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बाबूलाल मरांडी का आरोप: कांग्रेस-झामुमो आदिवासी समाज को बांटने की राजनीति कर रहे हैं

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बाबूलाल मरांडी का आरोप: कांग्रेस-झामुमो आदिवासी समाज को बांटने की राजनीति कर रहे हैं

सारांश

बाबूलाल मरांडी ने रांची में कांग्रेस और झामुमो पर आदिवासी समाज को बांटने का आरोप लगाया। दिल्ली में आयोजित आदिवासी समागम के विरोध को उन्होंने इन दलों का आदिवासी-विरोधी चेहरा बताया और सरना, सनातन व हिंदू को एक साझी जड़ से जोड़ा।

मुख्य बातें

बाबूलाल मरांडी ने 24 मई 2026 को रांची में कांग्रेस और झामुमो पर आदिवासी समाज को विभाजित करने की राजनीति का आरोप लगाया।
दिल्ली में आयोजित आदिवासी समागम के विरोध को मरांडी ने इन दलों का 'आदिवासी-विरोधी चेहरा' करार दिया।
मरांडी ने कहा कि सरना, सनातन और हिंदू में कोई अंतर नहीं — तीनों प्रकृति-उपासक हैं और जन्मजात पहचान है।
देश में 700 से अधिक जनजातियाँ और झारखंड में 32-33 जनजातियाँ हैं — मरांडी ने इसे विविधता में एकता बताया।
पेसा कानून की नियमावली में बदलाव कर आदिवासी अधिकारों को कमज़ोर करने का आरोप राज्य सरकार पर लगाया।

झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने 24 मई 2026 को रांची में BJP प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर आदिवासी समाज को विभाजित करने की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया। मरांडी ने कहा कि 24 मई को दिल्ली में आयोजित आदिवासी समागम का विरोध कर इन दोनों दलों ने अपना आदिवासी-विरोधी चरित्र स्वयं उजागर कर दिया है।

सरना, सनातन और हिंदू — एक साझी जड़

मरांडी ने कहा कि सरना, सनातन और हिंदू में कोई मूलभूत अंतर नहीं है, बल्कि तीनों में गहरी समानता है। उनके अनुसार, ये सभी प्रकृति के उपासक हैं और पेड़, पहाड़, पत्थर, जल एवं धरती माता की पूजा करते हैं। उन्होंने विविधता को रेखांकित करते हुए कहा कि जिस प्रकार सनातन और हिंदू परंपरा में अनेक जातियाँ और 36 कोटि देवी-देवता हैं, उसी प्रकार देश में 700 से अधिक जनजातियाँ और झारखंड में 32-33 जनजातियाँ हैं, जिनके अपने-अपने ग्राम देवता हैं। मरांडी के अनुसार, यही विविधता में एकता सरना, सनातन और हिंदू की साझा पहचान है।

कांग्रेस-झामुमो पर दुष्प्रचार का आरोप

मरांडी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और झामुमो यह भ्रामक प्रचार कर रहे हैं कि आदिवासियों को हिंदू बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे निराधार बताते हुए कहा कि हिंदू बनाने की कोई परंपरा ही नहीं है — सरना, सनातन और हिंदू तो जन्मजात होते हैं। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण तो क्रिश्चियन और मुसलमान बनाने में होता है। मरांडी ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस आज भी अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो' की नीति पर चल रही है।

महात्मा गांधी और कांग्रेस पर ऐतिहासिक संदर्भ

नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि देश की आज़ादी के बाद महात्मा गांधी ने स्वयं कांग्रेस पार्टी को भंग करने की सलाह दी थी, जिसे पार्टी ने अनसुना कर दिया। उन्होंने कहा कि अब जब देश से कांग्रेस की विदाई हो रही है, तब यह पार्टी समाज को तोड़ने के लिए BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर आदिवासियों को हिंदू बनाने के मनगढ़ंत आरोप मढ़ रही है।

पेसा कानून और आदिवासी अधिकारों पर सवाल

मरांडी ने झारखंड की राज्य सरकार पर वोट बैंक की राजनीति के लिए आदिवासी परंपराओं और रूढ़िगत व्यवस्था को कमज़ोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पेसा (PESA — पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरिया) कानून की नियमावली में बदलाव कर आदिवासियों के मूल अधिकारों को चोट पहुँचाई गई है।

सरकार की चुप्पी पर सवाल

मरांडी ने आरोप लगाया कि जहाँ 'सुदृढ़ीकरण' की आड़ में आदिवासियों का धर्मांतरण कराया जा रहा है, वहाँ कांग्रेस और झामुमो मौन साधे रहती हैं। उन्होंने कहा कि मूल समाज में अलगाव पैदा करने के इस कथित षड्यंत्र को सफल नहीं होने दिया जाएगा, क्योंकि अब आदिवासी समाज जागरूक हो चुका है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब झारखंड में आदिवासी पहचान और धर्मांतरण का मुद्दा राजनीतिक रूप से तेज़ी से संवेदनशील होता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

धर्मांतरण, पेसा — चुनावी नैरेटिव के केंद्र में है। BJP का सरना-सनातन-हिंदू एकता का तर्क एक सोची-समझी रणनीति है जो आदिवासी मतदाताओं को धार्मिक-सांस्कृतिक आधार पर पुनः परिभाषित करने की कोशिश करती है। दूसरी ओर, कांग्रेस और झामुमो का यह आरोप कि BJP आदिवासियों को हिंदू बनाना चाहती है — उतना ही राजनीतिक है। असली सवाल यह है कि पेसा कानून की नियमावली में क्या बदलाव हुए और उनका ज़मीनी असर क्या है — जिस पर दोनों पक्ष चुप्पी साधे हैं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस-झामुमो पर क्या आरोप लगाया?
मरांडी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और झामुमो आदिवासी समाज को बांटने और तोड़ने की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में आयोजित आदिवासी समागम के विरोध को इन दलों का आदिवासी-विरोधी रवैया बताया।
मरांडी ने सरना, सनातन और हिंदू को एक क्यों बताया?
मरांडी के अनुसार, तीनों परंपराएँ प्रकृति की उपासक हैं और पेड़, पहाड़, जल व धरती माता की पूजा करती हैं। उन्होंने कहा कि जैसे सनातन में अनेक जातियाँ हैं, वैसे ही देश में 700 से अधिक जनजातियाँ हैं — यही विविधता में एकता की साझा पहचान है।
पेसा कानून को लेकर मरांडी ने क्या कहा?
मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड की राज्य सरकार ने पेसा (PESA) कानून की नियमावली में बदलाव कर आदिवासियों के मूल अधिकारों को चोट पहुँचाई है। उनके अनुसार यह वोट बैंक की राजनीति के लिए आदिवासी परंपराओं को कमज़ोर करने की कोशिश है।
दिल्ली में आदिवासी समागम का विरोध क्यों हुआ?
मरांडी के अनुसार, कांग्रेस और झामुमो ने 24 मई को दिल्ली में आयोजित आदिवासी समागम का विरोध किया। BJP नेता ने इसे इन दलों का आदिवासी-विरोधी चेहरा बताया, हालाँकि विरोध के विस्तृत कारणों पर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं।
झारखंड में आदिवासी पहचान का राजनीतिक महत्व क्या है?
झारखंड की आबादी में आदिवासी समुदाय की बड़ी हिस्सेदारी है और राज्य की राजनीति में उनका वोट निर्णायक माना जाता है। सरना धर्म कोड, पेसा कानून और धर्मांतरण जैसे मुद्दे यहाँ चुनावी नैरेटिव के केंद्र में रहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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