25 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस 9 जून: क्यों अभिलेख हैं लोकतंत्र और इतिहास की असली नींव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस 9 जून: क्यों अभिलेख हैं लोकतंत्र और इतिहास की असली नींव

सारांश

डायरी, खत और जमीन के कागजात — ये सिर्फ दस्तावेज नहीं, राष्ट्र की स्मृति हैं। 9 जून को अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस पर जानिए कैसे अभिलेख लोकतंत्र, इतिहास और पहचान की नींव हैं, और भारत में डिजिटलीकरण का अभियान इस विरासत को कैसे सुरक्षित कर रहा है।

मुख्य बातें

हर वर्ष 9 जून को अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस मनाया जाता है।
यह तिथि 9 जून 1948 को यूनेस्को के संरक्षण में ICA (इंटरनेशनल काउंसिल ऑन आर्काइव्स) की स्थापना की स्मृति में चुनी गई।
2004 में वियना सम्मेलन में माँग, 2007 में ICA की बैठक में आधिकारिक निर्णय।
भारत में सदियों पुराने दस्तावेजों के डिजिटलीकरण का अभियान जारी है।
बिहार अभिलेख भवन में मुगल काल, जमींदारी रिकॉर्ड और महात्मा गांधी के बिहार दौरे से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज संरक्षित हैं।
अभिलेख सरकारी जवाबदेही और लोकतांत्रिक पारदर्शिता के अपरिहार्य साधन हैं।

अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस हर वर्ष 9 जून को मनाया जाता है — एक ऐसा अवसर जो हमें याद दिलाता है कि डायरी के पन्ने, पुरखों के हस्तलिखित खत, जमीन के कागजात और स्कूल की मार्कशीट महज कागज नहीं, बल्कि किसी परिवार, समाज और राष्ट्र की सामूहिक स्मृति के अमिट स्तंभ हैं। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन आर्काइव्स (ICA) के नेतृत्व में यह दिवस वैश्विक स्तर पर अभिलेखों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित है। आज के तेज़ी से बदलते डिजिटल युग में पुराने दस्तावेजों की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक ज़रूरी हो गई है।

अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस का इतिहास

इस दिवस की नींव वर्ष 2004 में पड़ी, जब ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र से अभिलेखों को समर्पित एक विशेष दिवस घोषित करने की माँग की गई। 2007 में ICA की वार्षिक बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 9 जून को प्रतिवर्ष यह दिवस मनाया जाएगा। यह तिथि इसलिए चुनी गई क्योंकि 9 जून 1948 को यूनेस्को के संरक्षण में ICA की स्थापना हुई थी।

गौरतलब है कि मानव सभ्यता के हर दौर ने अपनी कहानी अभिलेखों में दर्ज की है — प्राचीन शिलालेखों से लेकर आधुनिक डिजिटल फाइलों तक। किसी भी देश के सामाजिक बदलाव, राजनीतिक निर्णय और सांस्कृतिक विरासत इन्हीं दस्तावेजों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचते हैं।

लोकतंत्र और सुशासन में अभिलेखों की भूमिका

अभिलेख केवल अतीत को सहेजने का साधन नहीं हैं — वे लोकतंत्र और सुशासन की भी अटूट कड़ी हैं। सरकारी निर्णयों के रिकॉर्ड, न्यायिक दस्तावेज, प्रशासनिक फाइलें और ऐतिहासिक प्रमाण पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं। यदि ये अभिलेख सुरक्षित नहीं रहे, तो इतिहास की अनेक महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ हमेशा के लिए लुप्त हो सकती हैं।

यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब सूचनाएँ डिजिटल माध्यमों पर तेज़ी से उत्पन्न और नष्ट होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सुव्यवस्थित अभिलेखागार के, भविष्य की पीढ़ियाँ आज के दौर को समझने में असमर्थ हो सकती हैं।

भारत में डिजिटलीकरण का अभियान

भारत में अभिलेखों के संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास जारी हैं। सदियों पुराने दस्तावेजों को डिजिटाइज़ करने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। राजाओं की रियासतों, ब्रिटिश काल की संपत्तियों और ऐतिहासिक भवनों से जुड़े दुर्लभ कागजात अब डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किए जा रहे हैं।

