँ?
सिख सेवादार जगन्नाथ और उनकी पत्नी अस्मा वंती की हत्या पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मर्दान जिले के बाबू मोहल्ला स्थित एक गुरुद्वारे में हुई। यह स्थान पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है और स्थानीय पुलिस के अनुसार दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस घटना पर क्या कहा?
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने एक्स पर इस हत्या को 'पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी उत्पीड़न की भयावह याद' बताया। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 'चयनात्मक मौन' न रखने की अपील की।
SGPC ने इस मामले में क्या माँग की है?
SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने इस घटना को 'धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर हमला' बताया। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से मामले की जाँच, दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी सज़ा सुनिश्चित करने की अपील की है।
क्या पाकिस्तान में सिख अल्पसंख्यकों पर हमले पहले भी हुए हैं?
हाँ, पाकिस्तान में — विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा में — सिख और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएँ पहले भी दर्ज हो चुकी हैं। विभाजन के बाद से पाकिस्तान में सिख आबादी लगातार घटती रही है और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रही है।
इस हत्याकांड की जाँच का क्या स्तर है और आगे क्या होगा?
पाकिस्तान पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है और किसी संगठन ने हमले की ज़िम्मेदारी भी नहीं ली है। भारत और वैश्विक सिख संगठनों की ओर से पाकिस्तान पर दोषियों को सज़ा दिलाने और अल्पसंख्यक सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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