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ऑटो-PLI योजना में ₹44,326 करोड़ का निवेश, लक्ष्य से आगे; पश्चिम बंगाल में 463 ईवी चार्जिंग स्टेशन चालू

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ऑटो-PLI योजना में ₹44,326 करोड़ का निवेश, लक्ष्य से आगे; पश्चिम बंगाल में 463 ईवी चार्जिंग स्टेशन चालू

सारांश

ऑटो-PLI योजना ने समय से पहले ₹44,326 करोड़ का निवेश जुटाकर ₹42,500 करोड़ का लक्ष्य पार किया। पश्चिम बंगाल में 463 ईवी चार्जिंग स्टेशन चालू, लेकिन नेटवर्क की पर्याप्तता का कोई आकलन नहीं। पीएम ई-ड्राइव के तहत राज्य को अब तक कोई राशि जारी नहीं।

मुख्य बातें

ऑटो- PLI योजना ने 31 मार्च 2026 तक ₹44,326 करोड़ का निवेश आकर्षित किया — मार्च 2027 के ₹42,500 करोड़ के लक्ष्य से पहले ही अधिक।
योजना 23 सितंबर 2021 को ₹25,938 करोड़ के बजटीय प्रावधान के साथ शुरू हुई थी।
फेम-II के तहत पश्चिम बंगाल में 482 में से 463 ईवी चार्जिंग स्टेशन 1 जुलाई 2026 तक चालू।
मंत्रालय ने माना कि पश्चिम बंगाल में चार्जिंग नेटवर्क की पर्याप्तता का कोई औपचारिक आकलन नहीं हुआ।
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत पश्चिम बंगाल को अब तक कोई वित्तीय सहायता जारी नहीं ।
ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना लाइसेंस-मुक्त गतिविधि — निजी व सरकारी, दोनों बिना अनुमति के लगा सकते हैं।

भारी उद्योग मंत्रालय ने 28 जुलाई 2026 को संसद में जानकारी दी कि ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना ने 31 मार्च 2026 तक ₹44,326 करोड़ का संचयी निवेश आकर्षित किया है — जो मार्च 2027 तक निर्धारित ₹42,500 करोड़ के लक्ष्य से पहले ही पार हो चुका है। साथ ही, पश्चिम बंगाल में 1 जुलाई 2026 तक 463 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन चालू हो चुके हैं।

ऑटो-PLI योजना: लक्ष्य से आगे निवेश

यह PLI योजना 23 सितंबर 2021 को ₹25,938 करोड़ के बजटीय प्रावधान के साथ शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (AAT) उत्पादों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक ऑटोमोटिव विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। मंत्रालय के अनुसार, योजना के तहत चयनित कंपनियों ने निर्धारित समय-सीमा से पहले ही लक्ष्य को पार कर लिया है, जो देश में उन्नत ऑटोमोबाइल तकनीक के विनिर्माण को नई गति देने का संकेत है।

पश्चिम बंगाल में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति

फेम-II योजना के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को पश्चिम बंगाल में 482 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की मंजूरी दी गई थी। इनमें से 463 स्टेशन 1 जुलाई 2026 तक चालू हो चुके हैं। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राज्य में मौजूदा चार्जिंग नेटवर्क पर्याप्त है या नहीं, इसका कोई औपचारिक आकलन अब तक नहीं किया गया है।

मथुरापुर और दक्षिण 24 परगना के लिए प्रस्ताव

मंत्रालय ने यह भी बताया कि पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में मथुरापुर के लिए कोई ईवी चार्जिंग स्टेशन शामिल नहीं है। वहीं, दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग, बक्खाली, डायमंड हार्बर, काकद्वीप और नामखाना में पाँच सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत अब तक पश्चिम बंगाल को कोई वित्तीय सहायता जारी नहीं की गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर ईवी चार्जिंग के लिए बजट प्रावधान

देश भर में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए फेम-II योजना के तहत ₹912.50 करोड़ और पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह राशि पूरे देश के लिए है और किसी एक राज्य के लिए अलग से आवंटित नहीं होती।

लाइसेंस-मुक्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

भारी उद्योग मंत्रालय ने दोहराया कि ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना एक लाइसेंस-मुक्त गतिविधि है। इसका अर्थ है कि सरकारी एजेंसियाँ, निजी कंपनियाँ और अन्य संस्थान बिना किसी लाइसेंस के देश में कहीं भी चार्जिंग स्टेशन स्थापित, संचालित और उनका रखरखाव कर सकते हैं। यह नीतिगत स्पष्टता निजी निवेश को और प्रोत्साहित कर सकती है। आने वाले समय में पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता जारी होने और नए प्रस्तावों की स्वीकृति से ईवी नेटवर्क के और विस्तार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इस निवेश ने कितने सत्यापन-योग्य रोज़गार और घरेलू मूल्य संवर्धन पैदा किए — जिसका उल्लेख मंत्रालय के बयान में नहीं है। पश्चिम बंगाल में 463 चार्जिंग स्टेशन चालू होना प्रगति है, पर मंत्रालय का यह स्वीकारना कि नेटवर्क की पर्याप्तता का कोई औपचारिक आकलन नहीं हुआ, नीतिगत निगरानी की एक बड़ी खामी उजागर करता है। पीएम ई-ड्राइव के तहत पश्चिम बंगाल को अब तक एक भी रुपया न मिलना दर्शाता है कि केंद्र-राज्य समन्वय अभी भी ईवी रोलआउट की सबसे कमज़ोर कड़ी है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑटो-PLI योजना में कितना निवेश हुआ है और लक्ष्य क्या था?
भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार, ऑटो-PLI योजना ने 31 मार्च 2026 तक ₹44,326 करोड़ का संचयी निवेश आकर्षित किया है, जो मार्च 2027 तक निर्धारित ₹42,500 करोड़ के लक्ष्य से अधिक है। यह योजना 23 सितंबर 2021 को ₹25,938 करोड़ के बजटीय प्रावधान के साथ शुरू की गई थी।
पश्चिम बंगाल में कितने ईवी चार्जिंग स्टेशन चालू हैं?
फेम-II योजना के तहत IOCL, BPCL और HPCL द्वारा पश्चिम बंगाल में 482 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों को मंजूरी दी गई थी, जिनमें से 463 स्टेशन 1 जुलाई 2026 तक चालू हो चुके हैं।
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत पश्चिम बंगाल को कितनी राशि मिली है?
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत अब तक पश्चिम बंगाल को कोई वित्तीय सहायता जारी नहीं की गई है। हालांकि, दक्षिण 24 परगना जिले के पाँच स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन के प्रस्ताव दिए गए हैं।
क्या भारत में ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए लाइसेंस जरूरी है?
नहीं, भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना एक लाइसेंस-मुक्त गतिविधि है। सरकारी एजेंसियाँ, निजी कंपनियाँ और अन्य संस्थान बिना किसी लाइसेंस के देश में कहीं भी चार्जिंग स्टेशन स्थापित, संचालित और उनका रखरखाव कर सकते हैं।
फेम-II और पीएम ई-ड्राइव योजना के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कितना बजट है?
देश भर में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फेम-II योजना के तहत ₹912.50 करोड़ और पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह राशि पूरे देश के लिए है और किसी एक राज्य के लिए अलग से आवंटित नहीं होती।
राष्ट्र प्रेस
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