15 सितंबर 2026
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ऑस्ट्रेलियाई कॉक्लियर तकनीक से भारतीय बच्चों को नई सुनवाई, उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने दिल्ली क्लिनिक का दौरा किया

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ऑस्ट्रेलियाई कॉक्लियर तकनीक से भारतीय बच्चों को नई सुनवाई, उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने दिल्ली क्लिनिक का दौरा किया

सारांश

ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन का दिल्ली के ICHF स्फियर क्लिनिक दौरा सिर्फ शिष्टाचार भेंट नहीं था — यह दर्शाता है कि ऑस्ट्रेलिया में विकसित कॉक्लियर इम्प्लांट तकनीक भारत के श्रवण बाधित बच्चों को आवाज़, शिक्षा और आत्मनिर्भरता दे रही है।

मुख्य बातें

ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आई कैन हियर फाउंडेशन के स्फियर क्लिनिक का दौरा किया।
दौरे में कॉक्लियर इम्प्लांट मैपिंग और पुनर्वास सेवाओं का लाइव प्रदर्शन किया गया।
यह दौरा अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह (21–27 सितंबर) और अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस (23 सितंबर) से पहले हुआ।
आई कैन हियर फाउंडेशन पिछले एक दशक से भारत में श्रवण हानि के निदान, उपचार और पुनर्वास में सक्रिय है।
ऑस्ट्रेलियाई कंपनी कोक्लियर (Cochlear) की तकनीक भारत में श्रवण बाधित बच्चों को संचार, शिक्षा और समाज से जोड़ने में मदद कर रही है।

भारत में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आई कैन हियर फाउंडेशन (ICHF) के स्फियर क्लिनिक का दौरा किया, जहाँ उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से देखा कि ऑस्ट्रेलिया में विकसित कॉक्लियर इम्प्लांट तकनीक किस प्रकार भारत के श्रवण बाधित बच्चों के जीवन को बदल रही है। यह दौरा अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह (21–27 सितंबर) और अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस (23 सितंबर) से ठीक पहले हुआ, जिससे इसका प्रतीकात्मक महत्व और भी बढ़ जाता है।

दौरे का उद्देश्य और मुख्य गतिविधियाँ

उच्चायुक्त ग्रीन ने क्लिनिक में उन बच्चों और व्यक्तियों से सीधे संवाद किया जिन्हें फाउंडेशन की सेवाओं से लाभ हुआ है। उन्होंने कॉक्लियर इम्प्लांट मैपिंग और पुनर्वास सेवाओं के लाइव प्रदर्शन भी देखे। लाभार्थियों ने अपनी निजी कहानियाँ साझा कीं, जिनमें बताया कि श्रवण तकनीक तक पहुँच और निरंतर सहायता ने उनके दैनिक जीवन में किस हद तक परिवर्तन लाया है।

इस अवसर पर उच्चायुक्त ने कहा कि कॉक्लियर इम्प्लांट तकनीक का बच्चों और परिवारों पर पड़ रहा जीवन-परिवर्तनकारी प्रभाव देखकर प्रेरणा मिलती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऑस्ट्रेलियाई कंपनी कोक्लियर (Cochlear) की तकनीक भारत में श्रवण बाधित बच्चों को उनके आसपास की दुनिया से जोड़ने में सहायक बन रही है।

आई कैन हियर फाउंडेशन का एक दशक का सफर

आई कैन हियर फाउंडेशन पिछले एक दशक से भारत में श्रवण हानि के क्षेत्र में सक्रिय है। फाउंडेशन का कार्य जागरूकता बढ़ाने से शुरू होकर, शीघ्र निदान, श्रवण यंत्र और कॉक्लियर इम्प्लांट प्रदान करने, तथा परिवारों को दीर्घकालिक पुनर्वास सहायता देने तक फैला हुआ है।

फाउंडेशन की ओर से कहा गया कि श्रवण हानि एक आम, परंतु अक्सर अनदेखी रह जाने वाली विकलांगता है। भारत में इसके निदान और उपचार में देरी के कई कारण हैं — इसका व्यक्तियों और परिवारों पर शैक्षिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आर्थिक रूप से गहरा असर पड़ता है।

