उत्तर प्रदेश में बालवाटिका नवारंभ उत्सव: बच्चों ने रेत पर लिखी सीख की पहली इबारत
सारांश
Key Takeaways
- नन्हें बच्चों ने रेत पर अक्षर लिखकर शिक्षा का पहला कदम बढ़ाया।
- कार्यक्रम ने प्रारंभिक शिक्षा को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- अभिभावकों और समुदाय का सहयोग शिक्षा में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक है।
- खेल आधारित गतिविधियों से बच्चों में जिज्ञासा और रुचि विकसित होती है।
- सरकार की प्राथमिकता 3-18 वर्ष के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
लखनऊ, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जब छोटे हाथ रेत पर अक्षरों की पहली रेखा खींचते हैं, तो यह सिर्फ लेखन नहीं, बल्कि एक सशक्त भविष्य की शुरुआत है। 'बालवाटिका नवारंभ उत्सव' के अवसर पर अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जब छोटे बच्चों से रेत पर अक्षर और अंक लिखने के लिए कहा, तब छोटे हाथों ने उत्साहपूर्वक इस सीखने की प्रक्रिया को अपनाया।
किसी ने अक्षरों को लिखा तो किसी ने अंकों को, जिससे उनकी सीखने की पहली अभिव्यक्ति जीवंत हो उठी।
उत्तर प्रदेश में 'बालवाटिका नवारंभ उत्सव' के द्वारा प्रारंभिक शिक्षा को सशक्त बनाने में एक नई पहल का सफल क्रियान्वयन देखा गया। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के नेतृत्व में प्रदेश के सभी बालवाटिका युक्त विद्यालयों में यह उत्सव उत्साह और उमंग से मनाया गया।
लखनऊ के सरोजनीनगर ब्लॉक के रामचौरा स्थित प्राथमिक विद्यालय से इसकी औपचारिक शुरुआत हुई। इस दौरान रेत लेखन, खेल आधारित गतिविधियों और दिलचस्प शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ा गया। विशेष रूप से ३ से ४ वर्ष आयु वर्ग के बच्चों ने रेत पर अक्षर लेखन के जरिए खेल-खेल में सीखने का अनुभव प्राप्त किया, जिससे उनमें स्वाभाविक जिज्ञासा और शिक्षा के प्रति रुचि विकसित हुई।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा उनसे आगे बढ़े। इसलिए हमें उनकी भावनाओं के अनुसार प्रयास करना होगा। जब आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्त्री, शिक्षक और बच्चों की मां मिलकर प्रयास करेंगे, तो हमें सफलता जरूर मिलेगी।
उन्होंने कहा कि ३ से ६ वर्ष की आयु बच्चों के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सीखने का चरण है। 'नवारंभ उत्सव' का उद्देश्य हर बच्चे को प्रारंभिक अवस्था से विद्यालय से जोड़ना है, ताकि वे नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त कर सकें और आगे की कक्षाओं में सहजता से प्रवेश कर सकें। सरकार की प्राथमिकता ३ से १८ वर्ष तक प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
उन्होंने बताया कि बच्चों को आकर्षित करने के लिए विद्यालयों में दिलचस्प गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे बच्चे स्वयं विद्यालय आने के लिए प्रेरित हो सकें और सीखने की प्रक्रिया को आनंदपूर्वक अपनाएं।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि खेल आधारित शिक्षण, स्व-अधिगम एवं सक्रिय अधिगम के माध्यम से बच्चों के समग्र विकास, जिज्ञासा और रचनात्मकता को प्रारंभिक स्तर से ही सशक्त किया जा रहा है। 'सेल्फ लर्निंग' और 'एक्टिव लर्निंग' के जरिए बच्चों में आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता का विकास हो रहा है।
कार्यक्रम के दौरान ५८ बच्चों को उपहार पैकेट वितरित किए गए। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्वयं सुफियान, दीपाली, नंदिनी, आर्य विश्वकर्मा एवं इशानी सहित अन्य बच्चों को अपने हाथों से उपहार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।
इन उपहार पैकेट में स्लेट, चॉक, क्रेयॉन्स, वैक्स कलर, चॉकलेट्स, फ्रूटी, फल और स्नैक्स शामिल थे, जिससे बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कार्यक्रम के दौरान नवीन शैक्षिक सत्र २०२६-२७ के लिए पाठ्यपुस्तक वितरण की औपचारिक शुरुआत भी की गई। इसका शुभारंभ अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा एवं महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर नक्श, शिवांशी, अवंतिका, शिफा एवं आर्य शुक्ला सहित कुल २५ बच्चों को पाठ्यपुस्तकें वितरित की गईं, जिससे उनके शैक्षिक सत्र की सकारात्मक शुरुआत सुनिश्चित हुई।
नवारंभ उत्सव के अंतर्गत ३ से ६ वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के नामांकन को बढ़ावा देने के साथ-साथ ६ वर्ष पूर्ण कर चुके बच्चों के कक्षा १ में प्रवेश को सरल और प्रेरक बनाने पर विशेष बल दिया गया। विद्यालयों में प्रिंट-समृद्ध वातावरण, लर्निंग कॉर्नर और विविध शिक्षण सामग्री के माध्यम से बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित किया जा रहा है।
इस अवसर पर अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता भी देखने को मिली, जिससे बाल शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल सुदृढ़ हुआ। यह उत्सव केवल बच्चों के शैक्षिक जीवन की सशक्त शुरुआत का प्रतीक नहीं बना, बल्कि विद्यालय और समुदाय के बीच समन्वय को भी नई दिशा प्रदान कर रहा है।