पाकिस्तान के गुरुद्वारे में सिख दंपति की गोली मारकर हत्या, BJP प्रवक्ता बोले — अंतरराष्ट्रीय समुदाय चुप न रहे
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मर्दान जिले स्थित एक गुरुद्वारे में 18 जून 2026 को सेवादार जगन्नाथ और उनकी पत्नी अस्मा वंती की गोली मारकर हत्या कर दी गई। स्थानीय पुलिस के अनुसार दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। यह घटना प्रांतीय राजधानी पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर दूर बाबू मोहल्ला इलाके में हुई, जैसा कि पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक डॉन ने अपनी रिपोर्ट में बताया।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार हमलावर गुरुद्वारे के परिसर में घुसे और धार्मिक सेवा में लगे दंपति को निशाना बनाया। अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है और जाँच जारी है। यह घटना उस समय और अधिक संवेदनशील हो जाती है क्योंकि पाकिस्तान में सिख समुदाय पहले से ही अत्यंत सीमित संख्या में रह गया है और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा लंबे समय से चिंता का विषय रही है।
BJP प्रवक्ता की कड़ी प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "पाकिस्तान एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है।" उन्होंने इस हत्या को केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि "पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी असुरक्षा, भय और उत्पीड़न की एक और भयावह याद" करार दिया।
सिंह ने लिखा, "मैं इस जघन्य घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ और शोक संतप्त परिवार तथा विश्वभर के सिख समुदाय के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ।" उन्होंने पाकिस्तान सरकार से माँग की कि दोषियों की तत्काल पहचान कर उन्हें कानून के कठघरे में लाया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि अल्पसंख्यक समुदायों व उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी आगाह किया कि "मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता कोई चुनिंदा सिद्धांत नहीं, बल्कि सार्वभौमिक मूल्य हैं" और जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है तब "चयनात्मक मौन स्वीकार्य नहीं है।"
SGPC की निंदा और माँग
बुधवार देर शाम जारी बयान में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने हत्या की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, "गुरुद्वारे के अंदर एक सिख दंपति की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर हमला है।" धामी ने कहा कि आरोपियों ने एक पवित्र धार्मिक संस्थान की मर्यादा का उल्लंघन किया है क्योंकि उन्होंने धार्मिक सेवा में लगे एक निर्दोष दंपति को निशाना बनाया।
SGPC प्रमुख ने पाकिस्तान सरकार से मामले की जाँच, दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी सजा की अपील की।
व्यापक संदर्भ और अल्पसंख्यक सुरक्षा का सवाल
गौरतलब है कि पाकिस्तान में सिख समुदाय की आबादी विभाजन के बाद से निरंतर घटती रही है और अनुमानतः कुछ हज़ार तक सिमट गई है। खैबर पख्तूनख्वा में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएँ पहले भी दर्ज हो चुकी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा का दावा करता रहा है। दुनिया भर के सिखों में इस घटना को लेकर तीव्र आक्रोश है और सोशल मीडिया पर विरोध की आवाज़ें उठ रही हैं।
क्या होगा आगे
पाकिस्तान पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। भारत और वैश्विक सिख संगठनों की ओर से पाकिस्तान सरकार पर दोषियों को सज़ा दिलाने और अल्पसंख्यक सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।