क्या आयुर्वेद का 'अमृत' घी हड्डियों को मजबूत और तनाव को कम करने में सहायक है?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आयुर्वेद में घी को 'अमृत' कहा गया है, क्योंकि यह शरीर, मन और आत्मा के लिए अत्यंत पौष्टिक और लाभकारी माना जाता है। चाहे मिठाई हो या नमकीन, घी का सेवन करने से तन-मन दोनों को कई लाभ प्राप्त होते हैं।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, घी केवल स्वाद बढ़ाने वाला तत्व नहीं है, बल्कि यह सेहत के लिए अमृत समान है। पीढ़ियों से भारतीय घरों में प्रचलित देसी घी आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके भीतर प्राकृतिक गुणों की भरपूरता है, जो आधुनिक जीवन की कई चुनौतियों का समाधान प्रदान करता है।
आयुर्वेद के अनुसार, सही समय, सही मात्रा और सही व्यक्ति के लिए घी अमृत है। इसको अपनाने से आप प्राकृतिक तरीके से मजबूत हड्डियां, बेहतर इम्युनिटी और तनाव में कमी ला सकते हैं। साथ ही एक चमकदार चेहरा भी प्राप्त किया जा सकता है।
आयुर्वेद में बताया गया है कि घी पाचन अग्नि को तेज करता है, आंतों को चिकना रखता है और पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है। यह इम्युनिटी को मजबूती प्रदान करता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण से बचाव होता है। घी में उपस्थित विटामिन ए, डी, ई और के हड्डियों को मजबूत बनाते हैं, जोड़ों की सूजन और दर्द को कम करते हैं। साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से भी बचाव में सहायक होते हैं।
आज की व्यस्त और अनियमित दिनचर्या में तनाव और चिंता आम बात बन चुकी है। इस स्थिति में घी दिमाग को शांत करता है, नींद में सुधार लाता है और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। साथ ही घी त्वचा और बालों के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इसके नियमित सेवन से त्वचा नरम, चमकदार और युवा बनी रहती है। यह ड्राई स्किन, झुर्रियों और दाग-धब्बों को कम करता है। घी को बाहरी रूप से लगाने पर भी त्वचा को गहरा पोषण मिलता है। घी में सत्वगुण होने के कारण यह सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और शरीर से गंदगी को बाहर निकालता है।
आयुर्वेदाचार्य सुझाव देते हैं कि रोजाना सुबह खाली पेट गुनगुने पानी या दूध में एक चम्मच घी मिलाकर पिएं। घी को रोटी, सब्जी, दाल या खिचड़ी में थोड़ा डालकर भी सेवन किया जा सकता है। रात को सोने से पहले गर्म दूध में घी मिलाकर पिएं, यह तनाव को कम करता है और अच्छी नींद लाता है।
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, घी की मात्रा संतुलित रखनी चाहिए, सामान्य व्यक्ति के लिए 1-2 चम्मच घी रोजाना पर्याप्त है। इससे अधिक मात्रा में सेवन करने से कफ बढ़ सकता है। देसी गाय का घी सबसे उत्तम माना जाता है।