पेपर लीक केस में जेल में बंद बाबूलाल कटारा का RPSC सदस्य पद का कार्यकाल समाप्त, बर्खास्तगी अधूरी रही
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा का कार्यकाल 15 अक्टूबर 2026 को जेल में रहते हुए ही समाप्त हो गया। सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा 2022 सहित कई पेपर लीक मामलों में आरोपी कटारा को पद से औपचारिक रूप से बर्खास्त करने की प्रक्रिया उनका कार्यकाल खत्म होने से पहले पूरी नहीं हो सकी, जिससे राज्य सरकार की यह कोशिश अधूरी रह गई।
मुख्य घटनाक्रम
स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने 18 अप्रैल 2023 को बाबूलाल कटारा, आयोग के बर्खास्त ड्राइवर गोपाल सिंह और विजय कटारा को सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा 2022 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद जाँचकर्ताओं ने उन्हें पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 के पेपर लीक मामले से भी जोड़ा।
जनवरी 2024 में तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने कटारा को निलंबित कर दिया था। इसके अतिरिक्त, एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उनकी संपत्तियों की भी जाँच की थी।
बर्खास्तगी प्रक्रिया क्यों अधूरी रही
आरपीएससी से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रपति तय आधारों — जैसे अयोग्यता, दिवालियापन, या शारीरिक-मानसिक अक्षमता — पर आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को पद से हटा सकते हैं। संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत गलत व्यवहार के आरोप में सर्वोच्च न्यायालय से जाँच कराने का भी प्रावधान है।
राज्य सरकार ने कटारा को हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति के पास भेजी थी, परंतु यह प्रक्रिया उनके कार्यकाल समाप्त होने से पहले पूरी नहीं हो सकी। इस प्रकार बर्खास्तगी का कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ और कार्यकाल स्वतः समाप्त हो गया।
RPSC में रिक्त पदों की स्थिति
बुधवार को कटारा के कार्यकाल की समाप्ति के साथ ही RPSC में रिक्त सदस्य पदों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। गौरतलब है कि जून 2026 से आयोग में कोई स्थायी अध्यक्ष नहीं है। फिलहाल सदस्य लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह के पास अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार है।
आयोग के कार्यरत सदस्यों में प्रोफेसर अयूब खान, हेमंत प्रियदर्शी, प्रोफेसर दीपक शर्मा, प्रोफेसर सुशील बिसू और प्रोफेसर संतोष आनंद शामिल हैं।
आम जनता और भर्ती प्रक्रिया पर असर
रिक्त पदों की बढ़ती संख्या आयोग की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल खड़े कर रही है। राजस्थान में पहले से ही पेपर लीक मामलों से प्रभावित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के लंबित मामलों की प्रगति पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में युवाओं के बीच सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पहले से ही चुनौती में है।
आगे क्या होगा
कटारा के विरुद्ध न्यायिक कार्यवाही अभी भी जारी है, क्योंकि पेपर लीक मामलों में उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल रहा है। राज्य सरकार के सामने अब RPSC में रिक्त पदों को भरने और आयोग की कार्यक्षमता बहाल करने की चुनौती है, ताकि भर्ती परीक्षाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित हो सके।