इस डिजिटलीकरण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि शोधकर्ताओं और आम नागरिकों को एक क्लिक पर महत्त्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध होगी। साथ ही, बार-बार भौतिक फाइलें खोलने से दस्तावेजों को होने वाली क्षति से भी बचाव होगा।

बिहार अभिलेख भवन: इतिहास का अनमोल खजाना

बिहार अभिलेख भवन देश के सबसे समृद्ध अभिलेखागारों में से एक है। यहाँ मुगल काल से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्र भारत के प्रारंभिक दशकों तक के हजारों महत्त्वपूर्ण दस्तावेज संरक्षित हैं। जमींदारी प्रथा से जुड़े रिकॉर्ड, टोडरमल की डायरी और महात्मा गांधी के बिहार आगमन से संबंधित दुर्लभ दस्तावेज यहाँ मौजूद हैं।

ये अभिलेख न केवल बिहार, बल्कि पूरे भारत के इतिहास को समझने में शोधकर्ताओं के लिए अमूल्य संसाधन हैं। आने वाले वर्षों में इन्हें भी डिजिटल रूप में सुलभ बनाने की दिशा में प्रयास तेज़ होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि डिजिटाइज़ किए गए दस्तावेज़ कितने सुलभ और खोजने योग्य बनाए जाते हैं — केवल स्कैन करना पर्याप्त नहीं है। बिहार अभिलेख भवन जैसे संस्थान अपार संभावनाएँ रखते हैं, फिर भी बजट और प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी अक्सर इन्हें शोधकर्ताओं की पहुँच से दूर रखती है। लोकतंत्र में अभिलेखों की भूमिका केवल ऐतिहासिक नहीं है — RTI के दौर में सरकारी रिकॉर्ड की उपलब्धता जवाबदेही का सीधा पैमाना है। बिना सुदृढ़ संरक्षण नीति और सार्वजनिक पहुँच के ढाँचे के, यह दिवस केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस हर वर्ष 9 जून को मनाया जाता है। यह तिथि 9 जून 1948 को यूनेस्को के संरक्षण में ICA (इंटरनेशनल काउंसिल ऑन आर्काइव्स) की स्थापना की स्मृति में चुनी गई थी। इसका उद्देश्य अभिलेखों के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक महत्व के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है।
ICA (इंटरनेशनल काउंसिल ऑन आर्काइव्स) क्या है?
ICA एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जो वैश्विक स्तर पर अभिलेखों के संरक्षण और प्रबंधन को बढ़ावा देती है। इसकी स्थापना 9 जून 1948 को यूनेस्को के संरक्षण में हुई थी। 2007 में इसी संस्था की वार्षिक बैठक में 9 जून को अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस घोषित करने का निर्णय लिया गया।
अभिलेख लोकतंत्र के लिए क्यों ज़रूरी हैं?
सरकारी निर्णयों के रिकॉर्ड, न्यायिक दस्तावेज और प्रशासनिक फाइलें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती हैं। यदि ये अभिलेख सुरक्षित नहीं रहे, तो नागरिकों का सरकार से जवाब माँगने का अधिकार कमज़ोर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुव्यवस्थित अभिलेखागार सुशासन की बुनियादी शर्त है।
भारत में ऐतिहासिक दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की क्या स्थिति है?
भारत में सदियों पुराने दस्तावेजों को डिजिटाइज़ करने का अभियान चल रहा है, जिसमें राजाओं की रियासतों और ब्रिटिश काल के दस्तावेज शामिल हैं। इससे शोधकर्ताओं और आम नागरिकों को ऑनलाइन पहुँच मिलेगी और भौतिक दस्तावेजों की बार-बार हैंडलिंग से होने वाली क्षति भी रुकेगी।
बिहार अभिलेख भवन में कौन-से महत्त्वपूर्ण दस्तावेज हैं?
बिहार अभिलेख भवन में मुगल काल से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तक के हजारों दस्तावेज संरक्षित हैं। इनमें जमींदारी प्रथा के रिकॉर्ड, टोडरमल की डायरी और महात्मा गांधी के बिहार आगमन से जुड़े दुर्लभ कागजात शामिल हैं। ये अभिलेख बिहार सहित पूरे देश के इतिहास को समझने में अमूल्य हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले