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ऑस्ट्राहिंद-2026: तिरुवनंतपुरम में भारत-ऑस्ट्रेलिया का 36 घंटे का संयुक्त सैन्य अभ्यास संपन्न

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ऑस्ट्राहिंद-2026: तिरुवनंतपुरम में भारत-ऑस्ट्रेलिया का 36 घंटे का संयुक्त सैन्य अभ्यास संपन्न

सारांश

ऑस्ट्राहिंद-2026 का 36 घंटे का अंतिम अभ्यास तिरुवनंतपुरम में संपन्न — जंगल, समुद्र और तट पर एक साथ अभियान, तीनों सेनाओं और नागरिक एजेंसियों की भागीदारी, और भारत-ऑस्ट्रेलिया की गहराती रणनीतिक साझेदारी का प्रत्यक्ष प्रमाण।

मुख्य बातें

भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ऑस्ट्राहिंद-2026 का समापन 30-31 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम, केरल में हुआ।
अंतिम चरण में 36 घंटे का संयुक्त सत्यापन अभ्यास आयोजित किया गया, जो जंगल, द्वीप और तटीय क्षेत्रों में एक साथ चला।
अभ्यास संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय-6 के तहत किया गया, जिसमें आतंकवाद-रोधी और आपदा राहत परिदृश्यों पर विशेष ध्यान दिया गया।
भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह प्राधिकरण और केरल अग्निशमन एवं बचाव सेवाएँ — सभी ने सहभागिता की।
अभ्यास के पर्यवेक्षकों में मेजर जनरल मैट बुर (ऑस्ट्रेलिया), मेजर जनरल कपिल राणा (भारत, 54वीं इन्फैंट्री डिवीजन) और कमोडोर एजे डाउलिंग (न्यूजीलैंड के रक्षा अताशे) शामिल रहे।

भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ऑस्ट्राहिंद-2026 का समापन 30 और 31 अक्टूबर 2026 को केरल के तिरुवनंतपुरम में 36 घंटे के गहन संयुक्त सत्यापन अभ्यास के साथ हुआ। इस अभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं ने जंगल, समुद्री द्वीप और चुनौतीपूर्ण तटीय इलाकों में मिलकर विभिन्न सैन्य अभियानों को अंजाम दिया, जिससे आपसी तालमेल और युद्धक तैयारियों की परख हुई।

अभ्यास का उद्देश्य और संरचना

यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय-6 के तहत आयोजित किया गया। इसका मुख्य लक्ष्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त अभियानों की क्षमता, परस्पर समन्वय और विपरीत परिस्थितियों में एकजुट होकर काम करने की तैयारी को परखना था। भारतीय सेना और ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल के जवानों के साथ-साथ भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह प्राधिकरण और केरल अग्निशमन एवं बचाव सेवाएँ भी इस अभ्यास में सहभागी रहीं।

मुख्य अभियान और परिदृश्य

36 घंटे के इस अभ्यास में सैनिकों ने तीन अलग-अलग भौगोलिक परिवेश — घने जंगल, समुद्र से घिरे द्वीप और तटीय क्षेत्र — में एक साथ अभियान चलाए। समुद्री और हवाई मार्ग से सैनिकों को निर्धारित स्थानों पर उतारने, समुद्र तट पर सुरक्षित मोर्चा बनाने और बंदरगाह की महत्वपूर्ण सुविधाओं को नियंत्रण में रखने का अभ्यास किया गया। इसके अलावा घायल सैनिकों की सुरक्षित निकासी, आपदा राहत अभियान और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा जैसे परिदृश्यों पर भी काम हुआ।

गौरतलब है कि अभ्यास के दौरान आतंकवाद और उग्रवाद-रोधी अभियानों पर विशेष ध्यान दिया गया। थल, जल और वायु — तीनों मोर्चों पर उपलब्ध संसाधनों के समन्वित उपयोग का प्रदर्शन इस अभ्यास की एक प्रमुख विशेषता रही।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