तकनीक का व्यापक सामाजिक प्रभाव

फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के अनुसार, श्रवण समाधानों तक पहुँच का अर्थ केवल आवाज़ सुन पाना नहीं है — यह संचार, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और समाज में पूर्ण भागीदारी की क्षमता से सीधे जुड़ा है। उन्नत तकनीक, विशेषज्ञ नैदानिक देखभाल और दीर्घकालिक पुनर्वास सहायता को एक साथ लाकर फाउंडेशन ने कई बच्चों को जीवन-बदलने वाले परिणाम दिलाए हैं।

गौरतलब है कि भारत में श्रवण हानि से पीड़ित बच्चों की संख्या उल्लेखनीय है, और प्रारंभिक हस्तक्षेप के अभाव में इन बच्चों का भाषाई एवं सामाजिक विकास बाधित होता है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत-ऑस्ट्रेलिया स्वास्थ्य सहयोग को नई दिशा मिल रही है।

भारत-ऑस्ट्रेलिया स्वास्थ्य साझेदारी का संदेश

इस यात्रा ने स्वास्थ्य सेवा में ऑस्ट्रेलियाई नवाचार के वास्तविक ज़मीनी प्रभाव को रेखांकित किया। उच्चायुक्त ग्रीन के इस दौरे को फाउंडेशन ने अपने उद्देश्य को और आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण बताया। फाउंडेशन की टीम ने कहा कि इस यात्रा से उनके बच्चों और परिवारों की आवाज़ पहले से कहीं अधिक बुलंद होगी।

आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह के दौरान इस साझेदारी और इसके परिणामों को और अधिक उजागर किए जाने की उम्मीद है, जिससे भारत में श्रवण हानि के प्रति जागरूकता और बढ़ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु असली प्रश्न यह है कि भारत में श्रवण हानि से पीड़ित लाखों बच्चों तक यह तकनीक कितनी पहुँच पा रही है — क्योंकि कॉक्लियर इम्प्लांट की लागत अधिकांश भारतीय परिवारों की पहुँच से बाहर है। फाउंडेशन का एक दशक का कार्य सराहनीय है, लेकिन स्केल की चुनौती अभी भी बड़ी है। भारत-ऑस्ट्रेलिया स्वास्थ्य साझेदारी तभी सार्थक होगी जब तकनीकी सहयोग सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में एकीकृत हो और सब्सिडी या बीमा कवरेज के ज़रिये आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों तक पहुँचे।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आई कैन हियर फाउंडेशन क्या है और यह क्या काम करती है?
आई कैन हियर फाउंडेशन (ICHF) भारत में श्रवण हानि के क्षेत्र में काम करने वाली एक संस्था है जो पिछले एक दशक से जागरूकता, शीघ्र निदान, श्रवण यंत्र, कॉक्लियर इम्प्लांट और दीर्घकालिक पुनर्वास सहायता प्रदान करती है। इसका स्फियर क्लिनिक नई दिल्ली में स्थित है।
कॉक्लियर इम्प्लांट तकनीक बच्चों की कैसे मदद करती है?
कॉक्लियर इम्प्लांट एक शल्य-चिकित्सा द्वारा लगाया जाने वाला श्रवण उपकरण है जो गंभीर श्रवण हानि वाले बच्चों को ध्वनि सुनने में सक्षम बनाता है। इससे बच्चे संवाद कर पाते हैं, शिक्षा में भाग ले सकते हैं और सामाजिक जीवन में शामिल हो सकते हैं।
ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने दिल्ली क्लिनिक का दौरा क्यों किया?
उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने 15 सितंबर 2026 को ICHF के स्फियर क्लिनिक का दौरा यह रेखांकित करने के लिए किया कि ऑस्ट्रेलिया में विकसित कॉक्लियर इम्प्लांट तकनीक भारत में श्रवण बाधित बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह दौरा अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह (21–27 सितंबर) से पहले हुआ।
अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह और सांकेतिक भाषा दिवस कब मनाया जाता है?
अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह प्रत्येक वर्ष 21 से 27 सितंबर के बीच मनाया जाता है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 23 सितंबर को मनाया जाता है। ये दोनों आयोजन वैश्विक स्तर पर श्रवण बाधित समुदाय के अधिकारों और समावेश पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
भारत में श्रवण हानि की समस्या कितनी बड़ी है?
फाउंडेशन के अनुसार, भारत में श्रवण हानि एक आम लेकिन अक्सर अनदेखी रहने वाली विकलांगता है। समय पर निदान और उपचार न होने के कारण इसका बच्चों और उनके परिवारों पर शैक्षिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आर्थिक रूप से गहरा प्रभाव पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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