ईडी ने जेल से निकलते ही आजम खान को हिरासत में लिया, वकीलों ने कानूनी प्रक्रिया उल्लंघन का आरोप लगाया
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को 31 अक्टूबर को रामपुर जेल से रिहाई मिलते ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया। उनके वकीलों ने इस पूरी कार्रवाई पर गंभीर कानूनी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों ने न तो अपना परिचय दिया, न हिरासत का कारण बताया और न ही सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किया।
मुख्य घटनाक्रम
वकीलों के अनुसार, जैसे ही आजम खान जेल के बाहर आए, कुछ व्यक्ति उन्हें अपने साथ ले गए। उन व्यक्तियों ने न तो कोई परिचय पत्र दिखाया और न ही यह स्पष्ट किया कि वे किस एजेंसी से संबंधित हैं। वकीलों ने बताया कि शुरुआत में उन्हें यह भी पता नहीं चल पाया कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी ईडी के थे या किसी अन्य एजेंसी के।
उल्लेखनीय है कि आजम खान के पुत्र अब्दुल्ला आजम रिहा होकर घर की ओर चले गए, जबकि आजम खान को जेल के बाहर से ही किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। वकीलों को भी उनसे मिलने का अवसर नहीं दिया गया।
वकीलों के आरोप
वकीलों ने कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लंघन बताया। उनका कहना है कि किसी भी गिरफ्तारी के दौरान संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार की जानकारी देना अनिवार्य है, साथ ही परिवार को भी नियमानुसार सूचित किया जाना चाहिए। एक वकील ने कहा, 'अधिकारियों को कम से कम यह स्पष्ट करना चाहिए था कि वे किस एजेंसी से हैं, उनका पद क्या है और कार्रवाई का आधार क्या है।'
वकीलों ने यह भी कहा कि उन्होंने मौजूद अधिकारियों से अनुरोध किया था कि आजम खान को कम से कम अपनी बीमार पत्नी से मिलने का अवसर दिया जाए, जो लंबे समय से उनसे नहीं मिल पाई हैं। उनकी पत्नी के शरीर में स्टेंट लगा हुआ है और कोरोना काल के दौरान उन्हें गंभीर फंगल संक्रमण हो गया था, जिसके चलते उन्हें वेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यह अनुरोध भी अनसुना कर दिया गया।
कानूनी पक्ष और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश
वकीलों ने दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। इनमें गिरफ्तार व्यक्ति को आरोप की जानकारी देना, परिवार को सूचित करना और वकील से मिलने का अधिकार देना शामिल है। वकीलों के अनुसार, इस मामले में इनमें से किसी भी निर्देश का पालन नहीं किया गया।
एक वकील ने यह भी कहा कि अधिकारियों को पता था कि अगले दिन रविवार है, फिर भी उन्होंने उसी दिन इस प्रकार की कार्रवाई की। उनका कहना है कि यह समय भी जानबूझकर चुना गया प्रतीत होता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
आजम खान कई वर्षों तक समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और सांसद तथा विधायक के रूप में कार्य कर चुके हैं। वकीलों ने कहा कि पिछले छह-सात वर्षों से उन्होंने इस मामले से जुड़ी कानूनी लड़ाई को करीब से देखा है और उनके अनुसार, एक व्यक्ति को दबाने के लिए लगातार परिस्थितियाँ पैदा की जाती रही हैं। यह आरोप उन्होंने एक वकील की हैसियत से नहीं, बल्कि एक नागरिक की भावना से लगाया।
आगे क्या होगा
वकीलों ने संकेत दिया कि वे इस हिरासत की कानूनी वैधता को न्यायालय में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं। ईडी की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर सकता है, विशेषकर तब जब समाजवादी पार्टी पहले से ही इस कार्रवाई को राजनीतिक उत्पीड़न बता रही है।