इस संयुक्त सत्यापन अभ्यास को ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल के मेजर जनरल मैट बुर, भारतीय सेना की 54वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल कपिल राणा और भारत एवं ऑस्ट्रेलिया में न्यूजीलैंड के रक्षा अताशे कमोडोर एजे डाउलिंग ने देखा। इन वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति इस अभ्यास के कूटनीतिक और रणनीतिक महत्व को रेखांकित करती है।

रक्षा सहयोग पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारत और ऑस्ट्रेलिया अपने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में और मज़बूत कर रहे हैं। ऑस्ट्राहिंद श्रृंखला का यह संस्करण बहु-एजेंसी समन्वय के नए आयाम जोड़ता है — जो केवल दो सेनाओं के बीच सहयोग से आगे बढ़कर नागरिक आपातकालीन सेवाओं को भी एकीकृत करता है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ऐसे संयुक्त अभ्यासों की गहराई और आवृत्ति बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसमें नागरिक एजेंसियों को सैन्य ढाँचे में एकीकृत किया गया, जो पिछले संयुक्त अभ्यासों में कम देखने को मिला था; दूसरा, न्यूजीलैंड के रक्षा अताशे की उपस्थिति यह संकेत देती है कि यह द्विपक्षीय अभ्यास धीरे-धीरे क्वाड और इंडो-पैसिफिक भागीदारी के व्यापक ढाँचे से जुड़ रहा है। भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच 2020 में हस्ताक्षरित 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के बाद रक्षा सहयोग की गति तेज़ हुई है, और इस तरह के बहु-डोमेन अभ्यास उसी रणनीतिक दिशा की अगली कड़ी हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि ये अभ्यास केवल युद्धाभ्यास नहीं, बल्कि दो देशों की सैन्य प्रणालियों, संचार प्रोटोकॉल और कमांड संस्कृति को एक-दूसरे के अनुकूल बनाने की दीर्घकालिक प्रक्रिया है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑस्ट्राहिंद-2026 सैन्य अभ्यास क्या है?
ऑस्ट्राहिंद-2026 भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आयोजित वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास श्रृंखला का 2026 संस्करण है, जो केरल के तिरुवनंतपुरम में संपन्न हुआ। इसमें 36 घंटे का अंतिम सत्यापन अभ्यास 30-31 अक्टूबर को आयोजित किया गया, जिसमें थल, जल और वायु तीनों मोर्चों पर संयुक्त अभियान चलाए गए।
इस अभ्यास में किन-किन बलों ने भाग लिया?
भारतीय सेना और ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल के अतिरिक्त, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह प्राधिकरण और केरल अग्निशमन एवं बचाव सेवाओं ने भी इस अभ्यास में सक्रिय भूमिका निभाई। यह बहु-एजेंसी भागीदारी इस संस्करण की विशेष पहचान रही।
अभ्यास में किन परिदृश्यों का अभ्यास किया गया?
अभ्यास में समुद्री और हवाई मार्ग से सैनिकों की तैनाती, तटीय क्षेत्र पर नियंत्रण, बंदरगाह सुविधाओं की सुरक्षा, घायल सैनिकों की निकासी, आपदा राहत और आतंकवाद-रोधी अभियान शामिल थे। ये परिदृश्य जंगल, समुद्री द्वीप और तटीय — तीनों भौगोलिक परिवेशों में एक साथ चलाए गए।
अभ्यास की निगरानी किन अधिकारियों ने की?
अभ्यास की निगरानी ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल के मेजर जनरल मैट बुर, भारतीय सेना की 54वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल कपिल राणा, और भारत व ऑस्ट्रेलिया में न्यूजीलैंड के रक्षा अताशे कमोडोर एजे डाउलिंग ने की।
भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग के लिए यह अभ्यास क्यों महत्वपूर्ण है?
यह अभ्यास दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को व्यावहारिक सैन्य तैयारी में बदलने का एक ठोस प्रयास है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय-6 के तहत इसका आयोजन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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