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हावड़ा में 14 साल से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी दंपति गिरफ्तार, जाली दस्तावेज़ों से बनाए थे आधार-पासपोर्ट

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हावड़ा में 14 साल से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी दंपति गिरफ्तार, जाली दस्तावेज़ों से बनाए थे आधार-पासपोर्ट

सारांश

हावड़ा के जगाचा थाना क्षेत्र में 14 साल से छिपे बांग्लादेशी दंपति की गिरफ्तारी सिर्फ एक केस नहीं — यह उस पूरे तंत्र की परत-दर-परत उधेड़ती है जिसमें दलाल, जाली दस्तावेज़ और मतदाता सूची में सेंध शामिल है। SIR प्रक्रिया ने जो उजागर किया, वह प्रशासनिक सख्ती की नई शुरुआत का संकेत है।

मुख्य बातें

रमजान गाजी (36) और आरिफा बेगम (34) को हावड़ा जिले के जगाचा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
दंपति कथित तौर पर 14 वर्षों से भारत में अवैध रूप से रह रहे थे और सीमा पर दलालों को रकम देकर घुसे थे।
2014 तक जाली दस्तावेज़ों से राशन कार्ड, आधार, पैन, पासपोर्ट और मतदाता पहचान पत्र बनवा लिए थे; कथित तौर पर लोकसभा चुनावों में वोट भी डाला।
SIR प्रक्रिया के बाद दोनों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिसके बाद गिरफ्तारी हुई।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने निर्देश दिया कि पकड़े गए घुसपैठियों को सीधे BSF को सौंपा जाए।
दंपति के चार बच्चों में से दो को लिलुआह आश्रय गृह भेजा गया, दो माँ के साथ हैं।

पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के जगाचा थाना क्षेत्र से एक बांग्लादेशी दंपति को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित तौर पर पिछले 14 वर्षों से भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान 36 वर्षीय रमजान गाजी और 34 वर्षीय आरिफा बेगम के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों के खिलाफ आव्रजन और विदेशी अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम

पुलिस को सूचना मिलने पर जगाचा थाना क्षेत्र के उनसानी मझरपारा इलाके में स्थित एक घर पर छापा मारा गया। इस दौरान रमजान गाजी और आरिफा बेगम को हिरासत में लिया गया। दोनों अपने चार बच्चों के साथ वहाँ रह रहे थे।

पुलिस के अनुसार, सात साल से कम उम्र के दो बच्चों को हावड़ा जिले के लिलुआह स्थित एक आश्रय गृह में भेज दिया गया है, जबकि शेष दो बच्चों को उनकी माँ के साथ रखा गया है।

कैसे पार की सीमा, कैसे बनाए जाली दस्तावेज़

प्रारंभिक जाँच के बाद पुलिस ने बताया कि रमजान और आरिफा ने सीमा पर सक्रिय दलालों को बड़ी रकम देकर पश्चिम बंगाल में प्रवेश किया था। तब से वे कथित तौर पर जगाचा थाना क्षेत्र में रह रहे थे।

पुलिस के अनुसार, 2014 तक इस दंपति ने कथित तौर पर जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट बनवा लिए थे। आरोप है कि दंपति ने कथित तौर पर पिछले लोकसभा चुनावों में भी मतदान किया था।

रमजान कथित तौर पर स्थानीय बाज़ार में नारियल पानी, ताड़ के फल और अन्य सामान बेचकर अपना गुज़ारा करता था।

मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया

पुलिस सूत्रों के अनुसार, हाल ही में आयोजित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद रमजान और आरिफा के नाम पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। इसी प्रक्रिया के बाद दोनों की पहचान संदिग्ध घुसपैठियों के रूप में हुई और उनकी गिरफ्तारी का रास्ता खुला।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और सरकार के निर्देश

गुरुवार को हावड़ा स्थित नए कलेक्ट्रेट भवन में हुई उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पुलिस को निर्देश दिया कि हावड़ा थाने में पकड़े गए बांग्लादेशी घुसपैठियों को सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपा जाए।

राज्य सरकार ने यह भी कहा कि घुसपैठ के संदेह में हाल ही में गिरफ्तार किए गए लोगों के अलावा, पहले गिरफ्तार और वर्तमान में निर्वासन की प्रतीक्षा में जेल में बंद व्यक्तियों को भी हिरासत केंद्रों में स्थानांतरित किया जा सकता है।

आगे क्या होगा

रमजान गाजी और आरिफा बेगम के खिलाफ आव्रजन और विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज है और दोनों न्यायिक प्रक्रिया का सामना करेंगे। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ को लेकर प्रशासनिक सख्ती बढ़ाई जा रही है और SIR जैसी विशेष प्रक्रियाओं के ज़रिये मतदाता सूचियों की समीक्षा की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस पूरी व्यवस्था की विफलता की कहानी है जिसमें 14 साल तक न केवल अवैध निवास बल्कि राशन कार्ड, आधार, पासपोर्ट और मतदान तक संभव हो गया। SIR प्रक्रिया ने जो उजागर किया, वह बताता है कि दस्तावेज़ सत्यापन की खामियाँ कितनी गहरी हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह मामला अपवाद है या एक बड़ी प्रणालीगत समस्या की झलक — और क्या BSF को सौंपने के निर्देश जैसे कदम दीर्घकालिक समाधान हैं या केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हावड़ा में गिरफ्तार बांग्लादेशी दंपति कौन हैं?
गिरफ्तार दंपति की पहचान 36 वर्षीय रमजान गाजी और 34 वर्षीय आरिफा बेगम के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ये दोनों कथित तौर पर पिछले 14 वर्षों से हावड़ा जिले के जगाचा थाना क्षेत्र के उनसानी मझरपारा इलाके में अवैध रूप से रह रहे थे।
इस दंपति ने भारत में कैसे प्रवेश किया और कैसे रहे?
पुलिस के अनुसार, रमजान और आरिफा ने सीमा पर सक्रिय दलालों को बड़ी रकम देकर भारत में प्रवेश किया था। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर 2014 तक जाली दस्तावेज़ों से राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट बनवा लिए।
इनकी गिरफ्तारी कैसे संभव हुई?
हाल ही में आयोजित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान रमजान और आरिफा के नाम पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से हटाए गए। इसी प्रक्रिया के बाद संदेह गहराया और पुलिस ने सूचना के आधार पर छापा मारकर दोनों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार दंपति के बच्चों का क्या हुआ?
दंपति के चार बच्चों में से सात साल से कम उम्र के दो बच्चों को हावड़ा जिले के लिलुआह स्थित आश्रय गृह में भेजा गया है। शेष दो बच्चों को उनकी माँ आरिफा बेगम के साथ रखा गया है।
सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हावड़ा कलेक्ट्रेट में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद पुलिस को निर्देश दिया कि पकड़े गए बांग्लादेशी घुसपैठियों को सीधे BSF को सौंपा जाए। इसके अलावा, निर्वासन की प्रतीक्षा में जेल में बंद व्यक्तियों को हिरासत केंद्रों में स्थानांतरित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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